अक्टूबर में बोएं आलू की अगेती किस्में, होगा अधिक मुनाफा:धर्मपाल

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– आलू की अगेती फसल की बुवाई की तैयारी में जुटे किसान

– अगेती फसल के लिए कुफ़री पुखराज व कुफ़री मोहन आलू बीज का करें चयन

भास्कर न्यूज़
लखनऊ।सब्जियों में आलू का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी उत्पादन क्षमता अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक है। इसलिए इसे अकाल नाशक फसल भी कहा जाता है। इसका प्रयोग सभी सब्जियों के साथ व एकल रूप में दोनों तरीके से भी किया जाता है। इससे कई प्रकार के व्यंजन भी तैयार किए जाते है।

इसकी बाजार में 12 महीने मांग बनी रहती है। इसे यदि सब्जियों का राजा कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा। इसी के साथ ही किसानों के लिए भी यह फसल बहुत फायदा देने वाली है क्योंकि इसकी डिमांड मंडी में हर मौसम में रहती है। अभी अक्टूबर में इसकी अगेती फसल की बोआई करके किसान बहुत अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

मंगलवार को आलू की अगेती फसल की बोआई के बारे उत्तर प्रदेश उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के उपनिदेशक आलू धर्मपाल यादव ने दैनिक भास्कर के वरिष्ठ संवाददाता अजय सिंह चौहान से एक विशेष बातचीत में बताया कि किसान अगेती आलू की फसल की बोआई की तैयारियां शुरू कर दें। उन्होंने यह भी बताया कि अगेती आलू

की फसल की बोआई के लिए किसानों को कुफरी पुखराज और कुफरी मोहन किस्म के आलू की बोआई करनी चाहिए, जो 70 से 80 दिन में तैयार हो जाती है। अभी अक्टूबर में इसकी अगेती फसल की बोआई करके किसान बहुत अच्छा लाभ कमा सकते हैं।आलू की फसल की बुवाई करते समय अगर हरी खाद उपलब्ध नहीं है तो 15 से 20 टन प्रति हैक्टेयर के

हिसाब से गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए तथा प्रति हैक्टेयर 150 किलोग्राम नत्रजन, 70 किलोग्राम तक फास्फोरस तथा 150 किलोग्राम तक पोटाश का प्रयोग करना चाहिए।श्री यादव ने यह भी बताया कि किसानों को आलू की बोआई करने से एक सप्ताह पहले शीत गृह से आलू निकालकर छाया में सुखाने के बाद जब अंकुरित हो जाए तो 15 से 25 सेमी की दूरी पर बोआई करनी चाहिए।