World Heart Day 2021 Dr Sunil Bamel of Maharaja Agrasen Hospital explains key points related to cardiac health and how to take care of heart

19

World Heart Day, Dr Sunil Bamel Exclusive: हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (World Heart Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का उद्देश्‍य दिल की सेहत के प्रति लोगों में जागरूकता (Awareness) फैलाना है. वैसे तो न सिर्फ इस दिन, बल्कि हर रोज अपने दिल की देखभाल की जानी चाहिए लेकिन अगर अभी तक आप अपनी हेल्थ को लेकर किसी कारण लापरवाही दिखाते आएं है तो आज से ही आप हेल्दी लाइफ की ओर एक कदम बढ़ा सकते हैं.

न्यूज़18 से इस विषय पर चर्चा करते हुए महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल, दिल्ली (Maharaja Agrasen Hospital, Delhi) के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ सुनील बामल (Dr. Sunil Bamel) ने दिल से जुड़ी समस्याओं और हार्ट केयर के बारे में हर अहम सवालों के जवाब दिए, जिन्हें जानना हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी है.

1) ज्यादातर किस उम्र के लोग हृदय संबंधी इलाज के लिए अस्पातलों में पहुंचते हैं?

एमडी, डीएम कार्डियोलॉजी (MD, DM Cardiology) डॉ सुनील ने बताया कि ज्यादातर 50+ एज ग्रुप के लोग हृदय संबंधी परेशानियों के कारण अस्पताल आते हैं. उनके अनुसार आमतौर पर इस उम्र के लोगों में कोरोनरी ब्लॉकेज (Coronary blockage) की समस्या होती है. हांलाकि, डॉक्टर ने इस बात की जानकारी भी दी कि उनके पास यंग पेशेंट्स (Young patients) भी आते हैं. यानी ऐसा नहीं है कि दिल से जुड़े लोग सिर्फ बुढ़ापे में ही होते हैं.

2) लोग समय रहते इलाज के लिए नहीं आते

हृदयरोग विशेषज्ञ के अनुसार, अधिकतर मरीज समय रहते मेडिकल ट्रीटमेंट या कंसल्ट करने के लिए नहीं पहुंच पाते. उन्होंने इसकी बड़ी वजह ये बताई कि सीने में दिक्कत या अन्य समस्या महसूस होने पर लोग खुद ही ये मान लेते हैं कि ऐसा शायद गैस, एसिडिटी आदि की वजह से हो रहा होगा.

यह भी पढ़ें- World Heart Day 2021: 29 सितंबर को क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड हार्ट डे, जानें इतिहास और महत्‍व

3) लोगों में जागरुकता की कमी
जानकारी के मुताबिक, बहुत सारे लोग डॉक्टर के पास इसलिए नहीं जाना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि अस्पताल जाएंगे, महंगे टेस्ट होंगे और अगर कुछ नहीं निकला तो पैसे बर्बाद हो जाएंगे. डॉक्टर का कहना है कि अगर जांच में कुछ बुरा नहीं निकलता तो ये लोगों के लिए खुशी की बात होनी चाहिए. हांलाकि, कई लोग अस्पताल दूर होने, जानकारी के अभाव आदि कारणों की वजह से भी समय रहते जांच नहीं करा पाते.

4) किन लक्षणों को देखने पर सतर्क हो जाना चाहिए?
डॉ सुनील बताते हैं कि आमतौर पर 4 तरह के लक्षण सबसे पहले दिखाई देते हैं.

– दर्द (Chest Pain)

– थकान महसूस होना (Fatigue)

– काम करते समय सांस फूलना

– पाल्पिटेशन (Palpitation) यानी धड़कन महसूस होना

कई मामलों में चक्कर आना या बेहोशी की स्थिति होना भी रिपोर्ट की गई है.

