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नई दिल्ली. Happiness Course : उत्तर प्रदेश में जल्द सभी स्कूलों में हैप्पीनेस पाठ्यक्रम लागू किया जा सकता है. इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राज्य के 16 जिलों से की जा रही है. इसमें सफलता मिलने पर बाद में इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा. इसके लिए राज्य सरकार अपने पाठ्यक्रम को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के साथ मिलकर तैयार कर रही है. बता दें कि इससे पहले भी राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में इसे लागू किया गया था, लेकिन खुद का पाठ्यक्रम न होने की वजह से सफल नहीं हो सका था. ऐसे में इस बार सरकार खुद का पाठ्यक्रम तैयार करने में लगी है.

राज्य सरकार इसे शुरुआती दौर में वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, प्रयागराज, अमेठी, अयोध्या, लखनऊ, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, झांसी व चित्रकूट में लागू करेगी और यदि इस पायलट प्रोजेक्ट को सफलता मिलती है तो बाद में इसे पूरे प्रदेश के हर जिले में शुरू किया जाएगा. बता दें कि पाठ्यक्रम को विकसित किए जाने के लिए पूरे प्रदेश से 68 व गोरखपुर से पांच शिक्षकों का चयन किया गया है. चयनित किए गए शिक्षकों में दिल्ली सरकार में हैप्पीनेस प्रोग्राम के अभिन्न अंग रहे श्रवण शुक्ल हैं. इसके अलावा शिक्षक अभय कुमार पाठक, महेंद्र पटेल, अर्चना मालवीय और संतोष राव भी शामिल हैं.

ट्रंप के भारत दौरे से शुरू हुई हैप्पीनेस पाठ्यक्रम को लेकर चर्चा
देश में हैप्पीनेस पाठ्यक्रम विशेष रूप से तब चर्चा में आया जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने दिल्ली के एक सरकारी स्कूल का दौरा कर हैप्पीनेस क्लास की जानकारी ली. उसके बाद से ही लगातार हैप्पीनेस पाठ्यक्रम पर चर्चा हो रही है.

हैप्पीनेस पाठ्यक्रम क्या है?
प्रभारी हैप्पीनेस करिकुलम डॉ. सौरभ मालवीय बताते हैं कि ‘हैप्पीनेस पाठ्यक्रम बच्चों को खुश रखने का एक विशेष प्रोग्राम है. इस प्रोग्राम के जरिए बच्चों को बताया जाएगा कि खुशी पूर्वक जीने के लिए क्या-क्या समझना होता है. यह पाठ्यक्रम पांच मूल्यों विश्वास, सम्मान, कृतज्ञता, ममता व स्नेह के इर्द-गिर्द घूमता है. प्रोग्राम के जरिए छात्रों के अंदर इन मूल्यों को उभारा जाएगा. इसके लिए इस पूरे पाठ्यक्रम को मुख्य रूप से तीन भागों माइंडफुलनेस, कहानी और गतिविधियां में बांटा गया है.’

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