देश से 5 साल पहिले ही मिलल रहे बलिया के हफ्ताभर आजादी, जानीं एकर सुनहरा इतिहास– News18 Hindi

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आजु यानी 19 अगस्त के दिने ठीक 79 साल पहिले बलिया आपाना के अंगरेज सरकार के गुलामी से आजाद कइ लेले रहे. बलिया के आजादी के गोरी सरकार के नजर में का अहमियत रहे, एही बात से समझल जा सकेला कि जब हफ्ताभर बाद क्रूर अंग्रेज अधिकारी नेदरसोल के दमन के चलते बलिया पर अंगरेजन के कब्जा भइल त बीबीसी लंदन से प्रसारित अंग्रेजी बुलेटिन के शीर्षक रहे, बलिया पर फेरू से कब्जा.

आठ अगस्त 1942 के सांझि खा बंबई में जुटल कांग्रेस कार्यसमिति अंगरेज सरकार के खिलाफ ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पास कइले रहे. दरअसल ओह घरी पूरा दुनिया दूसरा विश्व युद्ध से जूझि रहल रहे. अंगरेज सरकार भारतीय नेता लोगन के विरोध के बावजूद भारतो के विश्वयुद्ध में जोड़ि दिहलसि. एकर विरोध भइल. गांधी जी पहिलका विश्व युद्ध के वाकया भुलाइल ना रहले. तब अंगरेज सरकार भारतीय लोगन से ओह युद्ध में एह सर्त पर सहयोग मंगले रहे कि विश्व युद्ध के बाद भारत के औपनिवेशिक स्वाधीनता दे दीही. बाकिर बाद में एह से मुकरि गइल रहे.

भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित भइला के बाद अंगरेज सरकार बंबई में जुटल कांगरेस के बड़का नेता मसलन गांधी जी, नेहरू, पटेल, मौलाना आजाद, आदि के गिरफ्तार कइ के जेल में भेजि दिहलसि. गांधी जी के पूना के आगा खां महल में कैद कइल गइल त जवाहर लाल नेहरू अहमदनगर जेल में डालि दिहल गइले.

कांग्रेस के अधिवेशन अगिला दिने यानी नौ अगस्त के बंबई के गवालिया टैंक मैदान में होखे के रहे. बाकिर उहवां पुलिस कब्जा कइ लिहलसि. अब ई मैदान आजाद मैदान के नाम से जानल जाला. ओह घरी ले रेल, आदि से नेता बंबई आवत रहले. त अंगरेज सरकार बीचे में लोगन के रेल से उतारि के गिरफ्तार कइ लिहलसि.

ई खबरि जब बलिया में पहुंचल त लोग एकर विरोध में उतरि गइले. कांगरेस के नेतन के विरोध में बलिया में भी चित्तू पांडे, विश्वनाथ चौबे, जानकी प्रसाद शर्मा, राधामोहन सिंह आदि के अगुआई में बलिया के कांगरेसी आ आम आदमी विरोध सुरू कइ दिहले. एकरा के अंगरेज सरकार ओइसहिं दबवलसि, जइसे बंबई समेत पूरा देस में दबावल जात रहे.

दिलचस्प बात ई बा कि ओह घरी बलिया के कलक्टर, एसपी, तहसीलदार सभ भारतीये रहले. कलक्टर रहले जे निगम त एसपी रहले रियाजुद्दीन शेख, आ तहसीलदार रहले ठाकुर रामलगन सिंह. लोगन के जानि के अचरज होई कि ई भारतीये अफसर लोग ओह घरी अपने लोगन पर अतियाचार कइले रहे लोग.

