Breast cancer awareness month 2021 know breast reconstruction and implant cost after mastectomy in india

14

Breast Cancer Awareness Month (नई दिल्‍ली). भारतीय महिलाओं में ब्रेस्‍ट या स्‍तन कैंसर (Breast Cancer) की बीमारी लगातार बढ़ रही है. यह एक ऐसी समस्‍या है, जिसका अगर समय रहते पता न चले तो यह पूरे स्‍तन में फैल जाती है और मरीज को बचाने के लिए डॉक्‍टरों को पूरे स्‍तन को ही शरीर से हटाना पड़ जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि आज से कुछ साल पहले तक ब्रेस्‍ट कैंसर को लेकर जागरुकता (Breast Cancer Awareness) की कमी कहें या डर के कारण महिलाएं अपनी बीमारी के बारे में खुलकर नहीं बता पाती थीं. इसका असर ये होता था कि कैंसर स्‍तन के ज्‍यादा बड़े हिस्‍से में फैल जाता था या गंभीर स्थिति में पहुंच जाता था और इलाज के रूप में सर्जरी से उनके स्‍तन निकाल दिए जाते थे. हालांकि आज ब्रेस्‍ट कैंसर मरीजों की संख्‍या बढ़ने के बावजूद सर्जरी में ब्रेस्‍ट खोने के डर से महिलाओं को निजात मिल चुकी है.

भले ही आज देश में नई उम्र की महिलाएं ब्रेस्‍ट कैंसर से पीड़‍ित हैं और उनकी तादाद लगातार बढ़ रही है लेकिन आंकड़ों के मुताबिक मृत्‍यु दर काफी कम हुई है. महिलाओं में जागरुकता भी आई है. साथ ही सर्जरी के बाद दोबारा ब्रेस्‍ट पाने के उपायों जैसे ब्रेस्‍ट रीकन्‍स्‍ट्रक्‍शन (Breast Reconstruction) या ब्रेस्‍ट इम्‍प्‍लांट (Breast Implant) के चलते आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ा है. इंद्रप्रस्‍थ अपोलो अस्‍पताल में सीनियर कंसल्‍टेंट, प्‍लास्टिक एंड रीकंस्‍ट्रक्टिव सर्जरी, डॉ. कुलदीप सिंह कहते हैं कि ब्रेस्‍ट रीकंस्‍ट्रक्‍शन या इम्‍प्‍लांट बेहतर विकल्‍प हैं. कई मरीज ब्रेस्‍ट कैंसर की सर्जरी (Mastectomy) के बाद कृत्रिम रूप से दोबारा स्‍तन बनवाने को लेकर राजी नहीं होती हैं. इसके पीछे इलाज में आने वाला खर्च एक अहम रोल निभाता है.

डॉ. कुलदीप कहते हैं कि ब्रेस्‍ट कैंसर की एक मरीज सिर्फ बीमारी से ही नहीं लड़ती, बल्कि समाज, रूढ़‍िवादिता, अंधविश्‍वास, परिजनों की सोच, हीनभावना से भी साथ-साथ लड़ती हैं. ब्रेस्‍ट निकाले जाने के बाद सिर्फ सेक्‍सुअली ही नहीं उसके सामने यह भी परेशानी होती है कि वह खुद को देखकर अपने आप ही असंतुष्‍ट होती है और भीषण तनाव में आ जाती है, फिर वह क्‍या कपड़े पहने, वह समाज में सबके सामने खुद को कैसे रखे आदि. लिहाजा मास्‍टेक्‍टमी यानि कि ब्रेस्‍ट कैंसर की सर्जरी के बाद स्‍तनों का पुनर्निमाण जरूरी हो जाता है. ताकि वह भावनात्‍मक रूप से मजबूत रहे और खुद को अन्‍य की भांति सामान्‍य समझे.

