केजीएमयू के अर्थोपेडिक लाइव सर्जरी के प्रसारण में दो सौ डाक्टर कर रहे प्रतिभाग

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स्पोर्टस मेडिसिन विभाग में दूरबीन विधि से जोड़ों की सर्जरी,तीन दशकों से है शुरू

​भास्कर न्यूज

लखनऊ।केजीएमयू के सांइटिफिक कन्वेंशन सेण्टर में आर्थोपेडिक स्पोर्टस मेडिसीन एवं एनाटमी विभाग द्वारा शनिवार को दो दिवसीय आथ्रोस्कोपी कान्कलेव एवं कैडेवरिक कार्यशाला की शुरूआत हुई।

मुख्य अतिथि कुलपति रि.ले.ज. डा.बिपिन पुरी की उपस्थिति में कार्यशाला का आयोजन किया गया।पहले ही दिन सात लाइव सर्जरी का प्रसारण आर्थोपेडिक ऑपरेशन कक्ष से कन्वेंशन सेण्टर के हाल में किया जा रहा है। जिसमें सम्पूर्ण भारत एवं नेपाल से आने वाले लगभग दो सौ सर्जन प्रतिभाग कर रहे है।

दूरबीन विधि द्वारा जोड़ो की सर्जरी आर्थोपेडिक एवं स्पोर्टस मेडिसिन विभाग में विगत तीन दशकों से नियमित रूप से किये जाते रहे हैं, इस प्रकार की कान्फ्रेन्स एवं कार्यशाला का आयोजन सन् 2017 से प्रतिवर्ष किया जा रहा है ।

पूणे से डा.सचिन तपस्वी,मुम्बई से डा.रोशन वाडे,कोलकाता से डा.स्वरनेन्दु समन्था,बंगलुरू से डा. राजकुमार अमरावती,चण्डीगढ़ से डा.मनित अरोड़ा,जयपुर से डा.राजीव गुप्ता, स्पोर्टस इन्जरी सेण्टर से डा.दीपक जोशी,डा.हिमांशु करारिया एवं डा.हिमांशु गुप्ता इत्यादि प्रमुख फैकल्टी है जो प्रतिभाग कर रहे है।

आथ्रोस्कॉपी एसोसियेशन ऑफ उत्तर प्रदेश की स्थापना प्रो.आशीष कुमार के प्रयासो से वर्ष 2017 में की गयी थी। लगभग एक सौ सदस्य है जो दूरबीन विधि द्वारा ऑपरेशन विधि को आगे ले जाने को प्रतिबद्ध है।जिसमें इस चिकित्सा विद्या को आगे बढ़ाने के विषय में चर्चा होगी। डा.आशीष कुमार के

इन प्रयासों के चलते वर्ष 2023 की इण्डियन आर्थोस्कोपी एसोसिएशन की नेशनल कान्फ्रेंस का आयोजन लखनऊ में किये जाने की जिम्मेदारी भी प्रदान की गयी है। जिसमें सम्पूर्ण विश्व से आने वाले आथ्रोस्कोपिक सर्जन प्रतिभाग करेंगे।

सम्मेलन के दूसरे दिन एनाटमी विभाग में कैडेवरिक कार्यशाला में भारत एवं नेपाल से आये पचास से अधिक सर्जन दूरबीन विधि द्वारा ऑपरेशन फ्रोजन कैडेवर्स पर करेंगे।इस प्रकार बिना किसी डर के ऑपरेशन कक्ष में प्रयोग किये जाने वाले सभी उपकरणों के साथ दूरबीन विधि द्वारा फैकल्टी के

साथ ऑपरेशन सीखने की यह सुविधा अत्यधिक महत्वपूर्ण है। देश गिने चुने संस्थानों में ही संभव है।इस सम्मेलन के आर्गनाइजिंग चेयरमैन प्रो.विनीत शर्मा एवं प्रो.पड़ा,डा.अनीता रानी एवं विभागाध्यक्ष डा.पुनीता मलिक कार्यशाला को क्रियान्वित कराने में पूर्ण योगदान कर रही है।