Exclusive: कोरोना महामारी और लॉकडाउन में कैसे पीवी सिंधु ने की टोक्यो ओलंपिक की तैयारी? एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में किया खुलासा

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<p style="text-align: justify;">भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने रविवार को चीन की जियाओ हे बिंग को हराकर टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. सिंधु दो ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी बन गईं हैं. सिंधु ने इस मुकाबले में शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और पहले गेम में चीनी खिलाड़ी को 21-13 से हराकर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. इसके बाद उन्होंने दूसरे गेम में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल अपने नाम कर लिया. सिंधु ने चीनी खिलाड़ी बिंग को 52 मिनट तक चले मुकाबले में 21-13, 21-15 से हराया.</p>
<p style="text-align: justify;">इससे पहले सिंधु ने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता था. हालांकि, टोक्यो में भले ही उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन लगातार खिलाड़ियों की हार से निराश देशवासियों को उन्होंने खुश होने का मौका दिया है. टोक्यो ओलंपिक 2020 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले पीवी सिंधु ने एबीपी मांझा से विशेष बातचीत की. सबसे पहले पीवी सिंधु आपको एबीपी और पूरे देश की तरफ से बहुत बहुत बधाई. आपने टोक्यो में देश का नाम रोशन किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल- लगातार दो ओलंपिक में दो मेडल जीतकर कैसा लग रहा है?</p>
<p style="text-align: justify;">जवाब- यह मेरे लिए और देश के लिए गर्व की बात है. यह बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि 2016 में चीज़ें बहुत अलग थीं और अब पांच साल होने के बाद 2021 टोक्यो में चीजें बहुत अलग हैं. क्योंकि प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और लोगों को उम्मीदे बहुत ज्यादा थीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल- सिंधु जी यह वही शटल है, जिससे कल आप खेली थीं. हमने आयोजकों से रिक्वेस्ट करके हमारे दर्शकों के लिए यह मांगी है. इसी शटल से आपने इतिहास रचा था. कितनी कठिनाइयों का आपने सामने किया. आपने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता था और फिर महामारी के बाद अब टोक्यो ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिलाया. यह सफर कितना मुश्किल रहा?</p>
<p style="text-align: justify;">जवाब- सच कहूं को मैंने यह पांच साल बहुत मेहनत किया. यह सफर काफी उतार चढाव भरा रहा. कई बार जीत रही थी, कई बार हार रही थी. लेकिन वास्तव में कोरोना महामारी की वजह से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था और फिर लॉकडाउन भी था. हमारे पास प्रैक्टिस करने का मौका तक नहीं था. मैं घर पर ही थोड़ा बहुत अभ्यास करती थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल- सिंधु यह डेढ़ साल काफी कठिनाई भरे रहे, देश के लोगों ने काफी कुछ देखा, उनको आपने खुश होने का मौका दिया है. लेकिन क्या आपने यहां दर्शकों और अपने फैंस को मिस किया?</p>
<p style="text-align: justify;">जवाब- बिल्कुल मैंने दर्शकों को और अपने फैंस को काफी मिस किया. 2016 में बहुत लोग थे. लेकिन इस बार महामारी की सख्त नियमों की वजह से फैंस नहीं थे. लेकिन सच में मैंने उन्हें बहुत मिस किया. लेकिन वर्चुअली मुझे सभी ने बहुत सपोर्ट किया और अपना प्यार दिखाया. मैं उनकी शुक्रगुज़ार हूं. उन लोगों के सपोर्ट की वजह से और उनकी शुभकामनाओं की वजह से ही मैं आज यहां हूं. मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहूंगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">जवाल- सिंधु आपतो जानती हैं, ये दिल मांगे मोर…..रियो में आपने सिल्वर दिया और अब टोक्यो में ब्रॉन्ज तो पेरिस में हम आपसे क्या उम्मीद करें?</p>
<p style="text-align: justify;">जवाब- अभी मैं सिर्फ मौजूदा वक्त को एन्ज्वॉय करना चाहती हूं. पेरिस के लिए भी मैं वादा करती हूं कि मैं बहुत मेहनत करूंगी और अपना 100 प्रतिशत दूंगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सवाल- सिंधु ऐसा कहते हैं कि जीत आपको और जीत दिलाती है. आज जीतीं साथ ही और भी एथलीट्स ने जीत दर्ज की. आज भारतीय महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया. इसके लिए आप क्या कहना चाहेंगी?</p>
<p style="text-align: justify;">जवाब- मैंने वो मैच देखा था. मैं पूरी भारतीय महिला टीम को मुबारकबाद देना चाहूंगी. उन सभी ने बहुत अच्छा खेला. मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी देना चाहूंगी. और मुझे उम्मीद है कि वो सेमीफाइनल में भी अच्छा करेंगी. &nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>

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