sambhaji raje news: छत्रपति संभाजी राजे ने कहा कि उनके लिए चुनाव से ज्यादा जनता महत्वपूर्ण है: sambhaji raje has said that public is most important to me

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मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में 6 सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव (Rajyasabha) में कल तक ताल ठोकने वाले छत्रपति संभाजी राजे (Chhatrapati Sambhaji Raje) ने शुक्रवार की सुबह एक प्रेस कांफ्रेंस में इस चुनाव को न लड़ने का ऐलान कर दिया है। हालांकि उनका यह बयान लगभग तय माना जा रहा था। दरअसल उन्होंने महाराष्ट्र की सभी पार्टियों से अपने लिए इस चुनाव में समर्थन मांगा था। वह यह चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ना चाहते थे लेकिन किसी भी पार्टी ने उन्हें अपना समर्थन नहीं दिया। हालांकि शिवसेना (Shivsena) ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के बाद उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन संभाजी राजे ने यह प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए कहा था कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा जाना चाहते हैं।

क्या बोले संभाजी राजे
छत्रपति संभाजी राजे ने आखिरकार आज औपचारिक रूप से यह ऐलान कर दिया कि वह आगामी राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने उनके साथ धोखा किया है। वो शिवसेना से राज्यसभा के लिए समर्थन चाहते थे। लेकिन शिवसेना ने उनके सामने पार्टी में शामिल होने की शर्त रख दी थी। जबकि संभाजी राजे निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते थे। इसी बात पर आम सहमति न बन पाने की वजह से शिवसेना ने उन्हें समर्थन देने से अपरोक्ष रूप से इंकार कर दिया। शिवसेना के दो नेताओं संजय राऊत और संजय पवार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। हालांकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने संभाजी राजे को अपना समर्थन जरूर दिया है लेकिन उनके पास सिर्फ एक विधायक का संख्या बल है।

उन्होंने कहा कि मेरा किसी भी राजनीतिक दल से कोई द्वेष नहीं है। मुझे यह चुनाव निर्दलीय लड़ना था। लेकिन समर्थन न मिल पाने की वजह से यह संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल का अपना एजेंडा है लेकिन मैं किसी एजेंडे में फंसना नहीं चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए चुनाव से ज्यादा जनता महत्वपूर्ण है। मैं अब पूरे महाराष्ट्र का दौरा करूंगा। संभाजी राजे ने कहा कि मुझे अब अपनी ताकत देखनी है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के लिए 42 विधायकों की ताकत का समर्थन मेरी ताकत नहीं है बल्कि राज्य की जनता का प्यार मेरी उर्जा है। उन्होंने कहा अब मैं अपने संगठन को बढ़ाऊंगा और उसे मजबूत करूंगा। साथ ही पूरे महाराष्ट्र में कल से ही दौरे की शुरुआत करूंगा।

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रेस से बाहर क्यों निकले संभाजी?
संभाजी को भी यह पता था कि राज्यसभा का चुनाव उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। उन्होंने हर पार्टी से खुद को समर्थन देने के लिए अपील की थी। महाविकास अघाड़ी सरकार में शामिल एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने कुछ समय पहले यह कहा भी था कि उनकी पार्टी से सिर्फ एक उम्मीदवार को उतारा जाएगा। उस उम्मीदवार की जीत पक्की होने के बाद जितनी भी वोट बचेंगे उन्हें छत्रपति संभाजी राजे के समर्थन में दिया जाएगा। लेकिन बात शिवसेना के पाले में आकर अटक गई। जब उद्धव ठाकरे ने यह फैसला किया की संभाजी राजे को तभी समर्थन दिया जाएगा जब वह पार्टी में शामिल होंगे।

शरद पवार इस बात को बखूबी जानते हैं कि मराठा समाज उनका परंपरागत वोट बैंक है। यदि वह शाही परिवार के वंशज का समर्थन नहीं करते हैं तो उन्हें इसका खामियाजा भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन शिवसेना ने संभाजी का समर्थन न करते हुए मराठा समाज को नाराज करने का जोखिम मोल लिया है। राज्यसभा में सांसद बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 42 वोटों की जरूरत है।

