लोगों में धैर्य व सहनशक्ति की कमी से आत्म ​हत्या की भावना होती है जागृत— डा.अनिल निश्चल

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केजीएमयू में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर वेबिनार आयोजित

भास्कर न्यूज

लखनऊ। केजीएमयू में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस अवसर के पूूर्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वेबिनार के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत चर्चा की।जिसमें मानसिक चिकित्सा विभाग एवं राजकीय महाविद्यालय कुचलाई,सीतापुर के द्वारा शनिवार को एक संयुक्त वेबीनार का आयोजन किया गया।

जिसका विषय था,’मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता’इस वेबीनार का मुख्य उद्देश्य था हमारे समाज में मौजूद विषमताओं तथा असमानताओं पर प्रकाश डालना एवं उनको दूर करने के प्रयासों पर जोर देना। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन ने’एक असमान्य दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य’ को मुख्य विषय बताते हुए

इस बात पर जोर दिया कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित संसाधनों की कमी है और आवश्यकता है कि इन सुविधाओं को सर्वव्यापी बनाने की दिशा में प्रयास किया जाए।वेबीनार के मुख्य वक्ता डॉ.शहला नुसरत किदवई, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय,कुचलाई, सीतापुर,डॉ विवेक अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, मानसिक चिकित्सा विभाग, केजीएमयू,

डॉ.अनिल निश्चल,प्रोफेसर,डॉ बंदना गुप्ता, एडीशनल प्रोफेसर,डॉ.शहला नुसरत किदवई ने मानसिक स्वास्थ्य की महत्वता पर जोर देते हुए यह बताया कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ मन का होना अत्यंत आवश्यक है और इस बात पर भी बल दिया की शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत ही मानसिक चिकित्सा से संबंधित परामर्श दाताओं से संपर्क करना चाहिए ताकि बीमारी बढ़ ना जाए।

डॉ. विवेक अग्रवाल ने मानसिक तंदुरुस्ती पर चर्चा करते हुए सकारात्मक सोच की गुणवत्ता पर प्रकाश डाला और यह बताया की एक सकारात्मक सोच हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। उन्होंने एक नियमित दिनचर्या अपनाने पर जोर दिया और साथ ही साथ यह भी बताया की मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने आप को समझना तथा उन बातों से बचना जो हमारे तनाव का कारण बन सकती हैं।

इसी श्रंखला में डॉ.अनिल निश्चल ने आत्महत्या जैसे गंभीर विषय पर चर्चा करते हुए यह बताया कि आज के सामाजिक परिवेश में सहनशक्ति तथा धैर्य की कमी होने से लोगों में आत्महत्या की भावना जागृत होती है। उन्होंने ऐसे महत्वपूर्ण संकेतो के बारे में चर्चा की जो यह बताने में सहायक हो सकते हैं कि क्या किसी व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने की इच्छा उत्पन्न हो रही है

और उनके निष्पादन के तरीकों के बारे में भी चर्चा की। डॉ. बंदना गुप्ता ने सामान्य रूप से पाए जाने वाले मानसिक रोग जैसे अवसाद, घबराहट, ओसीडी के बारे में सरल शब्दों में व्याख्या की तथा उनसे संबंधित विचारों और उनसे निकलने के उपायों पर प्रकाश डाला।

वेबीनार का संचालन डॉ अमित सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, मानसिक चिकित्सा विभाग,एवं डॉ. अनुभूति जैन,असिस्टेंट प्रो.,मनोविज्ञान, राजकीय महाविद्यालय कुचलाई, सीतापुर ने संयुक्त रुप से किया।वक्ताओं के उद्बोधन के पश्चात प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रश्न पूछें जिनका वक्ताओं ने सरल ढंग से उत्तर देकर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

वेबीनार के अंत में डॉ.प्रीति वाजप्पे,एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास, राजकीय महाविद्यालय कुचलाई,सीतापुर, ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस वेबीनार में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी तथा चिकित्सा क्षेत्र के विभिन्न विशेषज्ञों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा वेबीनार को सफल बनाया।