अष्टमी हवन के साथ हुआ कन्या पूजन, मंदिरों में हुई मां महागौरी की आराधना

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मंदिरों में कोरोना संक्रमण से बचने के उपाय के साथ श्रद्धालुओं ने मां के किये दर्शन

– बुधवार को अष्टमी के हवन के साथ जगह जगह हुई कन्या पूजन

भास्कर न्यूज़
लखनऊ। नवरात्र के आठवें दिन बुधवार को राजधानी के ग्रामीण क्षेत्र के बीकेटी में स्थित मां चन्द्रिका देवी, उनई देवी, इक्क्यावन शक्तिपीठ व शहर के चौक स्थित बड़ी काली मन्दिर, लालबाग स्थित काली बाड़ी, चिनहट की मां जानकी मन्दिर, ठाकुरगंज के मां बाघम्बरी पूर्वी देवी सिद्धपीठ मन्दिर, गोमतीनगर के कामाख्या मन्दिर सहित अन्य मन्दिरों में भक्तों का तांता लगा रहा तथा मां महागौरी की पूजा अर्चना के साथ हवन-पूजन किया गया।

 

 

मंदिरों में मां के महागौरी स्वरूप की आराधना की गई। कोरोना संक्रमण से बचने के उपाय के साथ श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए। ठाकुरगंज स्थित मां पूर्वी देवी के मंदिर में भजनों का गुलदस्ता पेश किया गया तो शास्त्रीनगर दुगा मंदिर में विशेष श्रृंगार किया गया।

 

पंडित रविकांत बाजपेयी ने बताया कि नवरात्रि में व्रत के साथ कन्या पूजन का बहुत महत्व होता है। जो लोग नवरात्रि के 9 दिनों का व्रत रहते हैं या फिर पहले दिन और दुर्गा अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे लोग कन्या पूजन करते हैं। कई स्थानों पर कन्या पूजन दुर्गा अष्टमी के दिन होता है और कई स्थानों पर यह महानवमी के दिन होता है। 01 से लेकर 09 वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरुप माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा की जाती है।

 

उन्होंने यह भी बताया कि नौ दिन का पाठ करने वालों को प्रत्येक दिन एक कन्या का पूजन करना चाहिए। जो प्रतिदिन कन्या पूजन नहीं कर सकते उन्हें अष्टमी को पूजन करना चाहिए। अगर किसी कारण से अष्टमी का पूजन नहीं हुआ तो नवमी को भी पूजन का विधान है। माना जाता है कि दो वर्ष से दस वर्ष तक की कन्या का पूजन होना चाहिए। अष्टमी अथवा नवमी को कन्याओं के पैर धोकर भोजन करना और सामर्थ्य के अनुसार दान देना चाहिए।