प्रयागराज में शख्स ने पेश की दोस्ती की मिसाल, अस्पताल में रहकर सवा महीने तक की कोरोना संक्रमित दोस्त की सेवा

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अस्पताल में अपने दोस्त की सेवा करते अभिषेक सिंह सोनू.

अभिषेक (Abhishek) के मुताबिक, वह अपने दोस्त को भर्ती कराकर वापस लौटना चाहता था. लेकिन उसके दोस्त स्वतन्त्र ने कहा उसके जाने से हौसला टूट जायेगा क्योंकि उस वक्त उसका आक्सीजन लेवल 35 आ गया था.

प्रयागराज. कोरोना काल में कोविड संक्रमण (Covid Infection) के डर से जब करीबी रिश्तेदार ही अपनों का साथ छोड़ रहे थे और अंतिम संस्कार के लिए कंधा देने के लिए भी लोग तैयार नहीं हो रहे थे, तब ऐसे मुश्किल हालातों में भी प्रयागराज (Prayagraj) के एक शख्त ने दोस्ती की मिसाल पेश की है. एक दोस्त ने अपने दोस्त के कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी न केवल दोस्ती का फर्ज निभाया, बल्कि कोविड अस्पताल (Covid Hospital) में भर्ती कोरोना संक्रमित दोस्त के साथ साये की तरह रहा. और आखिरकार ऑक्सीजन लेवल 35 पर पहुंचने के बावजूद अपने दोस्त को मौत के मुंह से बाहर निकाल लाया. कौन है ये शख्स और क्यों लोग इस दोस्ती की मिसाल दे रहे हैं. देखिये  इस खास रिपोर्ट में.

”ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे.” जी हां, प्रयागराज के चांदपुर सलोरी के रहने वाले अभिषेक सिंह सोनू और जंघई के रहने वाले स्वतंत्र सिंह की दोस्ती कुछ ऐसी ही है. स्वतंत्र सिंह कोरोना संक्रमित हुए और जब उसकी हालत खराब होने लगी तो उसके दोस्त अभिषेक ने उन्हें वाराणसी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया. अभिषेक सिंह सोनू ने दोस्ती के आगे न मां-बाप की सुनी और न ही संक्रमण से डरे. जब लोग कोरोना संक्रमित मरीज के साए से दूर हो जाया करते थे, लोग अपनों को अस्पताल में मरने के लिए छोड़ आते थे. ऐसे समय में अभिषेक 24 घंटे डेढ़ महीने तक अपने दोस्त के साथ साये की तरह रहे. दिनरात उसकी सेवा की, हौसला बढ़ाया और दोस्त को मौत के मुंह से छीनकर वापस ले आया.

वह अपने दोस्त को भर्ती कराकर वापस लौटना चाहता था

अभिषेक के मुताबिक, वह अपने दोस्त को भर्ती कराकर वापस लौटना चाहता था. लेकिन उसके दोस्त स्वतन्त्र ने कहा उसके जाने से हौसला टूट जायेगा क्योंकि उस वक्त उसका आक्सीजन लेवल 35 आ गया था. डाक्टरों ने भी जवाब दे दिया था. अपने दोस्त की हालत देख अभिषेक वहीं रुक गए और दोस्त को हौसला देने के साथ ही एक्सरसाइज कराने से लेकर उसे समय पर दवा, खाना खिलाना, उठाना-बैठाना सब कुछ किया. जब दोस्त एकदम ठीक हो गया तब डेढ़ महीने बाद अपने घर वापस आया. अस्पताल में अपनी दोस्त की सेवा का वीडियो भी उनके पास मौजूद है. इस दौरान अभिषेक ने वार्ड में भर्ती दूसरे मरीजों की भी सेवा की और कई मरीजों की मौत के बाद परिजनों के न होने पर कंधा भी दिया.अभिषेक जैसा दोस्त हर किसी को मिले

वहीं, दोस्त की मदद से स्वतंत्र सिंह को नई जिंदगी मिली है. स्वतन्त्र सिंह अपनी दोस्ती का जिक्र आते ही भावुक हो उठते हैं. स्वतन्त्र कहते हैं कि यदि अभिषेक न होते तो मैं आज आपके सामने खड़ा नहीं होता. आज मेरी हर सांस अभिषेक सिंह सोनू की कर्जदार है. दरअसल, 10 अप्रैल को स्वतन्त्र कोरोना संक्रमित हुए थे. उन्हें बुखार आ रहा था. जांच कराई तो टायफाइड निकला. दवा चलने लगी. लेकिन लगातार खांसी आ रही थी. आक्सीजन लेवल लगातार कम होने लगा. जब आक्सीजन लेवल 45 पहुंच गया तो घर वाले भी घबरा गए. परिजनों ने उनके दोस्त अभिषेक को फोन किया. अभिषेक आये और अस्पतालों में भर्ती का प्रयास शुरू हुआ. सब जगह अस्पतालों में बेड फुल थे. बहुत कोशिशों के बाद वाराणसी के पापुलर अस्पताल में एक बेड मिला. अस्पताल पहुंचते- पहुंचते आक्सीजन लेवल 35 आ गया. डॉक्टर भर्ती करने को ही नहीं तैयार थे. हांलाकि, अभिषेक की सेवा के बाद अब उनके दोस्त को नई जिंदगी मिली है, जिसके बाद स्वतन्त्र यही कह रहे हैं कि अभिषेक जैसा दोस्त हर किसी को मिले.

इन दोनों की दोस्ती की मिसाल दे रहे हैं

बहरहाल, अभिषेक सिंह सोनू और स्वतन्त्र सिंह की दोस्ती इलाहाबाद सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी. लेकिन यह दोस्ती कब गहरी होती चली गई उन्हें खुद भी पता नहीं चला. ऐसे में कोविड की जब सेकंड वेब में दोस्त की जान पर बन आयी तो दूसरे दोस्त ने फरिश्ता बनकर उसकी जान बचायी है. आज पूरे प्रयागराज में लोग इन दोनों की दोस्ती की मिसाल दे रहे हैं.







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