प्रसासन पूरा जिला में नौवे अगस्त से धारा 144 लगा देले रहे. बाकिर गांवन में विरोध सुरू हो गइल रहे. रेवती, बैरिया, सहतवार, सुखपुरा, चितबड़ा गांव, रसड़ा आदि में विरोध बढ़ि गइल रहे. ओह घरी बलिया में छात्र लोगन के नेता रहले पंडित तारकेश्वर पांडे. रामलक्षण तिवारी आदि लोग उनुकर संहतिया रहे. ओह लोगन के अगुआई में बलिया में दस अगस्त के दिने छात्रन हड़ताल रहल. ओह दौरान पुलिस छात्रन पर लाठी चार्ज कइलसि त छात्र रेलवे लाइन पर जुटि गइले आ उहवां के गिट्टी फेंकि के पुलिस पर हमला कइले. बाकिर आंदोलन जारी रहल. एह बीचे सोलह अगस्त के दिने बलिया के नजदीक के लोग विरोध में तरकारी के खांची ले-ले बलिया पहुंचले. असल में विरोध में जुटान के ई तरीका रहे. पुलिस एह बाति के समझि ना पवलसि आ जबले समझलसि, तब ले हजारन लोग बलिया में जुटि गइल रहले. एह से प्रसासन के हाथ पाव फूलि गइल. एह में से ज्यादेतर लोग सहर के गुदरी बाजार में जुटि गइल रहे. एह जुटान के छितिर-बितिर करे खातिर बलिया के अगरेज एसडीएम ओबैस, तहसीलदार रामलगन सिंह आ कोतवाल सिवकेदार सिंह भारी पुलिस बल लेके गुदरी बाजार पहुंचि गइले. उहवां जाके पहिले लाठी चार्ज भइल आ फेरू गोलीबारी. एह में खोरी पाकड़ के बीस साल के नौजवान दुखी कोइरी पुलिस से भिड़ि गइले. तब उनुकरा पर पुलिस गोली चला दिहलसि. ओह से बचाव में ऊ आपन तरकारी के छँइटिए आगे कइ दिहले. बलिया के गुदरीबाजार के नगीचहीं लोहामंडी बा. ऊहवें गोलीबारी में दुखी सहीद हो गइले. बलिया के आजादी के आंदोलन के ई पहिलका सहादत रहे. एकरा बाद ओह दिन आउर छह लोग सहीद भइले. ओह में सहीद भइल मोहित लाल त बलेसर जी के दर्सन कइ के निकलत रहले त पुलिस उनुको के मारि दिहलसि.

एह बीचे देस में आगि लागि गइल रहे. गिरफ्तार कइ के जेल लेजात खानी गांधी जी एगो पुरजी पर लिखि के संदेस देले रहले, करो या मरो. ओह के देस के जनता दिल पर ले लिहलसि. एह में छात्रन के भूमिका बहुते रहे. इलाहाबाद आ बनारस के विश्वविद्यालयन के छात्र आंदोलन पर निकलि गइले. इलाहाबाद से बनारस होके बलिया दूगो रेल गाड़ी पहुंचली स. ऊ 14 आ 15 अगस्त के पहुंचल रहली स. एगो गाड़ी पहुंचलि बलिया आ दोसरकी मऊ होके बेलथरारोड. एह गाड़ी में सवार लइका हर स्टेसन के लूटत चलले. बेल्थरा रोड में जब गाड़ी पहुंचलसि त उहवां के छात्र नेता पारसनाथ मिसिर के अगुआई में स्टेशन आ मालगोदाम लूटा गइल. एही तरी बलिया बनारस रूटो पर आंदोलन जारी रहे. इलाहाबाद से चललि ट्रेन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे लोग, जवन बेल्थरारोड पर पहुंचलि रहे त बलिया आवे वाली रेल मे बनारस के काशी हिंदू विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ के छात्र रहे लोग. देखत-देखत पूरा बलिया में क्रांति फइल गइल. एह में नौजवानन के भागेदारी ज्यादे रहे. सहतवार, बांसडीह, सिकंदरपुर, उभांव, चिलकहर, हलधरपुर आदि के थाना पर या त कांग्रेसी तिरंगा फहरा दियाइल भा लूटि लियाइल. बलिया आ बांसडीह तहसील पनरह –सोरह अगस्त के लूटा गइल. एह बीच अठारह अगस्त के बैरिया थाना पर जवार भरि के लइकन के जुटान भइल. थाना पर झंडा फहरावे के लोग थानेदार से मंजूरी मांगल. थानेदार दे दिहलसि. बाकिर ओकरा मन में कारिख रहे. जइसहिं नारायनागढ़ के नौजवान कौशल सिंह झंडा लेके चलले, उनुका के गोली मारि दियाइल. एकरा बाद नौजवान बढ़त गइले आ मारात गइल. एह में 22 गो नौजवान मराइल रहले. ओहि दिने रसड़ा में थाना पर झंडा फहरावे में बीस लोग सही हो गइले. बहरहाल ई सहादत से बलिया बउरा गइल. बैरिया थाना के तीन ओर से घेरि लियाइल रहे, जबकि एक ओर बाढ़ि के पानी भरल रहे. लोग सोचल की थाना घेराइल बा त थानेदार आ सिपाही सब ओहि में होइहें, बाकिर उ सभ पानी में कूदि के जनेरा के खेते-खेते फरार हो गइले स.

