Covid19: कोरोना काल में सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रहे Food Packets, सावधान कर रहे हेल्थ एक्सपर्ट्स

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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण (Coronavirus) काल में पैकेटबंद खाने-पीने (Food packet) की चीजें सेहत के लिए कई तरह के खतरे पैदा कर रही हैं. वसा, नमक और चीनी की खतरनाक मात्रा के स्वास्थ्य (Health) पर पड़ने वाले असर को ले कर देश भर के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ और संगठनों ने आगाह किया है. इन्होंने मांग की है कि अब जल्द से जल्द ऐसे पैकेटबंद खाने-पीने के सामानों पर भी ऊपर की ओर ही स्पष्ट चेतावनी लगाई जाए.

कई देशों में तंबाकू उत्पादों (Tobacco Products) की तरह शुरू की गई फ्रंट ऑफ पैकेट लेबल की व्यवस्था से लोगों की खान-पान संबंधी आदतों में तुरंत बदलाव देखा गया है. विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर देश को बीमारियों के बड़े खतरे से बचाना है तो ऐसे उत्पादों पर सेहत संबंधी चेतावनी तुरंत शुरू करना बहुत जरूरी है.

इन उत्पादों को ज्यादा स्वादिष्ट बना कर लोगों को इनकी लत लगाने के लिए इनमें बहुत ज्यादा मात्रा में वसा, नमक और चीनी का उपयोग हो रहा है जिससे कैंसर, हृदय रोगों और लीवर संबंधी रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है.

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पैकेटबंद खाने-पीने के सामानों पर चेतावनी लागू करने की मांग
सेहत के लिए खतरा पैदा कर रहे पैकेटबंद खाने-पीने के सामानों पर चेतावनी लागू करने की मांग के समर्थन में स्वास्थ्य और न्यूट्रीशन के क्षेत्र में काम करने वाले कई संगठन सामने आए हैं. न्यूट्रिशन एडवोकेसी इन पब्लिक इंटरेस्ट (NAPI), इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (IAPSM), पीडियाट्रिक एंड एडोलसेंट न्यूट्रिशन सोसायटी, एपिडेमियोलॉजी फाउंडेशन ऑफ इंडिया, ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया (BPNI) जैसे संगठनों ने इसे तत्काल लागू करने को जरूरी बताया है.

सेहत के लिहाज से बेहतर उत्पाद चुनने में मदद करती है चेतावनी
इस विषय पर आयोजित एक वेबिनार के दौरान पोषण विशेषज्ञ और ब्राजील (Brazil) की साओ पाउलो विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर न्यूट्रिशन में अध्यापक नेहा खंडपुर ने ऐसी चेतावनी के प्रभाव को साबित करने के लिए दुनिया भर के कई शोधों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में हुए शोध के आधार पर यह स्पष्ट है कि नमक, चीनी और वसा के संबंध में लोगों को स्पष्ट जानकारी देने वाली चेतावनी बहुत प्रभावी होती है. ऐसी चेतावनी लोगों को सेहत के लिहाज से बेहतर उत्पाद चुनने में मदद करती है.

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एपिडेमियोलॉजी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है और साथ ही मोटे मुनाफे को देखते हुए ये ऐसी कोई भी व्यवस्था लागू होने में अड़चन डालने की पूरी कोशिश करेंगे.

स्वास्थ्य का अधिकार हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार
इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (IAPSM) की अध्यक्ष डॉ. सुनीला गर्ग ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है. साथ ही युवा पीढ़ी की सेहत राष्ट्र की संपत्ति है. इसलिए जरूरी है कि राज्य और केंद्र सरकारें ज्यादा चीनी, नमक या वसा वाले हानिकारक खाद्य उत्पादों और पेय पदार्थों के पैकेट पर ऊपर की ओर ही चेतावनी वाले लेबल का नियम शुरू करें.

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बीमार करने वाले खाद्य उत्पादों के उपयोग में तेजी से हो रही बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री की पोषण परिषद के सदस्य रहे और न्यूट्रिशन एडवोकेसी इन पब्लिक इंटरेस्ट (NAPI) के संयोजक डॉ. अरुण गुप्ता ने कहा कि बीमार करने वाले खाद्य उत्पादों के उपयोग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसे तुरंत नहीं रोका गया तो आने वाले दशक में भारत भी ब्रिटेन और अमेरिका जैसे मोटापे से ग्रसित देशों में शामिल हो जाएगा. जब तक ऐसे नियम अनिवार्य नहीं बनाए जाएंगे, इंडस्ट्री इसका पालन नहीं करेगी. क्योंकि उनका मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना है.

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