प्रधानों की मांगों पर शासन रजामंद,जल्दी बढ़ेंगे अधिकार कल्याण के लिए कोष बनेगा

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भास्कर न्यूज
गोसाईंगंज, लखनऊ।
आठ सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधानों की वार्ता अब अन्तिम दौर में पहुंच गयी है। नवंबर के पहले सप्ताह में सरकार इसकी घोषणा कर सकती है। पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव ने यह जानकारी आज एक प्रतिनिधि मण्डल को दी है।
राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता में मांगों पर विचार विमर्श किया गया। राष्ट्रीय प्रवक्ता ललित शर्मा ने यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि 28 अगस्त की बैठक में दिये गए मांग पत्र पर सहमति बनी है। प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमण्डल से वार्ता में अधिकारों की वृद्धि पर सहमति बनी है। 2 लाख के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि के साथ पंचायत प्रतिनिधियों के लिए कल्याण कोष स्थापित किये जाने की जानकारी दी गयी है।

 

बताया गया है कि राज्य स्तर पर धनराशि के मात्राकरण के जरिये मानदेय में वृद्धि पर सहमति बनी है।नरेगा के तहत भुगतान का अधिकार प्रधानों को दीये जाने पर शासन राजी हो गया है। कार्य प्रणाली में सुधार की दिशा में भी कई मुददों पर रजामंदी बनी है। पंचायत की धनराशि से आर्केटेक्ट तथा इंजीनियर की सुविधाएं लेने का निर्णय लिया गया है।राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि सचिवों की तैनाती आस-पास की पंचायतों में किये जाने का वादा शासन ने किया है। प्रशासनिक मद में 10 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध कराए जाने के साथ जिला योजना में प्रधानों के दो प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने का सैद्धांतिक निर्णय भी लिया गया है। अपर मुख्य सचिव से प्रधानों के राज्य स्तरीय अधिवेशन की मांग की गयी है। बैठक में लखनऊ,हरदोई,सीतापुर,बाराबंकी तथा बुलंदशहर के जिलाध्यक्षों सहित कई मंडलीय पदाधिकारी भी शामिल थे।