Mahima Shanidev Ki Narayan Himself Reached Kailas Marg To Take The Examination Of Shani Dev

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Mahima Shanidev Ki: शनिदेव देवराज इंद्र की ओर से डाली गई सभी बाधाएं पार कर कैलाश पर महादेव के निकट पहुंच चुके थे, लेकिन इसी समय उन्हें एक भद्रपुरुष नजर आए, जो दो बेहद वजनदार पात्रों में कुछ भर कर जंजीर से खींचते हुए गुजरे. शनि को देखकर दोनों ने एक साथ मार्ग पर चलने का निर्णय किया. इस दौरान भद्रपुरुष ने शनि से कैलाश जाने का प्रयोजन पूछा तो उन्होंने पूरा वाकया बयां कर दिया.

इस बीच पात्रों के वजन के चलते भद्रपुरुष के चलने की गति बेहद धीमी होने पर शनि ने पात्र के बारे में पूछा. इस पर भद्रपुरुष ने बताया कि पात्रों में उनके पिता समेत बुजुर्गों के सामान और धरोहरें हैं. जिन्हें वह छोड़ने की बजाय अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं, लेकिन वह अधिक होने से तेजी से नहीं चल पा रहे हैं. उन्होंने इसे छोड़ने की इच्छा जताते हुए शनि से इसके उचित होने का सवाल किया तो शनि ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

शनि के जवाब ने किया निरुत्तर 
शनि ने भद्रपुरुष को बताया कि संबंधों, रिश्तेदारों के साथ नजदीकी भले ही हमें मोहपाश में बांधकर कभी कमजोर या निष्पक्ष बनने में बाधा बन सकती है, लेकिन इन्हीं संबंधों की मदद से ही हम जीवन में लक्ष्य की ओर पूरे साहस के साथ बढ़ सकते हैं. दूर जाने के लिए संबंधों के बंधन को तोड़ना ठीक नहीं क्योंकि यही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं. कुछ बंधन हमें भटकने से रोकते हैं, ऐसे पवित्र बंधन को संबंध कहा जाता है. ऐसे में इनसे दूर रहना गलत नहीं, लेकिन इन्हें छोड़ना हमेशा ही गलत होगा. ऐसे में हे भद्रपुरुष आपके पात्रों को लेकर चलने में मैं आपकी सहायता करूंगा. 

क्षणमात्र में शनि ने पहचाना श्रीहरि का रूप
शनिदेव ने भद्रपुरुष के भेष में आए श्रीहरि को पहचान लिया. जवाब पूरा कर शनि ने कहा कि हे भद्रपुरुष मुझसे इस निर्जन जगह पर ऐसे सवाल करने वाले आम देव नहीं हो सकते हैं, आप नि:संदेश नारायण श्रीहरि विष्णु हैं. यह सुनकर श्रीहरि अपने विशालकाय रूप में आकर शनिदेव को आशीर्वाद दिया.

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