The immersion of bodies in the Ganges leads to sin the Banaras Scholar Council said

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यूपी से लेकर बिहार तक गंगा में शव मिलने का सिलसिला जारी है.

यूपी और बिहार में लगातार गंगा में मिल रहे हैं शवों पर विद्वानों ने अपनी राय रखनी शुरू कर दी है. इसकी पहल की है दुनिया में सनातनी परंपरा के रक्षक और धर्म के नियम कानूनों को बनाए रखने वाली संस्था काशी विद्वत परिषद ने.


  • Last Updated:
    May 16, 2021, 11:22 PM IST

बनारस. पंचक काल में शवों का दाह संस्कार ना करने की भ्रांति आज भी देश के कुछ हिस्सों में व्याप्त है तो क्या बीते कई दिनों से यूपी से लेकर बिहार तक गंगा नदी में मिल रहे शवों का कनेक्शन इसी भ्रांति से है. इस सवाल का जवाब तो तभी मिल सकता है जब इस मामले की हो रही जांच की रिपोर्ट सबके सामने आएगी. लेकिन गंगा में मिल रहे हैं शवों की घटना पर विद्वानों ने अपनी राय रखनी शुरू कर दी है. इसकी पहल की है पूरी दुनिया में सनातनी परंपरा के रक्षक और धर्म के नियम कानूनों को बनाए रखने वाली संस्था काशी विद्वत परिषद ने. काशी विद्वत परिषद के महामंत्री और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी ने वीडियो संदेश जारी किया है. जिसके जरिए उन्होंने बताया है कि ऐसी भ्रांति गलत है और शास्त्रों में पंचक काल में भी कुछ तौर तरीके अपनाकर शवों का दाह संस्कार किया जा सकता है. गंगा या किसी दूसरी नदी में सीधे शव बहाने से एक तो नदी का जल प्रदूषित होता है. दूसरा इस काम को करने से पुण्य की जगह आप पाप के भागीदार बन जाते हैं. प्रोफेसर रामनाथ द्विवेदी ने बताया है जो शव गंगा में बहाए जा रहे हैं या दिखाए जा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इससे तमाम तरह की भ्रांतियां पैदा हो रही हैं. कुछ लोगों का कहना है कि पंचक काल में जब शरीर छूटता है तो लोग इस भ्रांति में रहते हैं कि पंचक काल में शव का दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. गंगा में उसको डाल देना चाहिए. प्रोफेसर द्विवेदी ने कहा कि गंगा में साक्षात शव को ना डालें. इससे गंगा मां दूषित होंगी और आपको उसका पुण्य ना मिलकर पाप मिलेगा. शवों का दाह संस्कार विधिवत करिए. अगर पंचक में भी किसी का शरीर छूटता है तो हमारे शास्त्रों में उसका वर्णन है कि कुशा के पांच शव बना लिए जाते हैं और उनको साथ में जला दिया जाता है. इससे पंचक शांति हो जाती है और पंचक जन्य दोष भी समाप्त हो जाता है तो कोशिश हमारी यह रहनी चाहिए कि हम लोग दाह संस्कार के माध्यम से शवों का दाह संस्कार करें. किसी भी माध्यम से गंगा में सीधे शव प्रवाहित ना करें. इस तरह की भ्रांतियों को अपने से हटाएं. शास्त्रों में बहुत साफ उल्लेख है कि गंगा में सीधे शव उन्हीं लोगों के विसर्जित किए जाते हैं जो परमहंस होते हैं. जो सन्यासी होते हैं उनको भी वेद विधि से पूजन करके पंचोपचार करके गंगा में विसर्जित किया जाता है. अन्य किसी ग्रह को विसर्जित नहीं किया जाता है. बता दें की हर महीने कुछ दिनो के लिए पंचक काल रहता है.







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