शिक्षक संघ ने अपनी समस्याओं को लेकर महानिदेशक को सौंपा सात सूत्रीय मांगपत्र

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भास्कर न्यूज़
लखनऊ । उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री सत्य प्रकाश मिश्र की अगुवाई में संघ के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा से मिलकर विभिन्न शिक्षक समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।

अपना मांग पत्र महानिदेशक को सौंपने के बाद श्री मिश्र ने बताया कि हमने अपने मांग पत्र में अध्यापकों के निजी धन व संसाधन से गैर शैक्षणिक कार्य (डीबीटी ) कराए जाने का विरोध करते हुए कहा है,कि यह कार्य प्रत्येक विभाग में कम्प्यूटर, इंटरनेट, कम्प्यूटर ऑपरेटर की उपलब्धता के साथ कराया जाता है।

जबकि शिक्षको से बिना संसाधन यह कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है जो अनुचित है।इस अवसर पर प्रांतीय प्रांतीय मंत्री अरुणेंद्र कुमार वर्मा , प्रांतीय संयुक्त मंत्री आदित्य नारायण मिश्र,लखनऊ से सुरेश जायसवाल , सीतापुर से सुरेश चंद्र मिश्र व भदोही से विनोद कुमार मौजूद रहे।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में पदोन्नति नहीं हुई है।जूनियर हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक के लगभग 80 प्रतिशत पद रिक्त है। जो बिना इंक्रीमेंट व अन्य सुविधा प्रदान किये सहायक अध्यापकों से कराया जा रहा है,

30 सितम्बर 2021 की छात्र संख्या के अनुसार पद निर्धारित करते हुए शीघ्र पदोन्नति करने की जाय।वहीं सरकार द्वारा विद्यालय प्रबंध समिति व मध्याह्न भोजन खाता स्टेट बैंक में खोलने का आदेश किया गया है ,जबकि ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों से स्टेट बैंक की दूरी काफी ज्यादा है, जिससे वहां आना जाना धन व समय का अपव्यय होगा।

इसके साथ ही सरकार द्वारा एक अन्य आदेश जारी कर कहा गया है, कि बैंक से सम्बंधित कार्य विद्यालय अवधि के बाद ही संपादित किये जाये। इस प्रकार अध्यापक कब व कैसे इन दूरस्थ शाखाओं तक पहुँचेगा। इसलिए इन खातों को पूर्ववत जारी रखें।श्री मिश्र ने वर्तमान में 2014 के पश्चात नियुक्त अध्यापको का बीमा करने से बीमा कंपनी द्वारा इनकार
कर दिया गया है। तथा ऐसे में अध्यापकों की मृत्यु की दशा में दावा भी नही स्वीकार किया जा रहा है। जबकि विभाग द्वारा आज भी बीमा के लिए प्रतिमाह 87 रुपये ऐसे अध्यापको के वेतन से काटा जा रहा है।

वर्तमान में 2014 के बाद नियुक्त ऐसे अध्यापको के साथ ही पूर्व नियुक्त अध्यापको की बीमा राशि बढ़ाकर क़िस्त की कटौती करने की मांग की गई।वर्तमान सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियो को चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं सामान्य नागरिकों को स्वास्थ्य कार्ड जारी कर चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई है। जबकि अध्यापको को किसी भी प्रकार की चिकित्सा

सुविधा नही दी गयी है। उक्त के क्रम में अध्यापकों को भी राज्य कर्मचारियों के समान चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाये।
छठे वेतन आयोग द्वारा जारी वेतन संरचना में विसंगति के परिणाम स्वरूप अध्यापकों द्वारा पदोन्नति प्राप्त करने के पश्चात पदोन्नति के पद के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन 17140 से कम वेतन निर्धारित हो रहा था। इस विसंगति को दूर करने की मांग लंबे समय से संगठन द्वारा की जा रही है।

लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्र के समान व्यवस्था हमारे यहाँ भी लागू है । जबकि केंद्र सरकार द्वारा 28 सितम्बर 2018 को उस व्यवस्था में संशोधन कर यह आदेश कर दिया गया है,कि पदोन्नत कर्मचारी का वेतन पदोन्नति के पद के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम नही होगा।