Opinion: फिर वही मौतें, वही सख्ती, कब थमेगा जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला?

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इस साल के शुरुआती 5 महीनों में जहरीली शराब (Poisonous Liquor) से मौत का तांडव झेलने वाला जिलों में अलीगढ़, उत्तरप्रदेश का 12वां जिला है, जहां पिछले 4 दिनों में जहरीली शराब ने कई जिंदगियों को छीन लिया. सूत्रों की मानें तो शराब से मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा है. प्रशासन पर जहरीली शराब से मौतों के आंकड़े छुपाने का आरोप है. इस बार भी सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की टेढ़ी नजर देख जानलेवा अवैध शराब बनाने, बेचने वालों पर ताबड़तोड़, कमरतोड़ कार्रवाई, जब्ती, गिरफ्तारियों का एक्शन जारी है. आनन-फानन में चंद छोटे-बड़े अफसरों, कारिंदों पर निलंबन की गाज गिराई जा रही है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है यूपी में जहरीली शराब से मौतों का यह सिलसिला कब थमेगा? अकेले यूपी में इस साल अब तक हो चुकी 150 ज्यादा मौतें यह सवाल पूछ रही हैं, क्या भ्रष्ट सिस्टम और नेता-अफसर-शराब माफिया के गठजोड़ से मुक्ति के बिना यह संभव है?

सवाल अकेले यूपी का नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब समेत उन सभी राज्यों का है, जहां हर बार जहरीली शराब से मौतों के बाद सख्त कानूनों, एक्शन का शोर ऐसे ही उठता है. जैसा अलीगढ़ में हालिया मौतों के बाद देखा जा रहा है. ऐसा दिखाने की कोशिश की जाती है कि जहर बुझी शराब का खेल अब हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन हर जगह मरने वालों की तेरहवीं भी नहीं हो पाती, अवैध शराब का कारोबार जस का तस चलने लगता है. बता दें कि यूपी में आबकारी एक्ट की धारा 60 क के तहत मुकदमा दर्ज करने और कानून में मृत्युदंड तक देने का प्रावधान किया गया है. लेकिन जहरीली शराब का कारोबार बेखौफ चल रहा हैं, सवाल तो उठता है कि सरकार की निगहबानी के बावजूद ये कैसे संभव हो पा रहा है?

शिवराज, गहलोत, अमरिंदर भी दिखा चुके हैं सख्ती

मध्यप्रदेश के मुरैना में 12 जनवरी को जहरीली शराब से करीब 28 मौतों के बाद सीएम योगी जैसी ही सख्ती मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दिखाई थी और कई मंचों से माफिया को ललकारते हुए “टांग देने, लटका देने, 10 फीट जमीन के नीचे गाड़ देने, तबाह कर देने” जैसे ऐलान किये थे. इसके बाद कुछ दिनों की सख्ती भी दिखी, लेकिन वक्त गुजरने के साथ हालात फिर पहले जैसे हो गए. मध्यप्रदेश में गली-गली अवैध शराब बन और बिक रही है. राजस्थान के भरतपुर में भी जहरीली शराब से 16 और भीलवाड़ा में 6 मौतों के बाद अशोक गहलोत सरकार, पंजाब में अगस्त 2020 में मेथेनाल मिली जहरीली शराब से 111 लोगों की मौत के बाद अमरिंदर सिंह सरकार ने भी ऐसी ही सख्ती दिखाई थी, लेकिन भ्रष्ट सिस्टम हर कदम पर भारी पड़ा.अलीगढ़ः हर दिन बढ़ता जा रहा मौतों का आंकड़ा

अलीगढ़ जहरीली शराबकांड के पहले दिन 28 मई यानी शुक्रवार को 4 मौतों के साथ शुरुआती खबर के बाद शनिवार रात 2 बजे तक यह आंकड़ा गैर-आधिकारिक रूप से 56 तक जा पहुंचा. रविवार दोपहर तक पोस्टमार्टम केन्द्र तक 65 शव पहुंच चुके थे, जबकि सोमवार शाम तक मरने वालों की संख्या 80 तक जा पहुंची थी. हालांकि प्रशासन 28 मौतों से ज्यादा की पुष्टि नहीं कर रहा. जिलाधिकारी बार-बार यही कहते सुने गए, कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही जहरीली शराब से मृतकों की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा. अलबत्ता यह जरूर हुआ कि ज्यादा मौतों के आंकड़े सामने आने के बाद पोस्टमार्टम केन्द्र के प्रभारी को हटा दिया गया.

