शिवपाल यादव बोले- सभी ‘समाजवादी’ फिर से एक हो जाए, हम त्याग करने को तैयार | mainpuri – News in Hindi

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शिवपाल यादव बोले- सभी ‘समाजवादी’ फिर से एक हो जाए

बता दें यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में यादव परिवार (Yadav Family) में महाभारत की शुरुआत हुई थी. बात इतनी बढ़ गई थी की अखिलेश ने समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार कर लिया है.

इटवा. इटावा रामलीला मैदान में स्वतंत्रता दिवस Independence Day) के मौके पर पहुंचे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने शनिवार को एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं सभी समाजवादी एक हो और हम त्याग करने के लिए भी तैयार हैं. यदि फिर भी ऐसा नहीं होता है तो 2022 के चुनाव में प्रगतिशील पार्टी जनता के बीच जाएगी और दबे कुचले मजदूरों की आवाज उठाएगी. वहीं हमारा निर्णय होगा.

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी और शिवपाल सिंह यादव के बीच एक लंबे समय से खाई खींची हुई है. जिस को पाटने के लिए दोनों नेताओं की ओर से ही बयानबाजी की जा रही है. दोनों के समर्थक चाहते हैं कि दोनो पार्टी के नेता एक मंच पर हों ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि 2022 के चुनाव से पहले पहले शिवपाल और अखिलेश एक मंच पर होंगे.

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दरअसल उत्तर प्रदेश में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यादव परिवार और समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं, लेकिन उसके बाद पहली बार यह संकेत मिले थे कि दोनों के बीच करीब तीन साल से चली आ रही तनातनी सुलझ सकती है. इसकी शुरुआत प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने ही की थी. कुछ दिनों पहले उन्होंने मैनपुरी में कहा था कि उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है. इसके बाद अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि शिवपाल का घर में स्वागत है. अगर वे आते हैं तो उन्हें पार्टी में आंख बंद कर शामिल करूंगा.2016 में शुरू हुई थी तनातनी

बता दें यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में यादव परिवार में महाभारत की शुरुआत हुई थी. बात इतनी बढ़ गई थी की अखिलेश ने समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार कर लिया है. उसके बाद चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद शिवपाल ने बयानबाजी शुरू कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने समाजवादी मोर्चे का गठन किया और फिर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन कर लिया. इस बीच अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सभी नाकाम साबित हुईं.



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