मप्र में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की कार्ययोजना बनी

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भोपाल:
मध्य प्रदेश में जनवरी से सिंगल यूज प्लास्टिक की छह तरह की सामग्री पर प्रतिबंध लग जाएगा, वहीं राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं के उपयोग से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

भारत सरकार द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम 2021 जारी कर देश में दो चरणों में सिंगल यूज प्लास्टिक की कुछ सामग्री प्रतिबंधित करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसमें एक जनवरी 2022 से छह वस्तुएं प्लास्टिक स्टिकयुक्त ईयरबड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की डंडियां और थार्मोकोल की सजावटी सामग्री प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है।

राज्य शासन द्वारा गठित राज्य स्तरीय स्पेशल टॉस्क फोर्स की पहली बैठक में पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव ने बताया कि भारत सरकार द्वारा भेजे गए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के दूसरे चरण में एक जुलाई 2022 से 11 सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुएं प्रतिबंधित करने का प्रावधान है। ये वस्तुएं प्लास्टिक से बनी प्लेटें, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, स्टिर्रस, मिठाई के डिब्बों, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट के पैकेट को लपेटने, पैकिंग करने के उपयोग में आने वाली प्लास्टिक फिल्म और प्लास्टिक व पीवीसी के 100 माईक्रोन से कम मोटाई के बैनर है।

उन्होंने बताया कि प्रतिबंध लागू होने के बाद प्रभावित होने वाले लघु उद्योगों को चिन्हित कर उनको वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा कार्य योजना बनाई जा रही है।

राज्य स्तरीय स्पेशल टॉस्क फोर्स ने सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं के उपयोग से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार कर केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने का भी निर्णय लिया। साथ ही प्लास्टिक केरी बैग्स के राज्य में प्रतिबंध को प्रभावी ढ़ंग से लागू करने का निर्णय लिया।

टास्क फोर्स की बैठक में उल्लंघनकर्ताओं पर स्पॉट फाइन, पेनाल्टी, प्लास्टिक के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों से आम नागरिकों को भलीभांति अवगत कराने पर भी विमर्श हुआ। जन-जागृति के लिए विभिन्न विभाग कार्ययोजना बना रहे हैं।

राज्य स्तरीय टास्क फोर्स समिति में अपर मुख्य सचिव पर्यावरण, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खेल एवं युवा कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास, औद्योगिक विकास एवं नीति प्रोत्साहन, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, आयुक्त जनसम्पर्क और राज्य संयोजक, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण एवं शहरी शामिल हैं।

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