2,500 करोड़ के पौधारोपण की जड़ तक जाएगी सरकार! – government will prob two thousand crore plantation project of fadnavis era

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मुंबई, अभिमन्यु शितोले
पूर्ववर्ती बीजेपी की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने अपने कार्यकाल में करीब 2,500 करोड़ रुपये खर्च कर 33 करोड़ पौधारोपण किया था, जिसकी जांच के लिए महाविकास आघाडी सरकार ने 16 विधायकों की समिति गठित की है। समिति को 4 महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

बता दें कि 2014 से 2019 के बीच तत्कालीन फडणवीस सरकार के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, जो उस समय वित्त मंत्री भी थे, ने राज्यभर में 33 करोड़ पौधारोपण की विशेष मुहिम शुरू की थी। इस मुहिम पर सरकारी तिजोरी से 2429.78 रुपये खर्च किए गए थे।

पिछले सप्ताह विधानसभा में शिवसेना ने यह मुद्दा सदन में उठाया और इसके बारे में सरकार से सवाल पूछे। जवाब में वन मंत्रालय की तरफ से सदन को बताया गया कि इस मुहिम के तहत 28 करोड़ 27 हजार पौधे रोपे गए, जिनमें से अक्टूबर 2020 तक 75.63 फीसद पौधे जिंदा थे, बाकी तकरीबन 25 प्रतिशत यानी तकरीबन 7 करोड़ पौधे नष्ट हो गए। वन मंत्रालय के इस सवाल पर सदस्यों ने सवाल उठाया कि 2,500 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी 7 करोड़ पौधे नष्ट कैसे हो सकते हैं? सदस्यों ने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग सदन में की थी। उसी समय सरकार ने संयुक्त विधानमंडल समिति से इसकी जांच कराने और चार से छह महीने के भीतर रिपोर्ट सदन में पेश करने का आश्वासन दिया था।

ये होंगे समिति में
बुधवार को वन राज्यमंत्री दत्तात्रय भरणे की अध्यक्षता में 16 सदस्यीय जांच समिति का प्रस्ताव किया गया। जांच समिति में नाना पाटोले, सुनील प्रभु, उदय सिंह राजपूत, बालाजी किणीकर, अशोक पवार, माणिकराव कोकाटे, सुनील भुसारा, शेखर निकम, सुभाष धोटे, अमित झनक, संग्राम थोपटे, आशीष शेलार, नितेश राणे, अतुल भातखलकर, समीर कुणवाकर, नरेंद्र भोडेकर को शामिल किया गया है। 16 सदस्यों की इस जांच समिति के गठन के प्रस्ताव को विधानसभा उपाध्यक्ष नरहरि झिरवल ने स्वीकार कर लिया।

फडणवीस सरकार का वृक्षारोपण कार्यक्रम

– 2016 में 1 जुलाई को एक ही दिन में दो करोड़ पौधे लगाने का दावा

– 2017 में 4 करोड़ पौधे लगाने का दावा

– 2018 में 13 करोड़ पौधे लगाने का दावा

– 2019 में 33 करोड़ पौधे लगाने का दावा

संशय और आरोप

– पौधारोपण सिर्फ कागजों पर

– हकीकत में पौधे लगाए ही नहीं गए

– टेंडर प्रक्रिया अपनाई नहीं गई

– पौधारोपण के स्थान पर कोई मेढ़ दिखाई नहीं

– वृक्ष संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं अपनाई

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