बाल ठाकरे से शरद पवार तक, नेताओं के साथ रहा दिलीप कुमार का मजबूत रिश्ता – dilip kumar’s strong relationship with leaders from bal thackeray to sharad pawar

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नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) मातोश्री आवास की छत पर शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाला साहब ठाकरे के साथ बीयर पीते हुए बतियाना हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार और उनके परिवार के साथ छुट्टियां बिताना हो -महान अभिनेता दिलीप कुमार के लगभग सभी बड़े राजनेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध रहे थे । हालांकि बाद में इन रिश्तों में दूरियां भी आ गई थीं।

98 वर्षीय दिलीप कुमार का मुंबई के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद बुधवार को निधन हो गया ।

मुंबई में 1993 में हुये बम धमाकों के मामले में गिरफ्तार संजय दत्त के साथ दिलीप कुमार का “थोड़ा नरम” रहने का अनुरोध पवार ने ठुकरा दिया था। पवार उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, इसके बाद दोनों के बीच संबंधों में खटास आ गयी थी ।

संजय दत्त 1993 में उस वक्त गिरफ्तार कर लिये गये थे जब उनका करियर अपने चरम पर था । उनके खिलाफ एके—56 राइफल रखने के लिये मामला दर्ज किया गया था और यह उस सिलसिलेवार धमाकों में इस्तेमाल होने के वाले हथियारों और विस्फोटकों की खेप में लायी गयी थी, जिसमें 257 लोग मारे गये थे ।

इसी प्रकार दिलीप कुमार का पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान—ए—इम्तियाज’ स्वीकार करना ठाकरे को रास नहीं आया और वह चाहते थे कि अभिनेता इस पुरस्कार को पाकिस्तान को लौटा दें।

अपनी पुस्तक ‘आन माई टर्म्स’ में पवार ने दिवंगत अभिनेता द्वारा चुनाव के दौरान उनके पक्ष में किये गये प्रचार को याद किया है, उस वक्त पवार कांग्रेस पार्टी में थे ।

पवार ने कांग्रेस से निकाले जाने के बाद पी ए संगमा और तारिक अनवर के साथ मिल कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) का गठन किया था ।

पवार ने कहते हैं कि दिलीप कुमार और तत्कालीन बम्बई प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ उनकी निकटता बढी । उन्होंने कहा, ”चूंकि हमारे परिवार भी एक दूसरे से परिचति हो गये थे इसलिये हमें जब भी मौका मिलता हम सब एक साथ भारत में अथवा विदेशों में लंबी छुट्टियों पर चले जाते ।”

उन्होंने कहा कि कुमार एक जबरदस्त वक्ता थे जो अपने भाषणों से श्रोताओं को घंटों मंत्रमुग्ध कर देते थे । कुमार शूटिंग में से समय निकाल कर बारामती पहुंच जाते और चुनाव रैलियों को संबोधित करते थे ।

पवार ने याद किया है कि जब भी वह भाषण देते तो लोगों का हुजूम उमड़ पडता था और लोग उनके कहे गये एक एक शब्द को हाथों हाथ लेते थे ।

उन्होने लिखा है कि 1993 में संजय दत्त की गिरफ्तारी के बाद जब अभिनेता मिलने आये तो इसके बाद दोनों के बीच संबंधों में खटास आ गयी ।

पवार ने कहा,”वह अपने करीबी दोस्त संजय दत्त की बेचैनी से बेहद दुखी थे और उनके मामले में मुझसे थोड़ी नरमी चाहते थे । दत्त के खिलाफ मजबूत साक्ष्य का हवाला देते हुये मैंने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया । इसके बाद हम दोनों के संबंधों में नीरसता आ गयी लेकिन हमारे परिवार के साथ सायरा बानो के संबंध गर्मजोशी के साथ बने रहे ।”

राजनीतिक परिदृश्य में बाल ठाकरे और पवार एक दूसरे के विरोधी थे, इसके बावजूद कुमार के ठाकरे के साथ भी अच्छे संबंध थे।

अपनी पुस्तक ”बाल ठाकरे एंड राइज आफ शिवसेना” में पत्रकार एवं लेखक वैभव पुरंडारे लिखते हैं कि मातोश्री की छत पर दिलीप कुमार के साथ शाम को बीयर पीने का सिलसिला उस वक्त समाप्त हो गया जब अभिनेता ने पाकिस्तान से निशान-ए-इम्तियाज सम्मान को स्वीकार कर लिया।

पुस्तक के अनुसार, बाल ठाकरे ने हिंदी में कहा था, ”अभी चना भी हैं, बीयर भी है लेकिन दिलीप कुमार के रास्ते बदल गये ।’’

दिवंगत बाल ठाकरे के पुत्र एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कुमार को श्रद्धांजलि देते हुये कहा कि दिलीप कुमार एक चमकता सितारा थे जिन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग को समृद्ध बनाया ।

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