Children and youth in Portugal and Germany are dragging governments to climate change on climate change, winning cases | पुर्तगाल और जर्मनी में बच्चे और युवा जलवायु परिवर्तन पर सरकाराें काे काेर्ट में खींच रहे, मुकदमे जीत भी रहे हैं

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बर्लिन/ लिस्बन10 मिनट पहले

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जर्मनी की लुइसा नॉइबार (25)ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अपने देश की सरकार पर पिछले साल केस किया था जिसमें जर्मनी की सुप्रीम कोर्ट ने लुइसा के पक्ष में फैसला दिया था।

दुनिया में बच्चे जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वे आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन अब बच्चे जलवायु परिवर्तन के खतरों को लेकर सरकारों को कोर्ट में खींच रहे हैं और केस जीत भी रहे हैं। जर्मनी की लुइसा नॉइबार (25)ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अपने देश की सरकार पर पिछले साल केस किया था। बीती 29 अप्रैल को जर्मनी की सुप्रीम कोर्ट ने लुइसा के पक्ष में फैसला दिया था।

कोर्ट का कहना था कि जलवायु परिवर्तन अधिनियम 2019 के कुछ प्रावधान असंवैधानिक हैं। सरकार नए प्रावधान तैयार करे। वहीं, पिछले साल अक्टूबर में पुर्तगाल के छह लोगों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर यूरोप की मानवाधिकार कोर्ट में केस दायर किया था। इन लोगों की उम्र 9 साल से 22 साल तक है। इस केस में 33 देशों की सरकारों को कोर्ट में खींचा गया है।

ग्लोबल लीगल एक्शन नेटवर्क (जीएलएएन) में जलवायु संबंधी मुकदमों के प्रमुख गेरी लिस्टन इनका केस लड़ रहे हैं। लिस्टन बताते हैं कि केस करने वाले चार बच्चे पुर्तगाल के लीरिया शहर के हैं। साल 2017 में यह क्षेत्र जंगल की आग से तहस-नहस हो गया था। इसमें 62 लोगों की मौत हो गई थी। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पर्यावरण विशेषज्ञ जोआना सेजर कहती हैं कि पहले बच्चे सड़कों पर और संसद के सामने आंदोलन करते थे। अब कोरोनाकाल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए एक स्थान पर जमा नहीं हो पाते। इसलिए अब वे कोर्ट में गुहार लगा रहे हैं और जीत भी रहे हैं।

‘लुइसा नॉइबार बनाम जर्मनी’ सुनकर बहुत खुशी मिली

  • मुझे तब बहुत खुशी हुई जब मुकदमे को ‘लुइसा नॉइबार बनाम जर्मनी’ कहा गया। इस मुकदमे ने मेरे जीवन में बड़ा बदलाव लाया। यह हमारा मौलिक अधिकार है कि सरकार हमें जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाए।’ – लुइसा नॉइबार, जर्मनी की पर्यावरण कार्यकर्ता

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