शिवसेना: नाणार में जमीन खरीद की जांच के आदेश – order for investigation of land purchase in nanar

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मुंबई
नाणार रिफाइनरी परियोजना की घोषणा से पहले नाणार में बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से आए धन्नासेठों द्वारा जमीनों की बड़े पैमाने पर खरीद किए जाने की जांच के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने दिए। विधानसभा अध्यक्ष ने आदेश दिया कि अतिरिक्त जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई जाए और एक महीने के भीतर पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश की जाए।

बता दें कि कोकण के नाणार में बनने वाली नाणार रिफाइनरी परियोजना की घोषणा 2017 में की गई थी, लेकिन इससे पहले 2016 में ही दूसरे राज्यों के बड़े-बड़े धन्नासेठों द्वारा नाणार और उसके आसपास के 15 गांवों के किसानों से ओने-पौने भाव में 3000 एकड़ से ज्यादा जमीनें खरीद ली गईं थीं। बाद में जब इस परियोजना की घोषणा हुई, तब वहां के स्थानीय लोगों को समझ में आया कि जिस जमीन का उन्हें ज्यादा भाव मिल सकता था, वह तो वह पहले ही कम भाव में खरीदी जा चुकी हैं और अब उन्हीं की जमीन को मोटे भाव में बेचकर बाहरी धन्नासेठ बड़ा मुनाफा कमाने वाले हैं। इससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा। इसकी शिकायत सरकार से की गई, लेकिन देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। हालांकि, स्थानीय लोगों और शिवसेना के विरोध के कारण नाणार परियोजना रद्द की जा चुकी है।

गुरुवार को इस संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें कोकण रिफायनरी विरोधी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि किस तरह संयुक्त परिवारों की जमीन की बिक्री परिवार के सभी सदस्यों को विश्वास में लिए बिना कर दी गई। समिति का कहना है कि लापता और मृत व्यक्तियों के नामों पर फर्जी आधार कार्ड जमीनों की खरीद बिक्री की गई है। समिति के लोगों का यह भी कहना था कि दूसरे राज्यों से जमीन खरीदने आए धन्नासेठों को यह बात पहले से पता चल गई थी कि यहां पर रिफाइनरी परियोजना आने वाली है, इसलिए उन्होंने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी की। समिति की मांग थी कि इन सारे मुद्दों की जांच होनी चाहिए।

बैठक में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जमीन खरीद के यह सारे मामले संदेहास्पद है। उन्होंने कहा कि है पता लगाए जाने की जरूरत है कि क्या इसके पीछे कोई रैकेट काम कर रहा था? विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि परियोजना की अधिसूचना जारी होने से पहले कौड़ियों के दाम किसानों की जमीन खरीद कर उन्हें जमीन के उचित मुआवजे से वंचित रखा गया। यह एक प्रकार से स्थानीय भूमि पुत्रों के साथ धोखाधड़ी है। भविष्य में इस तरह की घटनाएं ना हो इसके लिए अभी से उपाय योजना करने की जरूरत है । इसके लिए अतिरिक्त जिला अधिकारी सभी जमीनों के सौदों की बारीकी से जांच करें और यह इस बात का भी पता लगाएं कि क्या किसानों की जमीनें उन्हें वापस दिलाई जा सकती हैं।

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