हनुमानगढ़ी के महंत के दावे के बाद आखिर क्यों चर्चा में है पटना का महावीर मंदिर? mahavir mandir of patna is in controversy due to claim of hanumangarhi ayodhya bramk | – News in Hindi

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रजनीश चंद्र

Patna Hanuman Mandir Dispute: उत्तर भारत के मंदिरों में आमदनी के मामले में दूसरा स्थान पटना के महावीर मंदिर का है जबकि पहले स्थान पर जम्मू स्थित वैष्णो देवी मंदिर है. पटना महावीर मंदिर ट्रस्ट का वार्षिक बजट 150 करोड़ रुपये का है. इसकी आमदनी प्रतिदिन औसतन पांच लाख रुपये है.

Source: News18Hindi
Last updated on: July 27, 2021, 9:28 AM IST

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पटना. पटना का महावीर मंदिर (Patna Hanuman Mandir) एक बार फिर से हाल के दिनों में लगातार चर्चा में बना हुआ है. ऐसे तो ये मंदिर आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र है लेकिन हाल के दिनों में इसकी चर्चा विवादों के कारण ज्यादा हो रही है. विवाद का कारण है कि मंदिर पर स्वामित्व किसका है? अयोध्या के हनुमानगढ़ी (Ayodhya Hanumangarhi) के महंत प्रेमदास ने दावा किया है कि महावीर मंदिर हनुमानगढ़ी के अधीन है, वहीं महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने दावे को बेबुनियाद बताया है. मामला अब बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के पास पहुंच गया है. न्यास परिषद के अध्यक्ष ए.के. जैन ने कहा है कि जल्द ही दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. हालांकि जानकारों का मानना है कि महावीर मंदिर का वैभव ही विवाद का केन्द्र है.

हनुमानगढ़ी का क्या है दावा?
महंत प्रेमदास का कहना है कि महावीर मंदिर की स्थापना 300 साल पहले हनुमानगढ़ी के रामानंद संप्रदाय के वैरागी बालानंद जी ने की थी लिहाजा शुरुआत से ही महावीर मंदिर की देख रेख हनुमानगढ़ी अयोध्या के द्वारा ही होती थी लेकिन बाद में एक साजिश के तहत महावीर मंदिर पर से हनुमानगढ़ी के पुजारियों का वर्चस्व समाप्त कर दिया गया. प्रेमदास का कहना है कि पटना के एसएसपी रहते हुए किशोर कुणाल ने साजिश कर महावीर मंदिर को अपने अधिकार में ले लिया और तत्तकालीन पुजारी राम गोपाल दास जी महाराज को झुठे मुकदमे में फंसा कर पुजारी के पद से हटा दिया. हनुमानगढ़ी से जुड़े साधुओं ने इसको लेकर एक माह तक हस्ताक्षर अभियान चलाया और बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद को पत्र लिखकर महावीर मंदिर पर स्वामित्व का अधिकार मांगा है. हनुमानगढ़ी की ओर से सूर्यवंशी दास फलाहारी को मुख्य पुजारी नियुक्त कर दिया गया है.

किशोर कुणाल का जवाब

महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने महंत प्रेमदास के आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि महावीर मंदिर की स्थापना गोसाई संप्रदाय के अखलिया बाबा ने की थी. उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी से रेलवे की जमीन लेकर मंदिर की स्थापना की. उनका ये भी कहना है कि खुद हनुमानगढ़ी के नियमावली में उसके कई मंदिरों की चर्चा है लेकिन उसमें पटना के हनुमान मंदिर का उल्लेख नहीं है और न ही किसी भी अदालती आदेश या दस्तावेज में हनुमानगढ़ी का जिक्र है.

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पटना के हनुमान मंदिर को अयोध्या के हनुमानगढ़ी ने अपनी शाखा बताया है. इस पर पटना हनुमान मंदिर प्रबंधन ने कड़ी आपत्ति जताई है.

