Mission2022 Jitin Prasad can create problem for Congress BJP to focus on brahmin vote bank up assembly election cgpg

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जितिन प्रसाद शनिवार को आएंगे लखनऊ.

UP Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की नाराजगी को दूर करने के लिए बीजेपी ब्राह्मण चेहरों को जोड़ने की कवायद में है. पार्टी जल्द जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) की जिम्मेदारी भी तय कर देगी.

लखनऊ. बीजेपी (BJP) में शामिल होने के बाद शनिवार को पहली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) लखनऊ पहुंच रहे हैं. दोपहर 1.30 बजे के करीब जीतीन एयरपोर्ट पहुंचेंगे जहां कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे. वहां से सीधे बीजेपी कार्यालय पहुंचेंगे जहा बीजेपी के नेता जितिन प्रसाद का स्वागत करेंगे. मिशन 2022 की तैयारियां बीजेपी ने शुरू कर दी है. जब तक जितिन कांग्रेस में थे तब ब्राह्मण चेतना परिषद के माध्यम से ब्राह्मणों को न्याय दिलाने का अभियान चला रहे थे. जितिन प्रसाद को अपने पाले में  करने के पीछे ब्राह्मण पॉलिटिक्स ही माना जा रहा है.

गौरतलब है कि बीजेपी के राष्ट्रीय महामंंत्री संंगठन बीएल संतोष और यूपी प्रभारी राधामोहन सिंह 21 जून को लखनऊ पहुंच रहे हैं. बैठकों का दौर चलेगा जिसमें दिल्ली के निर्देश पर रुपरेखा तय की जाएगी और जितिन प्रसाद की जिम्मेदारियां भी निर्धारित होंगी. कहा जाता है कि बीएल संतोष के लखनऊ दौरे के बाद ही जितिन प्साद के ज्वाइनिंग पर मुहर लगी थी.

सियासत तेज

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की नाराजगी को दूर करने के लिए बीजेपी ब्राह्मण चेहरों को जोड़ने की कवायद में है. पिछले दिनों बीएल संतोष ने लखनऊ में बीजेपी विधायकों और मंत्रियों से सरकार के कामकाज पर फीडबैक लिया था. इस चर्चा में यह भी निकल कर आया कि पार्टी को यूपी में ब्राह्मण समुदाय के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की जरूरत है जितिन इसमें मदद कर सकते हैं. वह खुद एक ब्राह्मण चेहरा हैं और पश्चिम यूपी के जिले शाहजहांपुर से आते हैं. यूपी की राजनीति में देखा जाए तो ब्राह्मणों समुदाय का वर्चस्व हमेशा रहा है. यूपी में लगभग 12 प्रतिशत ब्राह्मण वोट बैंक है. कई विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों की आबादी 20 प्रतिशत से भी अधिक बताई जाती है.  जीत-हार में उनकी भूमिका अहम रहती है. 2007 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने ब्राह्मण-दलित सोशल इंजिनियरिंग के जरिए अकेले दम पर 207 सीटें जीत ली थीं. बीएसपी ने इस चुनाव में 86 टिकट ब्राह्मणों को दिए थे. ऐसे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हर दल की नजर इस वोट बैंक पर है. समाजवादी पार्टी ने भी भगवान परशुराम की प्रतिमाएं स्थापित करने का ऐलान करके ‘ब्राह्मण कार्ड’ खेला है.







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