शुरुआती पुलिस कार्रवाई में लापरवाही के आरोप में एसओ अभय कुमार को चलता कर दिया गया. मेरठ में हुई जांच में पता चला कि अलीगढ़ जिले के करसुआ के सरकारी शराब ठेके से जहरीली शराब खरीदने वाले मरे. शराब में मिथाइल एल्कोहल मिले होने की पुष्टि हुई. मरने वालों में महुआखेड़ा, धनीपुर, क्वार्सी चंदनिया, करसुआ जैसे कई गांवों के गरीब, किसान, मजदूर, ड्राइवर हैं, जो सस्ती के लालच में जहरीली शराब पीकर मर गए.

मौतों ने सीएम योगी को भी झकझोर कर रख दिया

कई परिवारों में औरतों को विधवा और बच्चों को अनाथ कर देने वाले इस कांड ने सीएम योगी आदित्यनाथ को भी झकझोर दिया. उन्होंने आपात बैठक बुलाकर अगले 15 दिन के भीतर अभियान चलाकर शराब माफिया, अवैध शराब कारोबारियों को सीखचों के पीछे डालने, संपत्ति जब्त करने, एनएसए लगाने जैसे सख्त निर्देश दिए. योगी के निर्देश के बाद अपर मुख्यसचिव आबकारी आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी ने बड़ी कार्रवाई की. उन्होंने अपने महकमे के चंद आला अफसरों समेत 8 अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन और जांच की कार्रवाई की. पुलिस और आबकारी महकमे की टीमों ने शराब तस्करों की कमर तोड़ते हुए प्रदेश भर में 403 मुकदमे दर्ज किए, जबकि अवैध शराब से जुड़े 203 लोगों को गिरफ्तार करने के साथ उनके 9 वाहनों को भी जब्त कर लिया गया. सोमवार तक करीब 12000 लीटर अवैध शराब जब्त की जा चुकी है.

यूपी में जहरीली शराब की घटनाएं

यूपी में इस साल जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला 8 जनवरी को बुलंदशहर से शुरू हुआ था, जहां 5 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हो गई थी. 5 फरवरी को महोबा जिले में जहरीली शराब पीने से 5 लोगों की जान चली गई थी. 17 मार्च को प्रयागराज में 9, 22 मार्च को चित्रकूट जिले में 7, 1 अप्रैल को अयोध्या में 2 और प्रतापगढ़ जिले में 6 लोग जहरीली शराब पीने से जान गंवा बैठे थे. इसी तरह 2 अप्रैल को बदायूं जिले में जहरीली शराब से 2, 28 अप्रैल को हाथरस जिले में 5 मौतें हो गईं थीं. केवल गुजरे मई के महीने में यूपी के आजमगढ़ में जहरीली शराब पीने से 18, 12 मई को अंबेडकर नगर में 5, बदायूं में 2और अब अलीगढ़ जिले के गांवों में 28 मई से 31 मई तक 80 लोगों की जान जहरीली शराब निगल गई.

एक सवाल अपनी जगह बरकरार

अलीगढ़ में इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बाद सीएम योगी ने सख्त तेवर दिखाए, तो अचानक आबकारी अफसरों, पुलिस वालों को पता चल गया कि कौन कहां भट्टी चला रहा है, कौन-कहां अवैध शराब बिकवा रहा है. फौरन धरपकड़ शुरू हुई और दो सौ से ज्यादा लोग गिरफ्तार भी कर लिए गए. कोई देवदूत तो अचानक आकर तो सब कुछ बता नहीं गया. जाहिर है कि हर जिले, हर थाने, हर हल्के के पुलिस और प्रशासन से जुड़े अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक सबको सब कुछ पता रहता है, लेकिन कार्रवाई तब तक नहीं होती, जब तक कोई बड़ी घटना नहीं हो जाती. क्या आबकारी अमले की जिम्मेदारी यह नहीं है कि वह अपने मॉनिटरिंग और सिस्टम को मजबूत बनाए और शराब के अवैध कारोबार, भ्रष्टाचार को पनपने का मौका ही न दे? पूरे वक्त स्वयं को एक्शन मोड पर रखे? इसलिए जरूरी है कि सिस्टम में लगे घुन को पहले साफ किया जाए, तभी जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला रोका जा सकता है.

(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)



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