बलिया में हालात जब बेकाबू हो गइल त 18 तारीख के जिला के प्रमुख लोगन संगे प्रशासन के मीटिंग भइल. प्रशासन एह में लोगन से मदद मंगलसि. बाकिर मदद ना मिलल. एह के पहिले 16 आ 17 अगस्त के भी मीटिंग भइल रहे. एह बीचे 18 अगस्त के जेल में बंद कांग्रेस नेतन से कलक्टर आ एसपी मिलले. तब राधामोहन सिंह कहले रहले कि बलिया में पंचायती वेवस्था से शासन चली. तब कलक्टर जे निगम खिसिया गइल रहले आ एह पर तेयार ना भइले. ओह घरी बलिया बनारस कमिस्नरी में आवत रहे. उहवां से फोर्स मंगावे के कोशिश कइले. बाकिर बलिया से बनारस के बीचे रेल लाइन उखारि दियाइल रहे. जगहि-जगहि टेलीफोन के तार काटि दियाइल रहे त फोर्स ना आ पाइल. एह बीचे बलिया बेकाबू हो गइल रहे.
19 अगस्त के दिने बलिया में करीब साठि हजार लोग जुटि गइले. बलिया आवे वाला बैरिया रोड, बांसडीह रोड वाली सड़कि, पछिम से आवे वाली दूनो आ सिकंदर पुर रोड सब पर लोगन के कब्जा हो गइल रहे. एकरा बाद जिला प्रसासन सरेंडर कइ दिहलसि आ 19 अगस्त के दिने बलिया आजाद हो गइल. जेल के फाटक खोला गइल आ गिरफ्तार नेता लोगनि के छोड़ि दियाइल. बलिया के जनता आपाना नेतन के सम्राट नियर स्वागत में उमड़ि परलि. बलिया के सुराजी सरकार के प्रमुख चित्तू पांडे चुनल गइले. करीब हफ्ता भर तक बलिया में सुराजी सरकार चलल. जवना के प्रमुख रहले चित्तू पांडे, जेकरा के बाद में शेर ए बलिया कहल गइल.

बलिया के एह आजादी से अंगरेज घबरा गइले स. क्रूर अफसर नेदरसोल के अगुआई में कुमुक 25 जुलाई के राति गंगाजी के जरिए बलिया पहुंचलि आ ओकरा बाद गांवा-गाईं अतियाचार सुरू हो गइल. लोगन के धर-पकड़, पिटाई सुरू भइल आ ई 1944 ले जारी रहल. जब एह साल फिरोज गांधी बलिया अइले त बलिया पर भइल अतियाचार देखि के दंग रहि गइले. तब बलिया के वकील मुरली मनोहर लाल के अगुआई में इहवां के वकीलन के तेयार कइले कि ऊ लोग बलिया के लोगन के अतियाचार से बचावे खातिर मुकदमा लड़सु लोग.

बलिया भले ही अंगरेजन के कब्जा में आ गइल, बाकिर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में देस के आजादी के पहिले आजादी हासिल कइके इहवां के माटी आपन नाम सुनहला अछरि में लिखवा लिहलसि. ई आंदोलन देस खातिर प्रेरणा बनल, जवना पर आगे बढ़ि के पांच साल देस के आजाद हो गइल. (उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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