1200 एकड़ में बसेगी नव्य अयोध्या, 81 देशों के धार्मिक दूतावास भी बनेंगे -UP News awas vikas parishad prepares development plan of new ayodhya city upat

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नव्य अयोध्या के विकास का खाका तैयार

Ayodhya News: अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव आरपी सिंह ने बताया कि नव्य अयोध्या में 81 प्लाट आवंटित किए जा रहे हैं, जिसमें विभिन्न देशों के धार्मिक दूतावास बनेंगे.

अयोध्या. राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण के साथ-साथ अयोध्या (Ayodhya) के संपूर्ण विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है. अयोध्या का संपूर्ण विकास कैसे हो इसके लिए विजन डॉक्यूमेंट भी तैयार किया जा रहा है. अयोध्या के साथ-साथ गोंडा व बस्ती जिले के कुछ क्षेत्र अयोध्या के विकास के लिए भी समाहित किए जा रहे हैं. अयोध्या में आवास विकास परिषद 1200 एकड़ में नव्य अयोध्या बनाने जा रही है, जिसमें 81 देशों के धार्मिक व सांस्कृतिक दूतावास बनाए जाएंगे. आवास विकास परिषद भारत के सभ्यता व संस्कृति से जुड़े देशों को नव्य अयोध्या में 81 प्लाट एलाट करेगा और जो देश धार्मिक दूतावास खोलने के लिए आवेदन करेगा उनको आवास विकास परिषद धार्मिक दूतावास के रूप में प्लाट को एलाट करेगा.

अमेरिका, इंग्लैंड, जापान, कोरिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार व श्रीलंका समेत 81 देशों को धार्मिक दूतावास के रूप में जगह दी जाएगी, जहां पर विदेशी श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी. अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव आरपी सिंह ने बताया कि आवास विकास परिषद द्वारा एक नए रूप में टाउनशिप विकसित की जाएगी, जिसे वैदिक सिटी के रूप में जाना जाएगा. नव्य अयोध्या हाईवे के बगल माझा में 1200 एकड़ में डेवलप की जायेगी. वैदिक सिटी के रूप में यह टाउन सिटी डेवलप की जाएगी. अयोध्या टाउन सिटी में उन देशों के दूतावास होंगे जो भारतीय संस्कृति सभ्यता के परंपरा से जुड़े होंगे.

अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव आरपी सिंह ने बताया कि नव्य अयोध्या का भावी वैभव का जब सृजन हो जाएगा तब विभिन्न देशों के श्रद्धालु अयोध्या पहुंचेंगे. उन्हें संबंधित दूतावास में उनको सुविधाएं दी जाएंगी. विदेशी धार्मिक दूतावास भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता के सेतु के रूप में कुछ काम करेंगे. अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव आरपी सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के बैठक के दौरान आदेश हुआ था कि नव्य अयोध्या में धार्मिक सांस्कृतिक दूतावास को जगह दी जाएगी ताकि अयोध्या का वैभव सभ्यता व संस्कृति विदेशों तक पहुंच सके.







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