Banaras daughters amazing, her made mehndi discussed seven seas across America

63

बनारस की बेटी की बनाई मेहंदी की चर्चा अमेरिका तक पहुंची.

बनारस में गंगा किनारे बसे भदैनी की रहने वाली शुभी अग्रवाल अपने बगीचे में लगे मेहंदी के पत्तों को आज सात समंदर पार पहुंचा दिया है. शुभी की पढ़ाई लिखाई दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुई. जहां से बीकॉम करने के बाद शुभी अपने घर वापस आई और मेहंदी का कारोबार शुरू किया.


  • Last Updated:
    April 3, 2021, 8:58 PM IST

वाराणसी. कहते हैं दिल में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल मिल ही जाती है. इसी उदाहरण को चरितार्थ किया है काशी की बेटी शुभी ने. शुभी की  बनाई मेहंदी का रंग यूं चढ़ा कि अमेरिका और न्यूयॉर्क में भी चर्चा हो रही है. शुभी अब खुद आत्मनिर्भर बनने के बाद अन्य महिलाओं को भी स्वालम्बी बनाने के मुहिम में जुट गई है. गंगा किनारे बसे भदैनी इलाके में रहने वाली शुभी अग्रवाल अपने बगीचे में लगे मेहंदी के पत्तों को आज सात समंदर पार पहुंचा चुकी है.

शुभी की पढ़ाई लिखाई दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुई, जहां से बीकॉम करने के बाद शुभी अपने घर वापस आई. अपने पिता के परंपरागत व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए काम करने लगी. शुभी के पिता लकड़ी के शिल्पकार हैं. पिछली चार पीढ़ी लकड़ी के खिलौने का व्यापार करती है. लेकिन शुभी परंपरागत तरीके से हटकर कुछ करना चाहा और उसकी इसी चाहत के कारण आज उसकी पहचान सात समंदर पार भी बन गयी है.

शुभी की बनाई मेहंदी के लिए न्यूयार्क तक से आ रहे ऑर्डर

शुभी की बनाई गयी मेहंदी आज अमेरिका न्यूयॉर्क में भी जा रही है, वो भी बतौर आर्डर के रूप में.शुभी के गांव के घर में बगीचे में मेहंदी के पेड़ लगे हैं वही से शुभी को नए बिजनेस का आइडिया आया. शुभी ने बगीचे से पत्ते को तुड़वा कर उसे पिसवाया और मेहंदी का पाउडर बनाने के बाद अपने कुछ विदेशी मित्रों को दिखाया जो उन दिनों काशी में घूमने आए थे. शुभी के विदेशी मित्र महिलाओं को ये मेहंदी जंच गयी और उन्होंने इसकी मार्केटिंग शुरू कर दी. सबसे पहले शुभी को मेहंदी का आर्डर नॉर्वे से मिला. इसके बाद शुभी ने काम को आगे बढ़ाने का सोचा और एक बड़ा प्लान बनाया.

चेन बनाई और महिलाओं को जोड़ा 

इस प्लान के अंतर्गत शुभी ने पहले गांव की महिलाओं को जोड़ा और फिर शहर में मेहंदी पाउडर की पैकिंग शुरू कर दी. इस पूरे प्रक्रिया के जरिए शुभी ने महिलाओं का एक चेन बनाया और उन्हें इसकी प्रशिक्षण दिया फिर जब माल तैयार हुआ तो शुभी ने पिता के लकड़ी के खिलौने के विदेशी व्यपारियों को इसका सैम्पल भेजना शुरू किया. जिसके बाद अब शुभी की मेहंदी नॉर्वे के साथ साथ अमेरिका और न्यूयॉर्क भी जाने लगा है. शुभी ने कुछ ही महीने में अब तक 5000 हजार पैकेट विदेशों में एक्सपोर्ट कर चुके हैं.

बनारसी मेहन्दी देश में काफा पसन्द की जाती है. लेकिन शुभी के इस नए आइडिया से बनारसी मेहंदी को अब अलग पहचान मिलने जा रही है. शुभी का दावा है कि आने वाले समय में वो इस मेहंदी की लालिमा विश्व के कोने कोने तक पहुचायेंगी और इस व्यापार में वो महिलाओं को स्वालम्बी बनाएंगी. ताकि घर बैठे ही महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें.







Source link