प्रधान व सचिव ने हड़पा गरीब महिला का मानदेय, भुखमरी की कगार पर पहुंचा महिला का परिवार

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-पीड़ित महिला ने खण्डविकास अधिकारी से लगायी न्याय की गुहार

– मामले में ब्लाक स्त…रीय जांच टीम गठित, टीम सोमवार को सौंपेगी अपनी रिपोर्ट

भास्कर न्यूज़
लखनऊ। राजधानी के विकासखंड बीकेटी के अंतर्गत ग्राम रेवामऊ में ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया जा रहा है। एक ओर जहां सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकासखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में महिलाओं के उत्थान के लिए मनरेगा कार्यों के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

वहीं विकासखंड के ग्राम रेवामऊ के प्रधान व पंचायतमित्र संतोष कुमार व ग्राम पंचायत सचिव उदय प्रताप सिंह ने मिलकर सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया हैं। ग्राम रेवामऊ निवासी शकुंतला सिंह ने 30 सितंबर को खंड विकास अधिकारी को लिखित प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
पीड़िता शकुंतला सिंह का आरोप है कि वह एक निम्न परिवार की गरीब महिला है।उनका चयन लक्ष्मी समूह द्वारा सामुदायिक शौचालय स्थित ग्राम पंचायत रेवामऊ की देखरेख के लिए किया गया था। किंतु काफी समय बीत जाने के पश्चात अभी तक उन्हें कोई भी मानदेय नहीं मिला है।शकुंतला का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने बक़ाया मानदेय प्राप्त करने के लिए जानकारी की, तो पता चला कि उनके नाम से मानदेय का भुगतान किसी अन्य व्यक्ति के खाते में किया जा चुका है। आपको बता दें कि जिस शौचालय की देखरेख के लिए शकुंतला की नियुक्ति की गई थी। उस शौचालय की स्थिति अत्यंत जर्जर है।बता दें कि रेवामऊ गांव में वित्तीय सत्र 2020-21 में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था।

 

5 लाख 99 हजार रुपये की लागत में इसे बनाया जाना था। इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी, कि उन्हें अब शौच के लिए बाहर नहीं जाना होगा।लेकिन आधी लागत का आहरण कर शौचालय को बाहर से दिखाने के लिए तो ठीक कर दिया गया, लेकिन अंदर काम बाकी है। शौचालय में न तो मोटर है और न दरवाजा। यहां तक अंदर रंगाई-पुताई भी नहीं हुई है।

 

वहीं इस प्रकरण में जब ग्राम प्रधान से बात की गई, तो उन्होंने पीड़ित महिला को उसके पद से हटाने की बात कही।जबकि पूरे मामले की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि शकुंतला एक अत्यंत गरीब परिवार की महिला हैं।मजदूरी के अलावा उसका और भी कोई आजीविका का साधन नहीं है।

 

शकुंतला की एक पुत्री शादी योग्य है और उनका एक पुत्र दिव्यांग है, वहीं पति मजदूरी से जो कमाता है उसी से उनके परिवार का भरण पोषण होता है।वहीं कई महीने से मानदेय न मिलने के कारण शकुंतला को जीविका के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है।

शकुंतला ने बताया कि जब वह प्रकरण में विकास खंड अधिकारी पूजा सिंह से बात की तो उनका रवैया भी गैर जिम्मेदाराना दिखाई दिया। खंड विकास अधिकारी द्वारा मामले को कई बार टाला जा चुका है।

जिम्मेदार बोली
मामला मेरे संज्ञान में है।उक्त प्रकरण में एक जांच कमेटी का गठन किया गया है।कमेटी सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पूजा सिंह
खण्डविकास अधिकारी
बीकेटी