दुर्गा के तीसरे स्वरूप चन्द्रघंटा की शक्ति की भक्ति में मगन हुए भक्त, चहुंओर लगता रहा जयकारा

26

– नवरात्रि के तीसरे दिन चन्द्रिका देवी मंदिर सहित राजधानी के सभी देवी मंदिरों व पंडालों में बही आस्था की गंगा

– ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर बजते गीतों से भक्तिमय हुआ वातावरण

अजय सिंह चौहान/भास्कर न्यूज़
लखनऊ।शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा के रूप में दर्शन-पूजन किया गया। इस दौरान अर्गला-स्तोत्र से गांव और नगर गुंजायमान रहा। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों में स्थित देवी मंदिरों व स्थापित किए गए मां दुर्गा के पंडालों में भक्तों की भीड़ लगी रही। लोगों ने साविधि पूजन-अर्चन किया। ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर बजते भक्ति गीतों व घंटा-घड़ियाल की गगनभेदी गूंज से पूरा जिला भक्तिमय बना रहा।

 

नवरात्रि के तीसरे दिन मंगला आरती के बाद से ही शहर के चौक स्थित बड़ी काली मन्दिर, लालबाग स्थित काली बाड़ी, चिनहट की मां जानकी मन्दिर, ठाकुरगंज के मां बाघम्बरी पूर्वी देवी सिद्धपीठ मन्दिर, गोमतीनगर के कामाख्या मन्दिर सहित अन्य मन्दिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।

वहीं ग्रामीण क्षेत्र के कुम्हरांवा बाबागंज मार्ग पर स्थित उनई देवी मंदिर, चन्द्रिका देवी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों में देवी भक्त मां की एक झलक पाने के लिए कतारबद्ध हो गए। भोर में ही महिलाएं थाल में नारियल, चुनरी आदि पूजन सामग्री लेकर आदि शक्ति के दर्शन करने के लिए निकल पड़ीं। श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी।बीकेटी स्थित चन्द्रिका देवी मंदिर में पट खुलने के पहले से ही भक्तों की लंबी कतार लग गई। देवी के जयकारे से वातावरण गूंज उठा।

वहीं राजधानी में माता का एक स्थान ऐसा भी है, जहां 51 शक्ति पीठों के दर्शन भक्तों को एक साथ होते हैं। मां जगदंबिका का यह मंदिर सीतापुर रोड पर नन्दना बख़्शी का तालाब में स्थित है।यहां इस 51 शक्तिपीठ की स्थापना सन 1998 में बिसवां सीतापुर निवासी रघुराज दीक्षित ने अपने पुत्र आशीष की स्मृति में की थी।

 

इस शक्तिपीठ धाम में भारत के विभिन्न स्थानों व पाकिस्तान, चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश , नेपाल में स्थित शक्तिपीठों  की रज लाकर उनकी प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। सामान्य दिनों के अलावा नवरात्रि में यहां लाखों भक्तों की भीड़ मां का आशीर्वाद लेने के लिए उमड़ती है।देवी सप्तशती के अनुसार देवासुर संग्राम में देवी ने घंटे की नाद से अनेक असुरों का दमन किया।

ऐसा शोर और नाद हुआ कि असुर काल के ग्रास बन गए। शास्त्रों ने इन्हें सुर और संगीत दोनों की मुद्रा शांत और आत्मविभोर करने वाली मानी है। सुर और संगीत दोनों को ही वशीकरण का बीज मंत्र समझा गया है। चंद्रघंटा देवी इसी की आराध्य शक्ति हैं। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती है। सुरक्षा के मद्दनेजर भी मंदिर के आसपास व्यापक प्रबंध किए गए थे।