stock market scenario in the country looks hopeful The market has touched new heights where investors have been encouraged-बाजार और निवेशकों की चुनौतियां

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जयंतीलाल भंडारी

देश में शेयर बाजार का परिदृश्य उम्मीदों भरा दिखाई दे रहा है। बाजार के नई ऊंचाइयां छूने से जहां निवेशकों के हौसले बुलंद हुए हैं, वहीं दूसरी ओर यह ऊंचाई कोविड-19 से ध्वस्त देश के उद्योग-कारोबार सहित संपूर्ण अर्थव्यवस्था को गतिशील करने में लाभप्रद बन रही है। यह कोई साधारण बात नहीं है कि कोरोना संकट के कारण बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सूचकांक जो 23 मार्च 2020 को 25981 अंकों पर आ गया था, वह 9 मार्च 2021 को 51,025 अंकों की ऊंचाई के पार पहुंच गया। जाहिर है, भारत में शेयर बाजार के आगे बढ़ने की संभावनाएं प्रबल दिखाई दे रही है, लेकिन साथ ही चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ऐसे में छोटे निवेशकों को शेयर बाजार में फूंक-फूंक कर कदम रखे जाने की जरूरत है।

इस समय दुनियाभर के विकासशील देशों के शेयर बाजारों में भारतीय शेयर बाजार की स्थिति कहीं मजबूत और संभावनाओं वाली बन रही है। बीएसई की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) भी दो सौ लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया है। शेयर बाजार में आई तेजी की वजह से दशक में पहली बार भारत की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से ज्यादा हो गया है। इस लिहाज से बाजार पूंजीकरण और जीडीपी का अनुपात सौ फीसद को पार करके एक सौ चार फीसद हो गया। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, हांगकांग, कनाडा, आॅस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड जैसे विकसित देशों में यह अनुपात सौ फीसद से अधिक है।

गौरतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण से आम और खास आदमी के बीच निवेश की प्रवृत्ति का विकास हुआ है। यही वजह है कि अक्सर शेयर बाजार के नाम से घबराने वाला सामान्य व्यक्ति भी छोटे निवेशक के रूप में शेयर बाजार में विशेष रुचि लेने लगा है। बदलते परिवेश में अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर शेयर बाजार का प्रभाव नजर आने लगा है। अगर देखा जाए तो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के स्वस्थ्य होने का अंदाजा मौजूदा समय में उसके शेयर बाजार के सूचकांक के उतार-चढ़ाव के आधार पर लगाया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का आईना भी बन गया है।

देश में शेयर बाजार के तेजी से बढ़ने की संभावनाओं के कई कारण हैं। कोरोना के टीकों की उत्पादन क्षमता के मामले में भारत अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। भारत दुनिया के ज्यादातर देशों को कोरोना टीके उपलब्ध करवा रहा है। 16 जनवरी 2021 से भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू हुआ और यह सफलता के साथ बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर गौर करें तो ब्रेक्जिट समझौते और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार से सकारात्मकता का माहौल भी बना है।

अमेरिका में नए राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ भारत के अच्छे संबंधों की संभावनाओं से भी निवेशकों की धारणा को बल मिला है। देश की विकास दर बढ़ने की उम्मीदों के कारण शेयर बाजार में देशी-विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिर से जोर पकड़ने लगी हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से निवेशकों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। लोगों को यह समझ में आने लगा है कि शेयर बाजार कोई जुआघर नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को नापने का एक पैमाना है।

एक फरवरी को पेश बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार के लिए जो अनुकूल प्रावधान किए हैं उनका दलाल पथ ने जोरदार स्वागत किया। वित्त मंत्री ने कर बढ़ाने के बजाय संपत्तियों के मौद्रीकरण का रास्ता चुना है, जिसे निवेशकों ने सराहा है। बजट में सरकार ने आर्थिक सुधार जारी रखने की इच्छाशक्ति भी दिखाई है। सरकार ने वृद्धि दर और राजस्व में बढ़ोतरी को लेकर जो बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है, उससे भी शेयर बाजार को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।