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किसके पास कितनी सीटें?
राज्यसभा का चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को विधायकों के 42 वोट मिलना चाहिए। फिलहाल महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 विधायक हैं। जिनमें से 106 विधायक भारतीय जनता पार्टी के हैं। जबकि शिवसेना के पास 55, एनसीपी के पास 53 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं। जबकि 13 निर्दलीय विधायक भी राज्य की विधानसभा में है। शिवसेना के एक विधायक रमेश लटके के निधन की वजह से एक सीट खाली है। पिछले साल एक उपचुनाव में एक सीट हारने की वजह से एनसीपी के भी एक वोट काम हो गया है। महाविकास अघाड़ी 170 विधायकों के समर्थन का दावा करती है।

महाराष्ट्र के 6 राज्य सभा सदस्यों पीयूष गोयल, विनय सहस्त्रबुद्धे और विकास महात्मे (तीनों बीजेपी के) पी चिदंबरम (कांग्रेस), प्रफुल्ल पटेल (एनसीपी) और संजय राउत (शिवसेना) का कार्यकाल 4 जुलाई को खत्म हो रहा है।

कैसे होता है राज्य सभा चुनाव?
किसी भी प्रत्याशी को राज्यसभा में जाने के लिए न्यूनतम मान्य वोट हासिल करने होते हैं। वोटों की गिनती सीटों की संख्या पर निर्भर करती है। इसे समझने के लिए हम महाराष्ट्र का उदाहरण लेते हैं। यहां विधायकों की संख्या 288 है। ऐसे में प्रत्येक सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने विधायकों का समर्थन हासिल होना चाहिए। इसे निकालने का भी एक अलग फार्मूला है। यह तय करने के लिए जितने सदस्य चुने जाने हैं उसमें एक जोड़ कर विभाजित किया जाता है। महाराष्ट्र में है राज्यसभा की 6 सीटों के लिए सदस्यों का चुनाव होना है। इसमें एक जोड़ने पर यह संख्या 7 हो जाती है। अब कुल सदस्यों की संख्या 288 है तो उसे 7 से विभाजित करने पर 41.14 का आंकड़ा आता है। फिर इसमें एक जोड़ने पर यह संख्या 42 हो जाती है। इस प्रकार किसी को राज्यसभा में जाने के लिए महाराष्ट्र में 42 विधायकों का वोट चाहिए। इसके अलावा वोट देने वाले हर विधायक को यह भी बताना होता है कि उसकी पहली और दूसरी पसंद का उम्मीदवार कौन है? इससे वोट प्राथमिकता के आधार पर दिए जाते हैं। यदि उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता का वोट मिल जाता है तो वह जीत जाता है नहीं तो इसके लिए भी चुनाव होता है।

छठी सीट पर फंसा था पेंच
आगामी 10 जून को महाराष्ट्र में राज्यसभा की 6 सीटों के लिए चुनाव होना है। आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी के दो जबकि महाविकास अघाड़ी सरकार की तीनों पार्टियों(शिवसेना, कांग्रेस, और एनसीपी) के एक-एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि छठवीं सीट के लिए पेंच फंसा हुआ था। क्योंकि इस सीट के लिए कोई भी पार्टी खुद के दम पर अपने उम्मीदवार को जीत नहीं दिलवा सकती थी।

इसी गणित को ध्यान में रखते हुए छत्रपति संभाजी राजे ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार यह चुनाव लड़ने का फैसला किया था। उन्हें उम्मीद थी कि सभी राजनीतिक दल उनका समर्थन करेंगे और वह भी राज्यसभा में दोबारा पहुंचने में कामयाब होंगे। यह माना जा रहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और कोल्हापुर के शाही परिवार के सदस्य संभाजी राजे की उम्मीदवारी कोई भी पार्टी विरोध नहीं करेगी। उन्हें लग रहा था कि जिस तरह से पिछली बार बीजेपी की मदद से राष्ट्रपति की कैंडिडेट के रूप में संभाजी ने राज्यसभा का सफर तय किया था। शायद इस बार भी वैसा ही करिश्मा दोबारा हो जाए। लेकिन शिवसेना द्वारा संजय पवार को मैदान में उतारे जाने के बाद यह पूरा खेल बिगड़ गया था।

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