सबसे पहले जानें, क्‍या होता है ब्रेस्‍ट रीकंस्‍ट्रक्‍शन या ब्रेस्‍ट इम्‍प्‍लांट (Breast Reconstruction or Implant)
डॉ. सिंह बताते हैं कि ब्रेस्‍ट इम्‍प्‍लांट यानि स्‍तनों का प्रत्‍यारोपण, ब्रेस्‍ट रीकंस्‍ट्रक्‍शन यानि स्‍तनों के पुनर्निमाण का ही एक भाग है. ब्रेस्‍ट रीकंस्‍ट्रक्‍शन एक सर्जिकल प्रक्रिया है जो स्‍तन कैंसर होने पर ऑपरेशन करके स्‍तन को निकाल देने के बाद शुरू होती है. सर्जरी में महिला का ब्रेस्‍ट या उसका एक हिस्‍सा निकाले जाने के बाद उसे प्‍लास्टिक सर्जरी के द्वारा दूसरे स्‍तन के ही आकार में लाया जाता है.
हालांकि इसमें कई भाग होते हैं. अगर किसी मरीज के ब्रेस्‍ट में कैंसर का पता चलने पर स्‍तन के 20-50 फीसदी भाग को निकाला जाता है तो बाकी बचे हिस्‍से को बचाने और खाली हिस्‍से को भरने के लिए रीकंजर्विंग सर्जरी (BCS) की जाती है. बीसीएस

मुख्‍य रूप से दो तरह का होता है रीकंस्‍ट्रक्‍शन
ब्रेस्‍ट रीकंस्‍ट्रक्‍शन भी दो तरह का होता है. पहला महिला के खुद के शरीर से लिए गए टिश्‍यू से और दूसरा इम्‍प्‍लांट के द्वारा. पहले वाले तरीके में महिला के शरीर के पिछले हिस्‍से से या उसके पेट से अतिरिक्‍त चर्बी से टिश्‍यू को लिया जाता है और उसे स्‍तन वाली खाली जगह पर लगाया जाता है. इसे रीकंस्‍ट्रक्‍शन विद फ्लैप एंड इम्‍प्‍लांट भी कहते हैं. वहीं मरीजों के इलाज में आने वाली कठिनाइयों के बाद ट्रैम फ्लैप, डीआईईपी फ्लैप या लैट डोरिफाई फ्लैप के माध्‍यम से भी रीकंस्‍ट्रक्‍शन किया जाता है. ये तरीके उन मरीजों के लिए हैं जो मोटी होती हैं और उनके दूसरे हिस्‍से से मसल और त्‍वचा आसानी से ली जा सकती है.

वहीं दूसरा तरीका पूरी तरह बाहरी सिलिकॉन आधारित इम्‍प्‍लांट का है. यह पतली महिलाओं के लिए है. जिनमें अतिरिक्‍त चर्बी नहीं होती, उनके खुद के मसल और टिश्‍यू नहीं लिए जा सकते लेकिन कैंसर में निकाले गए उनके ब्रेस्‍ट को दोबारा बनाना है. ऐसे में बाहर से सिलिकॉन भरे हुए गुब्‍बारेनुमा इम्‍प्‍लांट का इस्‍तेमाल किया जाता है और उसे उस जगह पर फिक्‍स किया जाता है. कई बार इसका इस्‍तेमाल रीकंस्‍ट्रक्‍शन में भी होता है.

इतना आता है खर्च
डॉ. कुलदीप बताते हैं कि ब्रेस्‍ट कैंसर के पता चलने से लेकर इसकी मास्‍टेक्‍टमी यानि सर्जरी और फिर ब्रेस्‍ट रीकंस्‍ट्रक्‍शन में न्‍यूनतम 3 से अधिकतम 10 लाख रुपये तक का खर्च आता है. किसी भी छोटे या बड़े प्राइवेट अस्‍पताल में इलाज कराने पर इसी राशि के बीच में खर्च होता है. डॉ. कहते हैं कि अच्‍छी बात ये है कि अब भारत में भी स्‍वास्‍थ्‍य बीमा कंपनियां मास्‍टेक्‍टमी के साथ रीकंस्‍ट्रक्‍शन का भी खर्च वहन करती हैं.

डॉ. कहते हैं कि महिलाओं को यह जानना भी जरूरी है कि रीकंस्‍ट्रक्‍शन का पैसा बीमा कंपनियां देती हैं और वे किसी भी कीमत पर मना नहीं कर सकती हैं क्‍योंकि यह कॉस्‍मेटिक सर्जरी नहीं है बल्कि बीमारी के बाद की जाने वाली सर्जरी है. हालांकि ब्रेस्‍ट इम्‍प्‍लांट के पैसे को लेकर बीमा कंपनियां देने से इनकार करती हैं. वे कहते हैं कि अगले से इम्‍प्‍लांट में अधिकतम 40-50 हजार रुपये लगते हैं जो कि अगर बीमा कंपनी नहीं देती तो मरीज खुद भी वहन कर सकता है.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

Source link