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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज नए कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है.

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में आज स्थायी कुलपति के रूप में आचार्य हरेराम त्रिपाठी ने कार्यभार संभाल लिया. अब तक वह लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सर्व दर्शन विभाग के वरिष्ठ आचार्य के रूप में पदस्थ थे.

वाराणसी. सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में आज स्थायी कुलपति के रूप में लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सर्व दर्शन विभाग के वरिष्ठ आचार्य हरेराम त्रिपाठी की नियुक्ति की गयी है. उनका कार्यकाल तीन वर्षो का होगा. विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल के द्वारा यह नियुक्ति की गयी है. आदेश 09 जून को जारी हो गया था. शनिवार को कुलपति प्रो त्रिपाठी ने दोपहर 12:00 बजे कुलपति कार्यालय मे कार्यवाहक कुलपति प्रो आलोक कुमार राय से अपना कार्यभार ग्रहण किया.

नवनियुक्त कुलपति हरेराम त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ ही विश्वविद्यालय में शिक्षण का स्तर ऊंचा उठना और यहां छात्र हितों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता होगी. उन्होंने नई शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय परंपरा का ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाएगा. स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार परक कोर्स खोले जाएंगे, प्राचीन प्रबंधशास्त्र पर पाठ्यक्रम  शुरू करने की बात की.

उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़े लगभग 1000 महाविद्यालयों के विकास की बात करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत इन संस्थानों का विकास करना है. विकास करना है. उन्होंने विश्वविद्यालय के मूर्धन्य विद्वानों का जो इस विश्वविद्यालय से जुड़े हुए थे. उनके जीवन पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने की बात कही है. जिससे आने वाली पीढ़ियां उनसे परिचित हो सकें. उनका लाभ ले सकें और उन्होंने विश्वविद्यालय को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी योजना बताई है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में प्राचीन वेधशाला और ज्योतिषि खगोली गणना के केंद्र हैं, जिससे आने वाले समय में इनको विकसित किया जाएगा. जिससे विश्वविद्यालय  संस्कृत जगत में एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाएगा. लोग इसको देखने के लिए आयेंगे. ग्रन्थालय को डिजिटलीकरण करने का पूर्णत: प्रयास करेंगे.

कैरियर- हरेराम त्रिपाठी ने वर्ष 1993 में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (रणबीर कैम्प-जम्मू) में अनुसंधान सहायक पद से कैरिअर की शुरुआत करते हुये वर्ष 2001 में लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में अध्यापक नियुक्त होकर वर्ष 2009 में सर्वधर्म विभाग में प्रोफेसर बने तथा विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष, छात्रावास अधिष्ठाता का दायित्व निर्वहन करते हुये आईसीपीआर के गवर्निंग बॉडी के सदस्य एवं अनेकों विश्वविद्यालयों में विभिन बॉडी के सदस्य भी हैं.सम्मान व पुरस्कार- वर्ष 2003 मे महर्षि वादरायण राष्ट्रपति पुरस्कार, शंकर वेदान्त, पाणिनी सम्मान एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से विशिष्ट पुरस्कार के साथ साथ अन्य सम्मान प्राप्त किये हैं.







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