मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष: कांग्रेस की उत्तर भारतीय उम्मीद आखिर किसके भरोसे? – mumbai congress has no any big leader in the party and it will be major factor in bmc elections

35

मुंबई
अगले साल की शुरुआत में होने वाले महानगर पालिका चुनाव में मुंबई कांग्रेस अकेले लड़ने के ऐलान के साथ ही सभी 227 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। लेकिन मुंबई के दूसरे सबसे बड़े वोट बैंक उत्तर भारतीय मतदाता को लेकर भयंकर मुगालते में है। कांग्रेस उत्तर भारतीयों के वोट पाना तो चाहती है, लेकिन कांग्रेस ने जिस-जिस उत्तर भारतीय नेता को बड़ा किया, वे सब कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जा चुके हैं।

उत्तर भारतीय नेताओं का हमेशा से दावा रहा है कि शहर की 1 करोड़, 35 लाख जनसंख्या में 45 से 50 लाख के आसपास उत्तर भारतीय हैं। इनमें से ज्यादातर कांग्रेस के साथ रहे हैं। लेकिन अब उत्तर भारतीयों के नामचीन नेता व मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।

उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष आरएन सिंह बीजेपी में विधायक हैं। कांग्रेस में विधायक रहे ठाकुर रमेश सिंह, मनपा में कांग्रेस के नेता रहे राजहंस सिंह जैसे कई नेता बीजेपी में विभिन्न पदों पर हैं, वहीं हजारों वॉर्ड व जिला स्तर के कार्यकर्ता अब बीजेपी में निचले स्तर पर सक्रिय हैं। ताजा हालात में उत्तर भारतीय समाज इस सवाल के जवाब तलाश रहा है कि उनका कोई नेता जब कांग्रेस में नहीं है, तो उनके लिए कांग्रेस में अब आखिर बचा क्या है!

हवा के साथ बदलता रुख
हालांकि, मुंबई के हिंदी भाषी व उत्तर भारतीय मतदाता एक तरह से हवा के साथ बहनेवाले ‘फ्लोटिंग वोट बैंक’ कहे जा सकते हैं। यूपी की राजनीति में जो पार्टी ताकतवर है, मुंबई में ज्यादातर उत्तर भारतीय उसी के साथ। फिलहाल यूपी में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उत्तर प्रदेश से ही सांसद है, तो मुंबई का उत्तर भारतीय भी बीजेपी के साथ खडा दिख रहा है। इससे पहले जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे तो मुंबई में समाजवादी पार्टी का भी जोर देखा जाता था। उससे बहुत पहले जब कांग्रेस यूपी में ताकतवर थी, तब मुंबई का लगभग हर उत्तर भारतीय कांग्रेसी था।

जो बचे हैं, उनकी कद्र नहीं
लगातार उत्तर भारतीय नेतृत्व विहीन होती कांग्रेस की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि वह करे तो क्या करे। उसके पास अब कोई स्थापित उत्तर भारतीय चेहरा नहीं बचा है, जिसके सहारे फिर से उत्तर भारतीयों को लुभा सके। एक जमाने में राम मनोहर त्रिपाठी, रामनाथ पांडेय, आरआर सिंह, हरिबंश सिंह, चंद्रकांत त्रिपाठी, रमेश दुबे जैसे बड़े नेता कांग्रेस में सक्रिय हुआ करते थे।

इनके अलावा कांग्रेस में शेष बचे मधुकांत शुक्ला, पूर्व उप महापौर राजेश शर्मा, मुंबई कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप शुक्ला, महिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजंता यादव, कचरू यादव, एआईसीसी मेंबर विश्वबंधु राय, बाबूलाल सिंह, संतोष सिंह और इन नेताओं के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं की तरफ कांग्रेस नेताओं का ध्यान ही नहीं है। चुनाव सिर पर है और अब तक कांग्रेसी उत्तर भारतीयों के बीच कोई हलचल नहीं है।

Source link