Will relieve neck pain griva-shakti-vikasak-asana

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सेहतमंद रहने के लिए नियमित तौर पर योग (Yog) करें. योग करने से आप बेहतर महसूस करते हैं और आपका शरीर लचीला बना रहता है. साथ ही आगे चल कर किसी तरह की शारीरिक समस्‍या का सामना नही करना पड़ता. आज कल मोबाइल का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने से गर्दन आदि में दर्द रहने लगता है. ऐसे में ग्रीवा शक्ति विकास क्रिया कर सकते हैं. वहीं सर्वाइकल पेन, कमर दर्द जैसी समस्‍याओं से निजात पाने के लिए भी योग जरूर करें. आज के फेसबुक लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) कई छोटे-छोटे योगाभ्‍यास के अलावा सर्वांग पुष्टि आसन, अर्ध तितली आसन और प्राणायाम आदि के बारे में बताया गया. इन अभ्यासों को करने से जहां पेट की मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं, वहीं हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. वहीं अपनी क्षमता के अनुसार ही योग करें. शुरुआत में कुछ सूक्ष्म व्यायाम करें.

अर्ध तितली आसन
ये तितली आसन के जैसा ही आसन होता है, परन्तु तितली आसन में दोनों पैरो को मोड़ कर बैठना होता है और इस आसन में बारी-बारी अलग-अलग पैर को मोड़ना होता . सबसे पहले फर्श पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं और एक बार में एक पांव को मोड़कर तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें.

भू-नमन आसन

इस आसन में सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं. अपनी क्षमता के मुताबिक अपने पैर फैलाएं. इस दौरान ध्‍यान रखें कि आपके पंजे बिल्कुल सीधे रहें. इसके बाद सांस लेते हुए हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं. अब अपने दोनों हाथों को पैरों की ओर लाते हुए पैरों की अंगुलियों को पकड़ें. इसके बाद अपनी ठोड़ी को जमीन से लगाने का प्रयास करें.

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भू-नमन आसन के फायदे
भू नमन आसन को नियमित तौर पर करने से डाइजेशन बेहतर होता है. इसके अलावा इससे पैरों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं.

ग्रीवा शक्ति विकासक योगासन
इस योग क्रिया को करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.

सर्वांग पुष्टि आसन
सर्वांग पुष्टि आसन के लिए मैट पर दोनों पैर फैलाकर सीधे खड़े हो जाएं. मुट्ठी इस तरह बंद करें कि अंगूठा दिखाई ना दे. अब दोनों हाथों को नीचे झुकाकर बाएं टखने के पास बायां हाथ नीचे और दायां हाथ कलाई के ऊपर रखें. सांस भरते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों से ऊपर की ओर बाएं कन्धे के बाजू से सिर तक ले जाएं और दाएं टखने की तरफ सांस छोड़े. दाहिना हाथ नीचे और बायां हाथ ऊपर रखें. दोबारा सांस लेकर दोनों हाथों के नीचे से ऊपर दाएं कन्धे तक लाते हुए सिर के ऊपर तक ले जाएं. अब बाईं ओर मुड़ते हुए दोनों हाथों को बाएं कन्धे से नीचे की ओर बाएं टखने तक लाएं. सांस छोड़े, हाथ को बदल-बदलकर बायां नीचे और दाहिना ऊपर रखें. इसे दो बार दोहराएं. हर अंग की चर्बी घटाने के लिए करें ‘सर्वांग पुष्टि आसन’ बेहतरीन है. लेकिन जो लोग लोअर बैक पेन की समस्या से परेशान हैं वे इस आसन को ना करें.

सर्वांग पुष्टि आसन के फायदे
-फैट को कम करता है
-कमर को लचीला बनाता है
-मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
-मोटापा कम करता है

ऊष्‍ट्र आसन
यह आसन रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए बहुत ही कारगर आसन है. इस आसन में शरीर ऊंट की मुद्रा में होता है. इस मुद्रा में शरीर को पीछे की तरफ झुकाया जाता है. इससे रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक दबाव बनता है. इस दबाव के कारण जल्दी ही रीढ़ की हड्डी की समस्याएं दूर होने लगती हैं. साथ ही यह लंग की कैपिसिटी को बढ़ाता है.

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मार्जरी आसन
मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज (Cat pose) के नाम से बुलाया जाता है. इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है. इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है. मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.

मार्जरी आसन के फायदे
-रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है
-पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है
-रक्त परिसंचरण में सुधार करती है
-पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है
-पेट को टोन करने में मदद करता है
-तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है
-मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है
-कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है

अनुलोम विलोम प्राणायाम
अनुलोम विलोम प्राणायाम: सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
-फेफड़े मजबूत होते हैं
-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
-वजन कम करने में मददगार
-पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
-तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
-गठिया के लिए भी फायदेमंद



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