मेरठ: 90 साल की दादी के हौसले से हार गया कोरोना, ऐसे कोरोना को मात दे पहुंचीं अपने घर 

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90 साल की दादी से हारा कोरोना, स्वस्थ होने के बाद दिए कोरोना को हारने के टिप्स 

90 वर्षीय दादी ने कोरोना को हरा दिया है. वो स्वस्थ होकर घर लौटी हैं. कोरोना पॉज़िटिव आने पर उन्हें परिजनों ने नोएडा  के अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन चंद दिनों में ही वो कोरोना को हराकर वापस मेरठ लौट आई हैं.

मेरठ. मेरठ ( Meerut) की रहने वाली 90 वर्षीय दादी ( grandmother) ने कोरोना (grandmother) को हरा दिया है. वो स्वस्थ होकर घर लौटी हैं. कोरोना पॉज़िटिव आने पर उन्हें परिजनों ने नोएडा  के अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन चंद दिनों में ही वो कोरोना को हराकर वापस मेरठ लौट आई हैं. कोरोना को मात देने वाली दादी की चर्चा हर किसी की ज़ुबान पर रही. सभी दादी के बुलंद हौसले को प्रणाम कर रहे हैं. दादी का कहना है कि सकारात्मक सोच और उर्जा से इस बीमारी को हराया जा सकता है. आजकल नौजवान हों या बुजुर्ग, सभी कोरोना वायरस के आगे बेबस नज़र आ रहे हैं. ऐसे माहौल में मेरठ की रहने वाली 90 वर्षीय दादी कैलाशपति कोरोना को मात देकर घर लौट आईं हैं. दादी कैलाशपति कोरोना पर जीत की वजह वह अपनी मेहनतकश जिंदगी, सक्रियता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बताती हैं. दादी कहती हैं कि इलाज के दौरान उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पडऩे दिया. घर आने के बाद वह अपनों का भी हौंसला बढ़ा रही हैं. मेरठ की अपर नगर आयुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन की वो दादी हैं. उन्हें करीब बारह दिन पहले कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.  उनका ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे चला गया था. कुछ समय के लिए ही उन्हें आक्सीजन की जरूरत पड़ी. काबिले गौर यह है कि उन्होंने कभी बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. दादी ने डाक्टर के बताए कोरोना उपचार के नियमों का समय से पालन किया. समय से भोजन करना और दवाइयां लीं. नियमित दिनचर्या में टहलने की प्रवृत्ति अस्पताल में भी बनाए रखी. दादी कैलाशपति आखिरकार डिस्चार्ज होकर घर लौट आई हैं. परिजनों का कहना है कि दादी अब पूरी तरह स्वस्थ हैं. उनका ऑक्सीजन लेवल 99 है. वह मेहनतकश हैं. उनकी दिनचर्या में सुबह उठकर खुद अपने काम करने की प्रवृति शामिल हैं. इससे वह सक्रिय रहती हैं.अपर नगर आयुक्त श्रद्धा शांडिल्यान ने बताया कि दादी नब्बे वर्ष की आयु में बिलकुल फिट हैं. उनका कहना है कि दादी कैलाशपति उनसे कहती रहती हैं कि उनको अपने परपोते की भी शादी देखनी है. श्रद्धा शांडिल्यान का कहना है कि दादी के  साथ परिवार के अन्य सदस्य भी पॉज़िटिव हुए थे. लेकिन दादी की हिम्मत देखकर सभी इस बीमारी को मात देकर रिकवर हो रहे हैं.







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