मुख्तार अंसारी से लोहा लेने वाले पूर्व Dy.SP शैलेन्द्र सिंह अब कर रहे है पशु संरक्षण, जैविक खेती

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चंदौली. बाहुबली मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) के खिलाफ कार्रवाई कर चर्चा में आये पूर्व डिप्टी एसपी शैलेन्द्र सिंह (Shailendra Singh) को बहादुरी विरासत में मिली है. शहीदों की धरती सैयदराजा से इनके दादा राम रूप सिंह ने स्वतंत्रता की मशाल थामकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कराया था. वहीं अपने पिता जगजीत सिंह के साथ शैलेंद्र सिंह ने निर्भीक पुलिस पर्सनल की व्यक्तिगत ट्रेनिंग भी ली थी. शायद यही वजह है कि अपराध के राजनीतिक षडयंत्र के सामने ये तनिक भी नहीं हिले, और माफिया मुख्तार अंसारी (Mafia Don Mukhtar Ansari) से मोर्चा लेने में अगर इन्हें नौकरी भी छोड़नी पड़ी तो इन्होंने उसका अफसोस नहीं किया.

वर्ष 1991 बैच के पीसीएस अधिकारी रह चुके शैलेंद्र सिंह का बचपन गांव में ही बीता. अपने बड़े भाई के साथ उन्होंने सैयदराजा में ही आठवीं तक की शिक्षा ग्रहण की. उनका यह समय अपने दादा-दादी के सानिध्य में बीता. बाद में इनके डिप्टी एसपी पिता जगदीश सिंह इनको अपने साथ देवरिया लेकर चले गए और हाई स्कूल की शिक्षा इन्होंने वहीं से ग्रहण की. पिता जगदीश सिंह उन दिनों देवरिया में डिप्टी एसपी के पद पर ही तैनात थे. पिता के ट्रांसफर के बाद इंटरमीडिएट की शिक्षा इन्होंने बस्ती जनपद से ली. बाद में ये इलाहाबाद आ गए और यहां से स्नातक किया. साथ ही सिविल सर्विसेज की तैयारी भी की. वर्ष 1991 में उन्होंने पीसीएस की परीक्षा पास की और पिता की तरह डिप्टी एसपी बन गए.

नौकरी छोड़ने के बाद जैविक खेती और पशु संरक्षण करते हैं 

जानकारी के मुताबिक शैलेन्द्र सिंह का पूरा परिवार इन दिनों वाराणसी में रहता है. बड़े भाई धीरेंद्र सिंह सैयदराजा में ही जैविक खेती करते है और खुद शैलेन्द्र राजधानी लखनऊ में रहकर जैविक खेती और पशु संरक्षण का काम कर रहे हैं. शैलेंद्र सिंह दो भाई हैं. बड़े भाई धीरेंद्र सिंह फेसुडा गांव में रहते हैं, वो यहां खेती-बाड़ी करते हैं. नौकरी छोड़ने के बाद शैलेन्द्र सिंह ने यहां मछली फॉर्म और भेड़ फॉर्म भी खोला था. लेकिन मुख्तार से हुए विवाद के बाद मुकदमेबाजी के चलते इसमें यह कामयाब नहीं रहे. पुश्तैनी तौर पर खेती-किसानी में शैलेन्द्र मजबूत पारिवारिक बैकग्राउंड रखते हैं. गांव में इनकी 35 बीघा खेती योग्य जमीन है. लेकिन बाहुबली मुख्तार के खिलाफ कार्रवाई के चलते और राजनीतिक दबाव में हुए मुकदमेबाजी में इनको पांच बीघा खेत बेचना पड़ा था.

बाहुबली डॉन मुख्तार अंसारी को पंजाब के रोपड़ जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच यूपी की बांदा जेल लाया जा रहा है (फाइल फोटो)

2014 में नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर बीजेपी की सदस्यता ली

मुख्तार प्रकरण के बाद शैलेन्द्र सिंह ने वर्ष 2004 में डिप्टी एसपी की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया. इसके बाद वो राजनीति में आ गए. वर्ष 2004 में वाराणसी से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. इसके दो वर्ष बाद यानी 2006 में वो कांग्रेस में शामिल हुए और 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चंदौली लोकसभा से चुनाव लड़े. हालांकि जनता ने शैलेन्द्र सिंह को तीसरे स्थान पर रखा. कांग्रेस ने इन्हें आरटीआई का यूपी प्रभारी भी बनाया. वर्ष 2009 में चुनाव हारने के बाद दोबारा 2012 में सैयद राजा विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर शैलेन्द्र विधानसभा का चुनाव लड़े. लेकिन इस बार भी इन्हें पराजय हाथ लगी. वर्ष 2014 में इनको नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला. शैलेन्द्र खुद बताते हैं कि मोदी ने उस वक्त पूछा था कि शैलेन्द्र तुम अपना घर कैसे चलाते हो. नरेंद्र मोदी से प्रभावित होने के बाद शैलेन्द्र सिंह ने बीजेपी जॉइन कर ली और बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य बने.

शैलेंद्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में उन्हें नरेंद्र मोदी के वॉर रूम की जिम्मेदारी मिली. वाराणसी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाली. शैलेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार राजनीति में हाथ आजमाया. लेकिन हर बार उन्हें पराजय ही हाथ लगी. अब उन्होंने भविष्य में चुनाव लड़ने की बात से इनकार किया है.

बेसहारा पशुओं को आश्रय देने का करते हैं काम, हो रही है आर्थिक लाभ भी 

नौकरी छोड़ने के बाद बेसहारा हुए शैलेन्द्र सिंह ने बेसहारा पशुओं का सहारा बनने का काम किया. उन्होंने सड़कों पर घूम रहे पशुओं को आश्रय देकर सामाजिक आर्थिक मापदंडों पर पारंपरिक व्यवसाय शुरू किया. लखनऊ और चंदौली, दोनों जगह शैलेन्द्र सिंह पशु संरक्षण का काम कर रहे हैं. सड़कों पर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों को अपने गौशाला में आश्रय देते हैं, और गाय से गोधन-दूध-दही-घी-गोबर और गोमूत्र से आर्थिक लाभ ले रहे हैं.

शैलैन्द्र अपनी काबिलियत से बेसहारा बैलों से बिजली पैदा करने का भी अनोखा काम कर रहे हैं. अभी यह काम छोटे स्तर पर चल रहा है. लेकिन उनका कहना है कि भविष्य में एक मेगावाट बिजली तैयार करने की उनकी योजना है. दरअसल निर्धारित गोलों में बैलों को घुमाकर ऑल्टमीटर के जरिए वो यह बिजली पैदा कर रहे हैं. इसकी जानकारी उन्होंने शासन को भी दी है. शासन स्तर पर एक टीम में उनके इस प्रोजेक्ट का सर्वे भी किया है. अपनी पत्नी के साथ लखनऊ में रहकर शैलैन्द्र जैविक तरीके से धान, गेहूं, सब्जियां और फलों की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि जैविक उत्पाद से बेहतर कीमत मिल रही है. उन्होंने अपने इस प्रयोग को आम किसानों तक भी पहुंचाने का फैसला लिया है.



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