सार्वजनिक है महावीर मंदिरकिशोर कुणाल के अनुसार 1948 ईस्वी में पटना हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में महावीर मंदिर को सार्वजनिक मंदिर घोषित करते हुए यहां पुजारी और प्रबंध समिति की व्यवस्था की. बाद में 1987 ईस्वी में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के द्वारा इसके लिये एक न्यास समिति का गठन किया गया. न्यास समिति के गठन के खिलाफ तत्कालीन पुजारी राम गोपाल दास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट चले गये लेकिन वहां उनकी हार हो गयी. यही न्यास समिति मंदिर की व्यवस्था को संभालती है. किशोर कुणाल ने हनुमानगढ़ी द्वारा नियुक्त सूर्यवंशी दास फलाहारी को मुख्य पुजारी नियुक्त किये जाने को गलत ठहराया है. उनके अनुसार सूर्यवंशी दास को उनके मूल स्थान गुरु रविदास मंदिर के महंत श्री बनवारी पति ने सात जुलाई को हटा दिया है और और उनके स्थान पर आचार्य अवधेश दास जी को नियुक्त किया है.

महावीर मंदिर के जनकल्याणकारी काम
महावीर मंदिर पांच बड़े अस्पताल का संचालन करती है जिसमें महावीर नेत्रालय, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर कैंसर संस्थान, महावीर वात्सल्य अस्पताल, महावीर ह्दय अस्पताल शामिल है. पिछले दिनों कोविड के दौरान महावीर मंदिर न्यास समिति ने निःशुल्क एंबुलेंस, अंतिम यात्रा वाहन, ऑक्सीजन आदि की भी व्यवस्था की थी. अब तो स्थायी ऑक्सीजन बैंक की भी शुरुआत कर दी गयी है. महावीर कैंसर अस्पताल में मरीजों को तीनों वक्त का भोजन मुफ्त में मिलता है साथ ही सामान्य मरीजों को भर्ती होते ही दस हजार रुपये और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले मरीज को 15 हजार रुपये इलाज के लिए दिए जाते हैं. देश के किसी भी मंदिर में पहली बार दलित पुजारी रखने का श्रेय महावीर मंदिर को ही जाता है. अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए हर साल दो करोड़ की राशि महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा दी जा रही है साथ ही मंदिर निर्माण में लगे कारसेवकों के लिेए राम रसोई और सीतामढ़ी में सीता रसोई का संचालन भी किया जा रहा है.

महावीर मंदिर की आमदनी
जानकारों के मुताबिक उत्तर भारत के मंदिरों में आमदनी के मामले में दूसरा स्थान महावीर मंदिर का है .पहला स्थान जम्मू स्थित वैष्णो देवी मंदिर का है. बताया जाता है कि महावीर मंदिर ट्रस्ट का वार्षिक बजट 150 करोड़ रुपये का है. इसकी आमदनी प्रतिदिन पांच लाख रुपये है. भगवान हनुमान को चढ़ने वाले नैवेद्यम प्रसाद और चढ़ावा आमदनी का मुख्य स्त्रोत है, हालांकि कोविड के दौरान मंदिर की आमदनी में काफी गिरावट आयी है. कोविड के पहले पूजा-अर्चना, चढ़ावा और नैवेद्यम लड्डू की बिक्री से मंदिर को हर साल औसतन 35 करोड़ रुपये की आमदनी होती थी. प्रसाद के रूप में 80,000 किलो नैवेद्यम प्रतिमाह बनाए जाते थे लेकिन कोविड के कारण अब हालत ये हो गयी है कि मंदिर प्रबंधन को अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए बैंक से कर्ज लेना पड़ रहा है.

हनुमान मंदिर की प्रसिद्धि मनोकामना मंदिर के रूप में रही है. लोगों की मान्यता रही है कि सच्चे मन से जो कोई भी आता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है. लोगों की इसी अगाध श्रद्धा का ही परिणाम रहा है कि कोरोना काल के पहले मंदिर में सप्ताह के अन्य दिनों में दस हजार, शनिवार को तीस हजार, मंगलवार को पचास हजार और रामनवमी जैसे विशेष मौके पर दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आते रहे हैं. लिहाजा मंदिर से जुड़ा विवाद जितना जल्द सुलझ जाए वो सबके लिए बेहतर है.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)


First published: July 27, 2021, 9:28 AM IST



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