भारत में कोरोना से ज्यादा इस खतरनाक बीमारी से होती है सबकी मौत | health – News in Hindi

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ट्यूबरकुलोसिस के कुल मामलों में से एक-तिहाई भारत में होते हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ प्रति वर्ष विश्व में रिपोर्ट होने वाले ट्यूबरकुलोसिस के कुल मामलों में से एक-तिहाई भारत में होते हैं. भारत में टीबी की वजह से हर साल 480,000 लोग मौत का शिकार हो जाते हैं.

भारत में कोरोना वायरस से अब तक काफी मौतें हो चुकी हैं. शुरुआत में कोरोना के कारण देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था. लेकिन बीबीसी पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ प्रति वर्ष विश्व में रिपोर्ट होने वाले ट्यूबरकुलोसिस के कुल मामलों में से एक-तिहाई भारत में होते हैं. भारत में टीबी की वजह से हर साल 480,000 लोग मौत का शिकार हो जाते हैं.

लेकिन जब आप इन आंकड़ों को तोड़कर देखते हैं तो ये काफी हैरान करने वाला लगता है. भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक़, टीबी के चलते भारत में प्रति दिन1,300 मौतें होती हैं. हालांकि भारत में लगातार पिछले कई सालों से टीबी का इलाज खोजा जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी अभी तक इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज नहीं मिल सका है.

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बता दें कि इस डाटा का अनुमान भारत में कोरोना वायरस के आने से पहले का है. अगर हम सरकारी डाटा पर नज़र डालें तो यह बात सामने आती है कि जब से कोरोना आया है टीबी के मरीज़ों की रिपोर्टिंग में काफी तेज गिरावट आई है.इस सिलसिले में बिहार के प्रमुख टीबी अधिकारी डॉक्टर केएन सहाय ने कहा कि कोरोना के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग का सारा ध्यान कोविड-19 डाययग्नोसिस में चला गया. स्टाफ़ की पहले भी कमी थी. पिछले महीनों में उन्हें कोविड केयर सेंटर और होम-टू-होम सैम्पल कलेक्शन वगैरह में शिफ़्ट कर दिए गए. उन्होंने बताया कि केवल सरकारी अस्पताल ही नहीं बल्कि प्राइवेट में भी सारे टीबी क्लीनिक बंद हैं. इन सारी चीज़ों ने मिलकर हमारी टीबी के केस नोटिफ़िकेशन में 30 फीसदी से भी ज़्यादा गिरावट आई है जोकि चिंताजनक है.

एपीडेमियोलॉजी एंड ग्लोबल हेल्थ में कनाडा रिसर्च चेयर और मैकगिल अंतरराष्ट्रीय टीबी सेंटर के प्रमुख डॉक्टर मधु पाई इसकी केस स्टडी कर रहे हैं और उनका कहना है कि देश को टीबी को जड़ से मिटाने का लक्ष्य करीब 5 साल आगे बढ़ाना पड़ सकता है.



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