मां ललिता देवी के दर्शन मात्र से ही पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना!

19

 

नवरात्रि विशेष…
– यहां गिरा था देवी सती का हृदय,यहां आज भी धड़कता है मां का हृदय

– चक्रतीर्थ में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के धुल जाते हैं सभी पाप

– सच्ची श्रद्धा भाव रखने वाले भक्त की पूरी होती है हर मुराद

अजय सिंह चौहान/भास्कर न्यूज़

लखनऊ। वैसे तो मां के मंदिरों में रोज़ाना ही भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन नवरात्रि में मां के शक्तिपीठों में भक्तों का नज़ारा देखने लायक होता है। लोग इन नौ दिनों मां के विभिन्न शक्तिपीठों में उनके दर्शन करने जाते हैं। बता दें कि जहां मान्यताओं के अनुसार जब विष्णु भगवान ने भोलेनाथ के क्रोध से ब्रह्मांड को बचाने के लिए देवी सती के 51 टुकड़े कर दिए थे।जिसके बाद जहां भी देवी सती के गहने और शरीर के अंग गिरे वो स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

आज हम आपको 51 शक्तिपीठों में से ऐसे प्रमुख शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के सभी कष्ट, दुख दूर हो जाते हैं और मां अपने हर एक भक्त की झोली खुशियों से भर देती हैं। आइए जानें इस अनूठे शक्तिपीठ के बारे में जहां पर देवी सती का हृदय गिरा था।

कहा जाता है, कि यह एक ऐसा शक्तिपीठ है,जहां आज भी मां का हृदय धड़कता है।उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के नैमिषारण्य में स्थित मां ललिता देवी मंदिर है। जहां माता सती का हृदय यानि कि दिल गिरा था। बता दें कि नैमिषारण्य तीर्थ ऋषि मुनियों की तपोभूमि माना जाता है। इस स्थान पर एक चक्रतीर्थ भी है।


मान्यताओं के मुताबिक इस चक्रतीर्थ में भगवान विष्णु का चक्र गिरा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार चक्रतीर्थ में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के सभी पाप धुल जाते हैं।नैमिषारण्य में ही माता ललिता देवी का प्रसिद्ध धाम है। इस मंदिर की एक खास बात ये भी है, कि यहां जो भी मां का भक्त अपने मन में सच्चे श्रद्धा भाव से आता है, वो कभी खाली हाथ नहीं लौटता है,

 

मां उसकी सभी मन्नते ज़रूर पूरी करती हैं। यहां पर मां के भक्त अपनी मन्नते पूरी होने तक एक धागा वहीं मंदिर में बांध देते हैं। और फिर मन्नत पूरी होने के बाद उस धागे की गांठ को खोल देते हैं। साथ ही कुछ लोगों का मानना है, कि माता ललिता को भेंट चढ़ाने से मां जल्द ही फल देती हैं।इस शक्तिपीठ पर यूं तो पूरे साल श्रद्धालुओं के दर्शन पूजन का क्रम बना रहता है, लेकिन नवरात्रि में विशेष पूजन के कारण भक्तों की संख्या में कई गुना इजाफा हो जाता है।

 

बता दें कि भगवान विष्णु ने इस ब्रह्मांड को भोलेनाथ के क्रोध से बचाने के लिए देवी सती के 51 टुकड़े कर दिए थे, और फिर देवी सती का हृदय इस जगह पर आकर गिरा। इस शक्तिपीठ में स्थापित देवी को त्रिपुर सुंदरी, राज राजेश्वरी और ललिता मां के नाम से भी जाना जाता है।मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस बार कोरोना काल के कारण भक्तों को पूरे एक वर्ष के बाद नवरात्रि में माता के दर्शन हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर आते समय मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।