पाकिस्तान ने क्या सच में कोरोना को कर लिया कंट्रोल? आखिर कैसे? | pakistan – News in Hindi

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दुनिया में कई जगह अब भी कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर बड़ी समस्या बना हुआ है. खास तौर से घनी बसी और गरीब आबादी वाले दक्षिण एशिया (South Asia) में कोविड 19 पर काबू पाने के लिए कड़े संघर्ष के हालात हैं. दक्षिण एशिया के सबसे बड़े देश भारत में कोरोना के कुल मामले (Corona Cases in India) 50 लाख से ज़्यादा हो चुके हैं और रोज़ाना नए केसों का आंकड़ा पिछले कुछ दिनों से 80,000 के पार जा चुका है. ऐसे में पाकिस्तान में रोज़ाना नए केसों (Corona Cases in Pakistan) की संख्या 400 से 500 तक रह गई है.

विशेषज्ञ मान रहे थे कि बदतर स्वास्थ्य सुविधाओं और करीब 22 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में अगस्त तक 80 हज़ार के आसपास कोरोना मौतें (Corona Deaths) होंगी लेकिन पाकिस्तान में कुल केसों की संख्या महज़ 3 लाख से कुछ ज़्यादा है और 6389 मौतें भारत में हो चुकीं 82 हज़ार से ज़्यादा मौतों की तुलना में कहीं कम हैं. ऐसा कैसे संभव हुआ? विशेषज्ञों के पास हैरानी के सिवा कुछ नहीं है. पाकिस्तान ने किन तरकीबों से कोरोना वायरस को काबू करने में कामयाबी पाई? या फिर माजरा कुछ और ही है? देखिए.

समझ से परे हैं पाकिस्तान के आंकड़े?
गरीब और घनी बस्तियों में लोग कई पीढ़ियों के साथ में रहने वाले​ सिस्टम के तहत बंद और छोटी जगहों में रहते हैं तो कोरोना के फैलने की आशंका बढ़ती है. पाकिस्तान में ऐसा होने के बावजूद कोरोना काबू में कैसे आया? इस सवाल के जवाब में पाकिस्तान के पास मनगढ़ंत थ्योरीज़ रही हैं. पहले भी पोलियो, टीबी, हेपेटाइटिस जैसे संक्रामक रोगों के मोर्चे पर पाक विफल रह चुका है इसलिए कोरोना के मामले में उसके दावे ध्यान देने के काबिल हैं.ये भी पढ़ें :- हंसने, बोलने और गाने से कितना और किस तरह फैलता है कोरोना?

वर्ल्डोमीटर के मुताबिक पाकिस्तान में रोज़ाना नए केसों की संख्या जून के बाद से लगातार घटी.

कभी औसत उम्र की थ्योरी दी गई, कभी कहा गया कि पाक का मौसम गर्म रहता है तो कभी ये दावा भी किया गया कि पाकिस्तान में कुदरती तौर पर लोगों के भीतर इम्युनिटी मज़बूत है. हालांकि इनमें से कोई थ्योरी प्रामाणिक नहीं मानी गई. लाहौर में सेवाएं दे रहे डॉ. सलमान हसीब को इस महीने कहना पड़ा कि ‘पाकिस्तान में कोरोना के केस कैसे घट गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं है, हमारे पास कोई पुख्ता वजह बताने को नहीं है.’

आंकड़े क्या कहते हैं?

संक्रमण से जुड़ी ताज़ा संख्या तो ऊपर बताई जा चुकी है, अब थोड़ा डिटेल समझें. जून के मध्य में पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा नए केस प्रतिदिन देखे जा रहे थे. पीक पर एक दिन में 6800 से ज़्यादा केस आए थे, लेकिन 20 जून के बाद से लगातार केसों की संख्या कम होती दिखती है. अगस्त की शुरुआत से ही प्रतिदिन नए केसों की संख्या यहां 1000 से कम रह गई थी.

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इस हफ्ते यानी बीते सोमवार तक पाकिस्तान स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक सिंध में 1,32,084 मामले, पंजाब में 97,760, खैबर-पख्तूनख्वा में 36,992, इस्लामाबाद में 15,941, बलूचिस्तान में 13,595, गिलगिट-बाल्टिस्तान में 13,227 और पीओके में 2,481 मामले सामने आ चुके थे. कल यानी मंगलवार को पाकिस्तान में करीब पौने छह हज़ार ही एक्टिव केस थे. अब देखिए कि पाकिस्तान में कोरोना को लेकर क्या कदम उठाए गए.

