Maulana Shaheen Jamali e had good knowledge of Sanskrit language along with Urdu and Arabic languages.

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मदरसा इमदादुल इस्लाम के संचालक मौलाना शाहीन जमाली का निधन हो गया है.

Meerut News: मौलाना शाहीन जमाली (Maulana Shaheen Jamali) काफी समय से बीमार थे. उन्हें उर्दू और अरबी भाषाओं के साथ संस्कृत भाषा का भी अच्छा ज्ञान था.

मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में सदर बाजार स्थित मदरसा इमदादुल इस्लाम के संचालक मौलाना शाहीन जमाली (Maulana Shaheen Jamali) का इंतकाल हो गया. बताया गया कि वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनका मेरठ के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था. मौलाना जमाली को उर्दू और अरबी भाषाओं के साथ संस्कृत भाषा का भी अच्छा ज्ञान था. इसीलिए लोग उन्हें मेरठ के मौलाना चतुर्वेदी के नाम से जानते थे. मौलाना चतुर्वेदी जीवन भर संस्कृत और वेदों का ज्ञान मदरसों में भी बांटते रहे. वे उर्दू में लिखी रामायण भी पढ़ते थे . कुरान की आयतों के साथ संस्कृत के श्लोंकों का भी हवाला देते हुए मौलाना मदरसे में शिक्षा देते थे. तकरीबन पचास साल से वो मदरसा इम्दादुल इस्लाम  में बच्चों को तालीम दे रहे थे.

मौलाना महफ़ूज़ उर रहमान शाहीन जमाली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘मौलाना चतुर्वेदी’ के नाम से मशहूर थे. मौलाना ने हिंदुओं की धार्मिक पुस्तकों या वेदों का भी गहरा अध्ययन किया था. वो कहते थे कि लोग यह सोचते हैं कि अगर ये मौलाना हैं तो फिर चतुर्वेदी कैसे हैं और वो उनसे कहते हैं कि मौलाना अगर चतुर्वेदी भी हो जाए, तो उसकी शान घटती नहीं और बढ़ जाती है. देवबंद से पढ़ाई पूरी करने के बाद मौलाना शाहीन जमाली को संस्कृत सीखने इच्छा हुई. उसके बाद वेदों और हिन्दुओं के बाक़ी धार्मिक पुस्तकों में उनकी रूचि बढ़ती चली गई. वो कहते थे कि वेद पढ़ने के बाद उन्होंने महसूस किया कि उनका जीवन एक खाने में सिमट कर नहीं रह गया है, बल्कि दायरा और भी बड़ा हो गया है.

मदरसे में देते थे वेद की शिक्षा

मौलाना अपने मदरसे में छात्रों को सहिष्णुता का पाठ पढ़ाते थे. वो मानते थे कि इसके लिए दूसरे धर्मों के बारे में भी जानना ज़रूरी है. मौलाना चतुर्वेदी कहते थे कि उनका संदेश यह है मानवता के रिश्ते में कोई भेदभाव नहीं है. इसलिए वेदों में मानवता के बारे में कई गई बातों का हवाला देकर, वो लोगों को एक दूसरे के क़रीब लाने की कोशिश करते. उनके मुताबिक़ वेदों में तीन मूल बातें कही गई हैं, भगवान की पूजा, इंसान की मुक्ति और मानव सेवा.  इस असाधारण मदरसे के आसपास रहने वालों में मौलाना चतुर्वेदी ख़ुद भी लोकप्रिय हैं और उनका संदेश भी. यहां पढ़ने वाले छात्र ऐसे मौलाना चतुर्वेदी से शिक्षा ग्रहण कर खुद को गौरवशाली महसूस करते हैं.और आज उनके अलविदा होने पर बेहद दुखी हैं.चारों वेदों का ज्ञान रखने वाले मौलाना शाहीन जमाली चतुर्वेदी इस्लाम को लेकर कई किताबें लिख चुके थे. मौलाना महफूजुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने न सिर्फ मदरसा दारुल उलूम देवबंद से इस्लामिक शिक्षा की उच्च डिग्री ‘आलिम’ हासिल की है, उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से संस्कृत से एमए (आचार्य) भी किया था. चारों वेदों का अध्ययन करने पर उन्हें चतुर्वेदी की उपाधि मिली थी. वे सदर बाजार स्थित 130 साल पुराने मदरसा इमदादउल इस्लाम के प्रधानाचार्य थे. मौलाना चतुर्वेदी ने बताया था कि उन्होंने प्रो. पंडित बशीरुद्दीन से संस्कृत की शिक्षा हासिल करने के बाद एएमयू से एमए (संस्कृत) किया था. अपने उप नाम (चतुर्वेदी) की तरह बशीरुद्दीन के आगे पंडित लिखे जाने के बारे में बताया था कि उन्हें संस्कृत का विद्वान होने के चलते पंडित की उपाधि देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दी थी. उन्होंने चारों वेदों का अध्ययन किया तो उन्हें भी चतुर्वेदी कहा जाने लगा.







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