वित्त मंत्री ने बजट में प्रत्यक्ष करों और जीएसटी में बाईस फीसद बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। विनिवेश से प्राप्त होने वाली आय का लक्ष्य पौने दो लाख करोड़ रुपए रखा गया है। वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 6.8 फीसद तक बढ़ाने में कोई संकोच नहीं किया है। यदि वित्त मंत्री ने नए बजट में राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने पर अधिक जोर दिया होता तो इससे बाजार सहित निवेशकों के मनोबल पर बुरा असर पड़ सकता था। सरकार ने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएम) कानून और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की परवाह किए बिना एक नया राजकोषीय खाका पेश किया है।

बजट में वित्त मंत्री जिस तरह से निजीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ बीमा, बैंकिंग, विद्युत और कर सुधारों की दिशा में बढ़ी हैं, उससे भी शेयर बाजार को गति मिली है। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन भी शेयर बाजार के लिए लाभप्रद है। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की सीमा बढ़ा कर चौहत्तर प्रतिशत करने से इस क्षेत्र को नई पूंजी जुटाने और कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बीस हजार करोड़ रुपए की शुरूआती पूंजी के साथ ढांचागत क्षेत्र पर केंद्रित नए डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (डीएफआई) की स्थापना लाभप्रद कदम है। टीडीएस नियम भी सरल बनाने की पहल की गई है। इनके अलावा 2021-22 के बजट में कॉरपोरेट बांड बाजार की मदद के लिए एक स्थायी संस्थागत ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई है। बिजली वितरण क्षेत्र को उबारने के लिए बजट में तीन लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के बोझ से दबे सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए बीस हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार ने आइडीबीआइ बैंक के अलावा दो अन्य सार्वजनिक बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी के निजीकरण का भी प्रस्ताव किया है। 2021-22 के नए बजट में लाभांश पर भी स्पष्टता सुनिश्चित की गई है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशक बाजार में पैसा लगाने के लिए आकर्षित होंगे। नए बजट में जहां शेयर बाजार में जोखिमों को कम करने के उपयुक्त प्रावधान किए गए हैं, वहीं भारत में शेयर बाजार को और अधिक लाभप्रद बनाने के प्रावधान भी सुनिश्चित किए गए हैं।

चूंकि प्रतिभूतियों की मात्रा या कीमत में किसी भी तरह का हेरफेर बाजार में निवेशकों के विश्वास को हमेशा के लिए खत्म कर देता है। ऐसे में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा शेयर बाजार में हेरफेर की गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि पूंजी बाजार में जोड़ तोड़ को रोका जा सके। जरूरी है कि सेबी शेयर बाजार की गतिविधियों पर सतर्कता से ध्यान देकर शेयर बाजार को नई दिशा दें। बाजार के संदिग्ध उतार-चढ़ावों पर सतत निगरानी रखी जाए। शेयर बाजारों में घोटाले रोकने के लिए डीमैट और पैन की व्यवस्था को और कारगर बनाना जाए। शेयर बाजार को प्रभावी व सुरक्षित बनाने के लिए सूचीबद्ध कंपनियों में गड़बडियां रोकने पर विश्वनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने पर विचार होना चाहिए।

निसंदेह शेयर बाजार में जोखिमों को कम करने के प्रयासों के साथ-साथ उसे और लाभप्रद बनाने के प्रयास हो रहे हैं। स्थिति यह है कि अन्य कई देशों की तुलना में भारत के शेयर बाजार के विकास की गति धीमी है। चूंकि देश का आर्थिक विकास तेजी से हो रहा है, अतएव शेयर बाजार में छोटे निवेशकों के कदम तेजी से बढ़ाना जरूरी हैं। छोटे और ग्रामीण निवेशकों की दृष्टि से शेयर बाजार की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाना जरूरी है। शेयर बाजार के महत्त्व को ज्यादा से ज्यादा लोगों को समझाने की जरूरत है, ताकि शेयर बाजारों में निवेशकों की तादाद बढ़ सके।



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