जवान देश या औसत उम्र की थ्योरी
क्या यह एक कारण हो सकता है? पाकिस्तान में नागरिकों की औसत उम्र 22 साल है, जबकि इटली की औसत उम्र 46.5 है. पाक में करीब 7 हज़ार कोरोना मौतें हुईं जबकि इटली में 35 हज़ार से ज़्यादा. वहीं, भारत की औसत उम्र 26 साल है, जहां 82 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुईं. आंकड़े बताते हैं कि कोविड 19 से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों की औसत उम्र 35 से 45 के बीच रही.

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वर्ल्डोमीटर के मुताबिक पाकिस्तान में रोज़ाना मौतों की संख्या जून के बाद से लगातार घटी.

स्मार्ट लॉकडाउन का दावा
पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने कोरोना पर काबू पाने के लिए जिसे सबसे अहम कारण बताया, वह स्मार्ट लॉकडाउन है. यानी पूरे देश या किसी पूरे राज्य को पूरी तरह बंद कर देने के बजाय छोटे इलाकों को बंद किया गया, जहां आउटब्रेक की आशंका थी. पाक के एक मंत्री असद उमर के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान माइक्रो स्मार्ट लॉकडाउन योजना पर भी अमल कर रहा है. अब सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान इन कदमों से ही सफल हुआ या कुछ और छुपी वजहें भी हैं.

क्या कम टेस्टिंग से कम दिखे नंबर?
ये बड़ा खेल है. विशेषज्ञ मान रहे हैं लेकिन पाक इससे लगातार इनकार कर रहा है कि कम टेस्टिंग नंबर वजह हैं. अगस्त के आखिरी हफ्ते में पाक में पॉज़िटिव टेस्ट दर 2.09 फीसदी रही जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 5 फीसदी को मानक बताया है. दूसरी तरफ, आंकड़ों के मुताबिक भारत पिछले हफ्ते तक 5 करोड़ से ज़्यादा टेस्ट कर चुका था, जबकि पाक में सिर्फ 30 लाख के आसपास टेस्ट हुए थे.

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खबरों की मानें तो पश्चिमी देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति टेस्ट के मामले में दक्षिण एशिया के कई देश बहुत पीछे हैं. पाकिस्तान और बांगलादेश में यह काफी कम रहने से यहां पॉज़िटिव केसों की संख्या भी कम दर्ज हुई. आंकड़े ये भी हैं कि प्रति 10 लाख लोगों पर पाक में 1400 जबकि, भारत में 3700 से ज़्यादा टेस्ट हुए हैं. WHO के मुताबिक 20 टेस्ट पर एक कोरोना केस मिले तो हालात काबू में माने जाते हैं जबकि पाक में हर 8वां व्यक्ति कोरोना संक्रमित मिला और भारत में हर 11वां.

क्या पाक ने दी गलत जानकारी?
पाकिस्तान में WHO के सहयोग से जुलाई में एक सेरो सर्वे हुआ था, जिसमें पाया गया कि 89 फीसदी पाकिस्तानी रिस्क में थे, जबकि सिर्फ 11 फीसदी में एंटीबॉडीज़ विकसित थीं. इसी तरह, के सर्वे में भारत में भी यही स्थिति पाई गई थी कि जितने नंबर सामने आ रहे हैं, वास्तविक कोरोना केस उससे कहीं ज़्यादा हो सकते हैं. इसके बाद डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पाक के पंजाब में सरकारी आदेशों के तहत केसों की संख्या आधी ही रिपोर्ट की गई.

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पाक में नमाज़ के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करना बहस का मुद्दा बना था.

इस खबर का सीधा मतलब यही था कि पाकिस्तान ने ‘जान बूझकर गलत आंकड़े’ जारी किए और उसके आधिकारिक आंकड़ों की सत्यता को लेकर सवाल खड़े हुए. ‘मिसरिपोर्टिंग’ के इस खेल का भंडाफोड़ होने के बाद पाक में कोरोना कंट्रोल के तमाम दावे झूठे समझे जा रहे हैं.

आखिरकार, इस पूरे विश्लेषण के बाद गौरतलब यह है कि पाक में जो सरकारी आंकड़े हैं, उन्हें देखकर भी विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पाक में महामारी की दूसरी लहर दस्तक दे सकती है और खतरनाक ढंग से. पाकिस्तान को सतर्क और तैयार रहने की ज़रूरत बताई जा रही है.



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