नाणार परियोजना पर राजनीति: नाणार परियोजना पर राजनीति फिर तेज, राज ठाकरे ने परियोजना को लेकर लिया यू-टर्न – politics started again on nanar project

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अभिमन्यु शितोले, मुंबई
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने नाणार रिफाइनरी परियोजना पर यू-टर्न ले लिया है। पहले राज ठाकरे इस परियोजना का खुलकर विरोध कर रहे थे और अब उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, महा विकास आघाडी सरकार के शिल्पकार शरद पवार और विधानसभा में नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर नाणार परियोजना को महाराष्ट्र के हाथ से न जाने देने का आग्रह किया है। अब राज ठाकरे का कहना है कि महाराष्ट्र के युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए इस परियोजना का अमल में आना बहुत जरूरी है।

राज ठाकरे के इस यू-टर्न के बाद नाणार परियोजना पर राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। बीजेपी ने राज ठाकरे की भूमिका का समर्थन किया है, वहीं शिवसेना ने राज ठाकरे की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि राज ठाकरे को इस मुद्दे पर यू-टर्न लेना पड़ा।

राज के पत्र की खास बातें
बहरहाल राज ठाकरे ने अपने पत्र में लिखा है कि महाराष्ट्र इस परियोजना को को गंवाने की स्थिति में नहीं है। इसलिए सरकार इस मामले में सकारात्मक भूमिका अपनाए। स्थानीय लोग पर्यावरण व दूसरी चिंताओ को लेकर नाणार परियोजना का विरोध कर रहे हैं लेकिन उन्हें समझाया जा सकता है। राज ने सरकार को यह भी भरोसा दिलाया है कि इस मामले में उनकी पार्टी मनसे सरकार को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। पत्र में कहा है कि कोकण हर दृष्टि से समृद्ध है। फिर भी यहां के युवाओं को रोजगार की तलाश में मुंबई व पुणे जाना पड़ता है।

उन्होंने कहा है कि कोकण को कैलिफोर्निया बनाने की बात कही जाती है, पर हकीकत में कोकण को किसी विकास के मॉडल की जरुरत नहीं है, क्योंकि वास्तविक रुप में कोकण खुद विश्व के लिए एक विकास का मॉडल साबित हो सकता है। राज ठाकरे का यह भी कहना है कि कोरोना के बाद हालात बदल गए हैं। राज्यों के बीच निवेश पाने की गलाकाट रेस चल जारी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक बड़ी परियोजना पहले ही महाराष्ट्र के हाथ से छिटककर कर्नाटक के हाथ मे चली गई है। अब महाराष्ट्र को तीन लाख करोड़ रुपये की नाणार रिफाइनरी परियोजना हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।

शिवसेना सांसद ने उठाए सवाल
नानार रिफायनरी का विरोध करने वालों में सबसे आगे रहे कोकण के शिवसेना सांसद विनायक राउत ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे के यूटन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ठाकरे ने इससे पहले नाणार रिफायनरी परियोजना का कड़ा विरोध किया था। नाणार में 221 गुजराती भूमाफियाओ ने जमीन ली है। ऐसे में मुझे आशंका है कि राज ठाकरे को सच में कोकणवासियों की चिंता है या फिर वे भूमाफियओ के फायदे के लिए परियोजना के समर्थन में उतर आए हैं।

शिवसेना ने रोका था भूमि अधिग्रहण
बता दें कि बीजेपी के साथ सरकार में रहते हुए भी बीजेपी के लाख विरोध के बावजूद शिवसेना ने ही नाणार में रिफाइनरी के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना को रद्द कर दिया था और अधिग्रहण की प्रक्रिया रोक दी थी। फडणवीस सरकार में शिवसेना के पास उद्योग मंत्रालय था और उद्योग मंत्रालय ने भूमि अधिग्रहण रोकने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री बनते ही उद्धव ठाकरे ने नाणार परियोजना के विरोध में आंदोलन करने वाले आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस ले लिए थे।

जमीन खरीद की जांच
राज्य में महा विकास आघाडी की सरकार सत्ता में आते ही तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने नाणार रिफाइनरी परियोजना की घोषणा से पहले नाणार में बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से आए धन्नासेठों द्वारा जमीनों की बड़े पैमाने पर खरीद किए जाने की जांच के आदेश दिए थे। इसके लिए अतिरिक्त जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाए जाने और एक महीने के भीतर पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। बता दें कि कोकण के नाणार में बनने वाली नाणार रिफाइनरी परियोजना की घोषणा 2017 में की गई थी, लेकिन इससे पहले 2016 में ही दूसरे राज्यों के बड़े-बड़े धन्नासेठों द्वारा नाणार और उसके आसपास के 15 गांवों के किसानों से ओने-पौने भाव में 3000 एकड़ से ज्यादा जमीनें खरीद ली गईं थीं।

बीजेपी का राज को समर्थन
नाणार परियोजना पर राज ठाकरे के अचानक यू-टर्न के बाद बीजेपी उनके समर्थन में आ गई है। बीजेपी नेता और विधान परिषद में नेता विपक्ष प्रवीण डरेकर ने कहा है कि कोकण के विकास में आमूलचूल परिवर्तन करने वाली नाणार परियोजना के बारे में राज ठाकरे की नई भूमिका स्वागत योग्य है।

कांग्रेस नेता ने भी लिखा पत्र
नाणार परियोजना के समर्थन में राज ठाकरे के पत्र के बाद कांग्रेस के नेता आशीष देशमुख ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और उनसे मांग की है कि नाणार परियोजना को पोकरण के बजाय विदर्भ में स्थलांतरित किया जाए।

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