haryana lathicharge on farmers: Kisan Andolan News: शिवसेना का मोदी सरकार पर हमला, लिखा- ‘तालिबानियों की तरह किसानों के सिर फोड़ रही है BJP’ – shivsena has written in samana editorial that bjp is behaving like taliban with farmers at haryana

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हाइलाइट्स

  • शिवसेना ने मुखपत्र सामना के जरिये साधा बीजेपी निशाना
  • शिवसेना ने खट्टर सरकार बताया तालिबानी सरकार
  • सामना में लिखा जैसे तालिबान निर्दोषों का खून बहा रहा है वैसे ही बीजेपी भी किसानों का खून बहा रही है
  • शिवसेना ने लिखा कि खट्टर सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक़ नहीं

मुंबई
महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में सत्ताधारी शिवसेना (Shivsena) ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी पर निशाना साधा है। इस बार मुद्दा बनी है हरियाणा में किसानों पर पुलिस की बर्बरता। सामना संपादकीय में लिखा गया है कि महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू जन आशीर्वाद यात्रा के बीच हरियाणा में किसानों पर निर्घृण और अमानवीय लाठीचार्ज हुआ है। यह लाठी हमला साधारण नहीं बल्कि अंधाधुंध गोली से भी ज्यादा भयंकर है। अफगानिस्तान में तालिबानी जिस तरह से हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देकर इंसानों को मार रहे हैं, उसी तालिबानी तरीके से हरियाणा में बीजेपी सरकार ने सैकड़ों किसानों के सिर फोड़कर भारत माता की भूमि को खून से भिगो दिया है।

अमृत महोत्सव में बहा खून
सामना ने लिखा है कि स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाए जाने के बीच यह खून-खराबा हुआ। ‘किसानों के सिर फूटने तक मारो, आंदोलन के लिए उतरे किसानों के सिर पर निशाना साधकर लाठी-डंडे मारो। सिर फूटना ही चाहिए’, ऐसा आदेश पुलिस को देते हुए उपजिलाधिकारी आयुष सिन्हा का वीडियो देश भर में वायरल हुआ है। उपजिलाधिकारी का आदेश सरकारी आदेश होता है। सरकार ने किसानों को खत्म ही किया। ‘किसानों के सिर फोड़नेवाली हरियाणा सरकार बर्खास्त करके वहां राष्ट्रपति शासन लगाओ’, ऐसी मांग अब कोई करनेवाला है क्या?

राष्ट्रपति शासन की मांग
सामना ने लिखा है कि मोदी सरकार का एक केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र में आकर मुख्यमंत्री को मारने की धमकी देता है। इसके संबंध में उस पर सूक्ष्म कानूनी कार्रवाई होते ही ‘महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाओ ऐसा शोरगुल मचाने वाले यही लोग हरियाणा के खून से लथपथ किसानों की तस्वीरें देखकर चुप हैं। कौन हैं उपजिलाधिकारी आयुष सिन्हा? किसानों का सिर फोड़ो ऐसा बेतुका आदेश देता है। ऐसे अधिकारी को पल भर भी नागरी सेवा में नहीं रहना चाहिए। उसकी बर्खास्तगी का काम तो सरकार कर सकती है कि नहीं?

सिर फोड़ कर जनआशीर्वाद ले रहे हैं
सामना ने लिखा है कि सरकार को जन आशीर्वाद चाहिए। वो किसानों के सिर फोड़कर मिलेगा क्या? पिछले वर्ष भर से पंजाब-हरियाणा के किसान दिल्ली की सीमा पर अपनी मांगों को लेकर ताल ठोंककर बैठे हुए हैं। धूप, हवा, बरसात, तूफान की परवाह किए बगैर वे वहां दृढ़तापूर्वक खड़े हैं। इस आंदोलन में अभी तक दो सौ के करीब किसान शहीद हुए हैं। किसान एक ही जगह डटे रहे। फिर भी सरकार का मन नहीं पसीजा। हजारों किसान संसद अधिवेशन के दौरान दिल्ली में आकर जंतर-मंतर रोड पर आंदोलन कर रहे थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कदम वहां मुड़े नहीं।

किसानों के मन की बात नहीं जानी
सामना ने लिखा है कि किसानों के ‘मन की बात’ क्या है? उनके बाल-बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे। इसके लिए तीन काले कृषि कानून को रद्द करो, यही उनकी मांग है। खेती का निजीकरण रोको और कृषि उत्पन्न बाजार समितियों को कॉर्पोरेट वालों के हाथों में जाने न दें, समर्थन मूल्यों का कानून बनाओ इसके अलावा बड़ी मांग क्या है? लेकिन इस मांग के लिए हजारों किसान गाजीपुर की सीमा पर वर्ष भर से बैठे हैं और सरकार उनके साथ अमानवीय व्यवहार कर रही है। इतना ही नहीं, शनिवार को आंदोलनकारी किसानों पर शैतानी हमला भी हुआ।

किसानों की हत्या करने का प्रयास
सामना ने लिखा है कि बीजेपी की राज्य स्तरीय बैठक शुरू होने के बीच किसानों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विरोध में केवल नारेबाजी की। इसलिए पुलिस ने सरकारी आदेश से किसानों की हत्या करने का प्रयास किया। एक मंत्री पर महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई की इसलिए राज्य सरकार असहिष्णु बोला गया। इतना होने के बावजूद खामोशी अपनाने वाली बीजेपी महाराष्ट्र में मंत्री को खा-पीकर जमानत देने के बाद भी शोरगुल मचा रही है। जरा उस खट्टर सरकार के शैतानी राक्षसी हमले की ओर देखो। खून से लथपथ किसानों के सिर, दर्द से थरथरा रहे शरीर को देखो। वो तुम्हें क्यों नहीं दिखाई दे रहा?

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शिवसेना ने लिखा कि खट्टर सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक़ नहीं

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