रेलटेल 102 रेलवे परिसरों में एज डेटा सेंटर बनाएगा

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नई दिल्ली:
रेलटेल 102 स्थानों पर विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में रेलवे परिसर में एज डेटा सेंटर स्थापित करेगा। इस गतिविधि में लगभग 500 करोड़ से अधिक का खर्च किया जायेगा। रेलवे के इस कदम से इस कदम से ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन और कुशल डिजिटल डिलीवरी की गति में तेजी आएगी।

रेलटेल सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सेवाएं प्रदान करने वाले रेल मंत्रालय का एक केंद्र सरकार का सार्वजनिक उपक्रम है और देश के सबसे बड़े तटस्थ दूरसंचार अवसंरचना प्रदाताओं में से एक है, जिसके अधीन अखिल भारतीय ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क, 60 हजार से अधिक आरकेएम है और रेलवे ट्रैक हैं।

ओएफसी नेटवर्क देश के महत्वपूर्ण कस्बों और शहरों और कई ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करता है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन और कुशल डिजिटल डिलीवरी की गति में तेजी लाने के लिए, रेलटेल ने संयुक्त रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे क्षेत्रों में कई एज डेटा सेंटर बनाने का निर्णय लिया है। रेलटेल की यह नई पहल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया के मिशन को बढ़ावा देगी।

एज डेटा सेंटर, नेटवर्क के अंतिम छोर पर स्थित छोटे डेटा सेंटर होते हैं, जहां वे अंतिम उपयोगकर्ताओं और उपकरणों के करीब होते हैं। नेटवर्क के अंतिम छोर पर इस तरह की सुविधा होने से तेज प्रदर्शन और कम विलंबता सक्षम होगी, क्योंकि संगठनों को इसे संसाधित करने के लिए डेटा को दूर-दराज के डेटा केंद्रों में स्थानांतरित नहीं करना होगा। डेटा सेंटर प्रबंधकों के लिए देरी हमेशा एक समस्या रही है, लेकिन हाल के दिनों में बड़ी डेटा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और स्ट्रीमिंग सेवाओं और अन्य प्रौद्योगिकी प्रवृत्तियों जैसे अगली पीढ़ी के अनुप्रयोगों की विस्तृत श्रृंखला को देखते हुए यह एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है।

रेलटेल 102 स्थानों विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में रेलवे परिसर में ऐसे एज डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भागीदारों की तलाश कर रहा है। संभावित बिजनेस एसोसिएट्स व पार्टनर भारत में पंजीकृत कंपनी होनी चाहिए। इस गतिविधि में लगभग 500 करोड़ से अधिक रु के निवेश अवसर होंगे।

प्रस्तावित योजना के तहत, प्रत्येक स्थान पर परिकल्पित एज डाटा सेंटर की प्रारंभिक क्षमता लगभग 20 रैक (प्रत्येक 5 किलोवाट से 10 किलोवाट) की हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर, बिजली और अन्य कारकों की आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार परिवर्तनीय रैक और बिजली घनत्व वाले एज डेटा सेंटर का पता लगाया जा सकता है।

रेलटेल के पास लगभग 9300 से अधिक प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (पीओपी) और रेलवे ट्रैक के साथ और भारतीय रेलवे के परिसर में व्यापक ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी है, जो इस तरह के एज डेटा सेंटर की स्थापना के लिए बुनियादी ढांचे को आसानी से उपलब्ध कराती है। रेलटेल के पास चयनित व्यावसायिक सहयोगी को दूरसंचार व इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने की जिम्मेदारी होगी।

वहीं इस सम्बंध में बात करते हुए रेलटेल के सीएमडी, पुनीत चावला ने कहा, ऐसे स्थानीय डेटा केंद्रों की मदद से, ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल कौशल, वित्तीय समावेशन, डिजिटल साक्षरता आदि से संबंधित कम विलंबता अनुप्रयोगों के साथ सेवा प्रदान की जा सकती है। एज डेट सेंटर बेहतर रेलवे के अनुभव को और बेहतर व सहायता प्रदान करेंगे। ये डिजिटल अर्थव्यवस्था में योगदान करेगा। यह कदम डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम होगा। यह स्थानीय पेशेवर कुशल जनशक्ति को इस परिवर्तन में भाग लेने का अवसर भी प्रदान करेगा।

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