UP Assembly: कोरोना काल में हो रहा मॉनसून सत्र आखिर किन मामलों में है दूसरे सत्रों से अलग? | lucknow – News in Hindi

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इस बार बदला-बदला होगा
यूपी विधानसभा सत्र का नजारा

उत्तर प्रदेश विधानसभा (UP Assembly) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) इस बार दूसरे सत्रों से कहीं अलग है.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा (UP Assembly) का मानसून सत्र (Monsoon Session) आज से शुरू हो गया है. कोरोना (COVID-19) काल के बीच तीन दिन के इस सत्र को बुलाने की संवैधानिक मजबूरी थी. संविधान कहता है कि 6 महीने के भीतर विधानसभा के 2 सत्र होने जरूरी हैं. इससे पहले फरवरी में बजट सत्र हुआ था. इसीलिए अगस्त के खत्म होने से पहले सत्र कराने की मजबूरी थी लेकिन, विधानसभा की होने जा रही ये बैठक पिछली बैठकों से कई मामलों में अलग होने जा रही है.

दो कारणों से इस बैठक का रूप पिछली बैठक से अलग हो गया है. पहला कारण है कोरोना और दूसरा अपराध. इन दोनों ही वजहों से विधानसभा का स्वरूप पिछले 6 महीने में काफी बदल चुका है. पिछली बैठक की तुलना में 6 सदस्य इस बैठक में कम हो गये हैं. आईये विस्तार से जानते हैं.

मातम

इससे पहले विधानसभा की बैठक बजट सत्र की हुई थी. 13 से 28 फरवरी तक सदन चला था. उस बैठक और इस बैठक में जो सबसे बड़ा अंतर है, वो बहुत दुखद है. इस बार जब विधानसभा बैठने जा रही है तो पिछली बैठक की तुलना में 6 सदस्य कम हो गए हैं. 4 सीटें तो इसलिए खाली हो गयी हैं क्योंकि चार विधायक अब इस दुनियां में नहीं रहे. इसमें दो मंत्री भी शामिल हैं. मंत्री कमल रानी वरूण और चेतन चौहान का हाल ही में निधन हो गया. कमल रानी कानपुर के घाटमपुर से जबकि चेतन चौहान अमरोहा से विधायक थे. इसके अलावा दो विधायक भी इस दौरान स्वर्ग सिधार गये. बुलंदशहर से वीरेन्द्र सिंह सिरोही और जौनपुर के मल्हनी से पारसनाथ यादव अब सदन में नहीं दिखेंगे. पारसनाथ यादव तो विधायकों को बहुत याद आयेंगे क्योंकि वे सातवीं बार विधायक बने थे.इसके अलावा दो और दिग्गजों को सदन के सदस्य याद करेंगे. ये मौजूदा विधानसभा में तो नहीं थे लेकिन, इन्हें भुलाया नहीं जा सकता. बेनी प्रसाद वर्मा और लाल जी टण्डन.

अपराध

अपने कर्मों से दो विधायकों की सदस्यता चली गई. ये धरती पर तो हैं लेकिन अपनी कलंककथा के साथ. पहले उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की विधायकी खत्म हुई और इस सिलसिले को आगे बढ़ाया आज़म खान के बेटे ने. रामपुर की स्वार सीट से अब्दुल्ला आजम की विधायकी खत्म की गई. सेंगर हत्या के मामले में तो अब्दुल्ला अपनी उम्र छुपाने के चक्कर में सदन से हाथ धो बैठे.

विधानसभा में खाली हैं 7 सीटें

वैसे तो 403 सीटों की विधानसभा में से 7 सीटें खाली हैं. फिरोजोबाद की टूण्डला सीट लम्बे समय से चुनाव न होने के कारण खाली चली आ रही है. इस तरह 4 विधायकों के निधन, दो के उपर अपराध सावित होने और 1 पर चुनाव न होने कारण कुल 7 सीटें खाली रहेंगी.

बता दें कि यूपी की विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. इनमें से 402 पर विधायक चुनाव जीतकर आते हैं जबकि 1 सीट पर मनोनीत किये जाते हैं. तीन दिन का मॉनसून सत्र 20, 21 और 24 अगस्त को होगा. हालांकि जरूरत के हिसाब से इसे घटाया या बढ़ाया जा सकता है.



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