5) किन लोगों को दिल संबंधित रोगों का खतरा ज्यादा होता है?
डॉ बामल से मिली जानकारी के मुताबिक जिन लोगों का मोटापा ज्यादा होता है या जिन्हें शुगर, बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत होती है, उन्हें ह्रदय रोग होने का खतरा ज्यादा होता है. उन्होंने बताया कि जो लोग ज्यादा ड्रिंक या स्मोक करते हैं और सेडेंटरी लाइफस्टाइल (Sedentary lifestyle) फॉलो करते हैं, उन्हें रिस्क ज्यादा है.

यह भी पढ़ें- शरीर के चहुमुखी विकास के लिए ये है सर्वश्रेष्ठ योगासन

6) क्या दिल से जुड़ी बीमारियां जेनेटिक होती हैं?
इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए एक्सपर्ट ने बताया कि अगर किसी की फैमिली में हार्ट रिलेटेड प्रॉब्लम्स रही हैं, तो उनके दिल के अस्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है. उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि अगर एक व्यक्ति के पिता की मृत्यु 50 साल की उम्र में हॉर्ट अटैक के कारण हुई और दूसरे शख्स के पिता 70 साल की उम्र में भी सेहत के नजरिए से ठीक हैं तो बहुत संभावना है कि पहले व्यक्ति को जल्दी दिल से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़े. हांलाकि, अगर लोग शुरुआत से ही अपने खान-पान और सेहत का ध्यान रखें तो इस खतरे को कम किया जा सकता है.

7) हार्ट अटैक को आने से कैसे रोका जा सकता हैं?
डॉ बामल ने बताया कि उनके पास 2 तरह के पेशेंट्स आते हैं. एक तो वो जिन्हें पहले ही हार्ट अटैक आ चुका होता है और दूसरे वो जिनकी कोरोनरी में ब्लॉकेज होता है. पहले वाले स्टेबल कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Stable Coronary Artery Disease) वाले होते हैं. वहीं दूसरे अनस्टेबल कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Unstable Coronary Artery Disease) वाले होते हैं. इनमें से अनस्टेबल वाले यानी जिनकी कोरोनरी में ब्लॉकेज है वे फिर भी समय रहते अस्पताल पहुंच जाते हैं लेकिन स्टेबल कोरोनरी आर्टरी डिजीज वाले अगर समय रहते डॉक्टर से सलाह लें और मेडिकल ट्रीटमेंट शुरु करा लें तो बहुत हद तक हार्ट अटैक को टाला जा सकता है.

8) माता-पिता अपने बच्चों की दिल की सेहत का ख्याल कैसे रखें?
सुनील बामल ने कहा, ‘बच्चों की सेहत को ठीक रखने के लिए माता-पिता को उनका रोल मॉडल बनना होगा.’

9) हेल्दी दिखने वाले लोग कैसे पता करें हार्ट रिस्क है या नहीं?
बहुत सारे लोग फिट दिखने के बावजूद भी दिल से जुड़े रोगों की चपेट में आ जाते हैं. इस मामले में डॉक्टर ने सलाह दी है कि कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन ही इसकी जांच कर सकता है. इसके लिए एएससीवीडी रिस्क कैल्कुलेटर (ASCVD Risk Calculator) की सहायता ली जा सकती है. अगर रिस्क फैक्टर ज्यादा है तो समय रहते इलाज भी कराया जा सकता है.

यह भी पढ़ें- दांतों से जुड़ी दिक्कतों को न करें नजरअंदाज, देखभाल करने के लिए जानें खास टिप्स

10) कैसे दिल को रखें दुरुस्त?
– गुड लाइफस्टाइल
– ओबेसिटी कंट्रोल करना
– शराब न पीएं
– स्मोक न करें
– नियमित योग और मेडिटेशन करें
– रोज व्यायाम और कसरत करें
– हेल्दी फूड खाएं
– कैफीन का ज्यादा सेवन न करें
– पूरी नींद लें
– अच्छी बॉडी पाने के लिए स्टेरायड्स न लें
– नियमित बॉडी चेकअप कराएं
– डॉक्टर से सलाह लें

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

Source link