IAS रजनीश दुबे के निजी सचिव का सुसाइड लेटर मिला, जानिए आत्महत्या की वजह– News18 Hindi

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लखनऊ. जानलेवी बीमारियों का कहर ब्रज क्षेत्र के कई जिलों में देखने को मिल रहा है. मथुरा और फिरोजोबाद में तो हाहाकर की स्थिति है. मथुरा में पिछले दो-तीन हफ्तों में ही 7-8 बच्चों की मौत हो गई है. फिरोजोबाद में मौतों का आंकड़ा 33 पहुंच गया है. ये सिलसिला कब तक थमेगा ये किसी को पता नहीं है लेकिन, किसी के समझ नहीं आ रहा है कि आखिर डेंगू, मलेरिया और स्क्रब टाइफस के इंफेक्शन से बच्चों की मौत क्यों हो रही है. आंकड़ों की बात करें तो मथुरा और फिरोजोबाद से ज्यादा संक्रमण के मामले तो दूसरे शहरों में हैं लेकिन, वहां मौतें नहीं हो रही हैं. मथुरा के फरह ब्लॉक के कोंह गांव में 5-6 बच्चों की मौत हुई है. लखनऊ से डॉक्टरों की टीम के साथ पहुंचे वेक्टर बॉर्न डिजीज के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. विकास सिंघल ने बताया कि बुखार से पीड़ित लोगों में डेंगू, मलेरिया और स्क्रबटाइफस का संक्रमण पाया जा रहा है. ज्यादातर मामले स्क्रब टाइफस के हैं. फिलहाल पीड़ित लोगों में से सभी की तबीयत बेहतर है.

बच्चों में ये मामले गंभीर
सिंघल का कहना है कि बच्चों की मौत के मामले में गंभीर ये है कि बुखार आने के दूसरे या तीसरे दिन ही उनकी मौत हो गई. जिन तीन बीमारियों से दूसरे लोग संक्रमित हैं उन्हीं से वे बच्चे भी संक्रमित थे जिनकी मौत हुई है. यहां अब स्थिति कंट्रोल में है.

…तो क्या है कारण
आगरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता ने बच्चों की मौत के कुछ कारण गिनाए. उन्होंने कहा कि पूरे ब्रज क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल है. जब बच्चों को बुखार हुआ तो गांव में लोगों ने इन्हीं झोलाछाप डॉक्टरों से दवाई ले ली. बुखार कम होने का कई दिनों तक इंतजार किया होगा. कम न होने की सूरत में झोलाछाप डॉक्टर ने और दवायें दी होंगी. झोलाछाप डॉक्टरों को दवाईयों की खुराक की समझ नहीं होती. बच्चों के लिए ये बहुत खतरनाक स्थिति होती है. ऐसे ही बहुत से बच्चों में दवाईयों की ओवरडोज हुई होगी. स्टेरॉयड भी दिए गए होंगे. इसकी वजह से किसी का लीवर तो किसी कि किडनी खराब हुई. हार्टअटैक भी पड़ा होगा. इसी वजह से बीमारी के कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई. जो सरकारी अस्पताल या किसी प्राइवेट डॉक्टर के पास भी पहुंच गए उनकी तबीयत ठीक हो गई.

पहले 3 से 7 दिन अहम
आगरा के सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विभाग में प्रोफेसर डॉ. नीरज यादव ने बच्चों की हो रही मौतों के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि डेंगू, मलेरिया और स्क्रबटाइफस जैसी बीमारियों में 3 से 7 दिन बहुत अहम होते हैं. इस दौरान सही इलाज न मिलने के कारण बच्चे शॉक में चले जाते हैं. यानी शरीर में पानी और दूसरे रसायनों की कमी के कारण हार्ट प्रॉपर काम नहीं कर पा रहा है. इससे शरीर के अंगों तक जरूरी पदार्थ नहीं पहुंच पा रहे हैं. इसीलिए हार्ड अटैक, किडनी, लीवर फेल्यर, सांस लेने में तकलीफ और खून के रिसाव के कारण बच्चों की मौत हो रही है. एस एन मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले ज्यादातर बच्चे गंभीर हालत में लाए गए हैं.

क्या फॉगिंग न होना वजह
इसमें तो कोई दो राय नहीं कि कोरोना से जारी लड़ाई के दौरान बाकी बीमारियों पर फोकस बहुत कम हो गया था. डेंगू और मलेरिया मच्छर के काटने से होता है. फॉगिंग होने से मच्छर मर जाते हैं लेकिन बात इतनी सी बस नहीं है. डॉ. विकास सिंघल ने बताया कि ऐसी बीमारियों में फॉगिंग से बहुत राहत नहीं मिलती. ये मच्छर ज्यादातर घरों में पनपते हैं. फॉगिंग का असर घर के अंदर प्रभावी नहीं होता है. ऐसे में लोगों को देखना पड़ेगा कि घरों के अंदर कूलर या किसी दूसरी जगह पर बरसात का पानी तो नहीं रुका है. कोंह गांव में घर-घर जाकर हमारी टीम ने जमे पानी की जगह को साफ कराया है. आशा वर्कर्स और ग्राम प्रधानों को इस काम में लगाया गया है कि वे लोगों को सचेत करें.

40 बच्चों की मौत!
वहीं फिरोजाबाद के बीजेपी विधायक मनीष असीजा का कहना है कि जिले में पिछले कुछ दिनों में 40 बच्चों की मौत हुई है. ज्यादातर में बुखार और ब्लड प्लेटलेट्स की कमी कारण रहा. वहीं सीएमओ फिरोजाबाद का कहना है कि हाल ही में हुई बच्चों की मौत डेंगू और वायरल के चलते हुई हैं. ये कोरोना की तीसरी लहर को नहीं दर्शाता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स की एक टीम जांच करने के पहुंची है.

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