Tokyo Olympics Exclusive Boxer Lovlina Dug A Pond In Village To Learn Swimming In 2010 ANN

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Lovlina Borgohain Exclusive: लवलीना ने टोक्यो ओलंपिक में एक निश्चित कांस्य पदक हासिल किया है. उनकी सफलता से पूरे देश के साथ-साथ असम राज्य में खुशी का माहौल है. उनके कोच प्रशांत कुमार दास ने कहा कि लवलीना अपने लक्ष्यों के बारे में बेहद जिद्दी हैं और मंच तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करती है. उन्होंने कहा, “उसने ओलंपिक में भाग लिया है जिसने हमें बहुत गौरवान्वित किया है.”

लवलीना की जिद और सीखने की इच्छा बचपन से ही सामने आ गई जब वह अपनी दो बहनों के साथ तैरना, सीखना चाहती थीं, लेकिन उसके पास कोई तालाब नहीं था. तीनों बच्चों ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी और तैरना सीखने के लिए एक तालाब खोद लिया. एक स्थानीय अभिजीत सेन ने तालाब का जिक्र करते हुए कहा, “लवलीना बचपन से ही बहुत ज़िद्दी थीं और उसने अपनी तीन बहनों के साथ मिलकर यह तालाब बनाया था.” उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि लवलीना ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल करेंगी.

लवलीना बोर्गोहेन ने टोक्यो ओलंपिक खेलों में भारत का पहला मुक्केबाजी पदक सुनिश्चित किया, जब उन्होंने 30 जुलाई को पूर्व विश्व चैंपियन चीनी ताइपे की निएन-चिन चेन को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया. वह असम के गोलाघाट की रहने वाली हैं और उनके पिता टिकेन बोरगोहेन ने स्वीकार किया कि लवलीना उनकी बेटियों में सबसे जिद्दी हैं. 

उन्होंने कहा, “उसके पास इसका एक वाजिब कारण है. वह कहती है कि मैं जो कर सकती हूं, करूंगी. हमारी तीन बेटियां हैं और उसकी बड़ी बहनें लड़कियों जैसी हैं लेकिन वह एक लड़के जैसी है. जब लवलीना का जन्म हुआ तो हमें एक लड़के की उम्मीद थी और वह एक लड़की है, लेकिन लड़कों की तरह व्यवहार करती है.” 

क्यों लवलीना का मैच नहीं देखते हैं उनके पिता?
लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन को अपनी बेटी पर गर्व है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने आज तक अपनी बेटी का कोई मैच नहीं देखा है. उनका कहना है कि बेटी को मुक्के पड़ते देखकर उन्हें भी दर्द होता है, इसलिए जीत के बाद मैच देख लेते हैं. इस बार भी वे ओलंपिक का मैच का नतीजा आने के बाद ही देखेंगे. उनके पिता ने कहा, “मैं मैच नहीं देखता क्योंकि जब वह उसे कोई हिट करता है, तब मुझे भी दर्द होता है.” 

लवलीना का सफर 2010 में तब शुरू हुआ था, जब उन्होंने थाई बॉक्सिंग ज्वाइन की थी. उनके कोच प्रशांत कुमार दास ने जल्द ही देखा कि लवलीना का बॉक्सिंग के प्रति झुकाव है. वह घंटों बॉक्सिंग करती थीं. प्रशांत ने कहा, “तीन महीने के बाद मैंने देखा कि उसे रिंग में ले जाया जा सकता है. मैं उसे राज्यों और फिर राष्ट्रीय स्तर पर ले गया, जहां उसने एक पदक भी जीता.”

उनके पिता ने कहा कि, ‘भले ही लवलीना ने कोरोना महामारी के बाद पूरे दिन अभ्यास नहीं किया लेकिन वह बॉक्सिंग को लेकर काफी गंभीर थीं और सुबह-शाम दो घंटे अभ्यास करती थीं. देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान भी उनका अभ्यास बंद नहीं हुआ. उनके पिता ने अभ्यास के लिए अपने घर में एक तम्बू बनाया था. उन्होंने बताया कि, “लवलीना हमें उस कमरे में प्रवेश नहीं करने देती थी, जिसमें वह अभ्यास करती है. वह कहती थी कि आपका यहां कोई काम नहीं है, तुम सब जाओ, मैं यहां अकेले अभ्यास करूंगी.” 

23 वर्षीय मुक्केबाज ने न केवल कठिन अभ्यास किया, बल्कि एक सख्त डाइट का भी पालन किया. लवलीना की दो बड़ी बहनें हैं और तीन बेटियां होने के कारण उनके पिता की अक्सर आलोचना की जाती थी. हालांकि उनके पिता को इस तरह का कोई मलाल नहीं है और वह अपनी तीन बेटियों को समान रूप से प्यार करते हैं. लवलीना भले ही अब एक ग्लोबल पर्सनैलिटी बन चुकी हैं, लेकिन उनके पिता अब भी उन्हें वैसा ही देखते हैं. उन्होंने कहा, “वह मेरी बेटी है, भले ही वह सोना लाए या हीरा.” 

उन्होंने कहा कि यह समय है कि लवलीना उनके और पूरे देश के लिए एक उपहार घर ले आए. उनके पिता ने कहा, “हमने उसे जन्म दिया, उसे लाड़-प्यार किया और बड़ा किया, अब वह हमारे लिए उपहार लाएगी.” उनके पिता भी सभी से अपील करते हैं कि वे अपने सपनों का पीछा करते हुए अपने बच्चों का समर्थन करें और उनके साथ खड़े रहें. लवलीना के पिता टिकेन बोर्गोहेन ने कहा, “मैं सभी परिवारों से कहना चाहता हूं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका बेटा या बेटी है, अपने बच्चे की प्रतिभा को पहचानें और उन्हें अपने सपने को पूरा करने दें.”

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