ईश्वर के चरणों में है सांसारिक बन्धनों से मुक्ति का मार्ग-मुक्तिनाथानंद

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भास्कर न्यूज
लखनऊ।कोरोना संक्रमण काल के दौरान लोगों में व्याप्त नकारात्मकता को दूर करने के उदेश्य से लगातार लोगों को सत्संग के माध्यम से जागरूक करते हुए शनिवार को प्रातः कालीन सत् प्रसंग में श्री रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने बताया कि जब तक मन में विषयासक्ति रह जाती है,

वासना रह जाती है तब तक हमें ईश्वर लाभ संभव नहीं होता है। यह बात श्री रामकृष्ण ने अपने भक्तगण को सुनाया। उन्होंने कहा कि एक दिन जब वह एक भक्त गृह में बैठे थे, तब श्री रामकृष्ण एक बालक- भक्त को देखकर आनंद में मग्न हो रहे थे।

उसी के संबंध में अन्य भक्त से उन्होंने कहा “इसमें जमीन, रुपया, स्त्री तीनों में से एक भी नहीं है,जिससे यह इस संसार में बँध जाये। स्वामी ने कहा कि इन तीनों में से एक पर भी मन को रखने से परमात्मा पर मन नहीं जाता,मन का योग नहीं होता।

संसारी मनुष्यों की यही दशा है, जो ईश्वर को भूले हुए हैं; कामिनी और कांचन से मन अगर हट जाए तो फिर चिंता ही क्या है? तब तो बस ब्रह्मानंद ही है।” रामकृष्ण जी पुनः बोले,”काम का नाश हो जाना क्या कुछ साधारण बात है, एकमात्र भगवान की कृपा से ही हमारे मन से विषयासक्ति दूर हो सकती है।” श्री रामकृष्ण ने स्वयं कहा “मेरा तो यह भाव बहुत जप और ध्यान करके ही दूर हुआ था।

छः महीने के बाद मेरी छाती में कुछ ऐसा होने लगा कि पेड़ के नीचे पड़ा हुआ मैं रो-रो कर माँ से कहने लगा था- माँ अगर कुछ बुरा हुआ तो मैं गले में छुरी मार लूँगा।” अगर कामिनी और कांचन से मन हटाने के लिए स्वयं भगवान श्री रामकृष्ण को इतना प्रयास करना पड़ा तो साधारण भक्त के लिए यह एकरूप असंभव की बात है।

स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने कहा अतएव अगर हम भगवान के चरणों में व्याकुल होकर आंतरिक प्रार्थना करें ताकि वह हमारे मन को पवित्र कर दें तब उनकी कृपा से ही हमारा मन पवित्र एवं साफ हो जाएगा एवं शुद्ध मन से हम ईश्वर के दर्शन करने में समर्थ होगें।