ठाकरे सरकार का बजट: ठाकरे सरकार का आज है बजट, पेट्रोल-डीजल पर कम हो सकता है टैक्स – today thackeray government will table their budget

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हाइलाइट्स:

  • उप मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री अजित पवार पेश करेंगे बजट
  • आर्थिक सर्वे ने निराशा जताई
  • खेत-खलियान, कल-कारखानों पर होगा ध्यान
  • स्वास्थ्य दुरुस्त करने पर रहेगा जोर
  • पेट्रोल-डीजल से कम हो सकते हैं टैक्स

राजकुमार सिंह, मुंबई
आर्थिक सर्वे रिपोर्ट ने राज्य के हालात की बेहद निराशाजनक तस्वीर सामने रखी है। अब उसे पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती वित्तमंत्री अजित पवार यानी दादा के सामने है। दादा का खेत-खलियान और कल-कारखाने लगाने पर ज्यादा ध्यान होगा, ताकि सरकार की कमाई के साथ-साथ बेरोजगारी की समस्या भी हल की जा सके। आम आदमी का स्वास्थ्य चुस्त-दुरुस्त रहे, इस पर भी दादा का फोकस बजट में रहेगा। उम्मीद की जा रही है कि ठाकरे सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए सेज या कर में कुछ राहत देकर केंद्र सरकार के सामने एक मिसाल रखेंगे।

सोमवार को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री व वित्तमंत्री अजित पवार और विधान परिषद में वित्त राज्यमंत्री शंभूराज देसाई दोपहर दो बजे सदन में साल 2021-22 का बजट पेश करेंगे। ठाकरे सरकार की महा विकास आघाडी का यह दूसरा बजट होगा। कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहे राज्य के पास बेहद सीमित साधन हैं। आर्थिक सर्वे में विकास दर में 8 फीसदी की बड़ी गिरावट का अनुमान पहले ही व्यक्त किया है।

अर्थव्यवस्था को किसानों ने संभाल लिया है, लेकिन दूसरे अन्य सभी सेक्टरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आधारभूत संरचना के विकास पर भी दादा का जोर होगा, लेकिन डांवाडोल आर्थिक स्थिति सीमाओं में बांधने में दादा का ध्यान रहेगा। सरकारी खर्च में बड़ी कटौती पर भी वित्तमंत्री का ध्यान रहेगा। किसी प्रकार के टैक्स बढ़ाने की संभावना कम ही व्यक्त की जा रही है, बल्कि वित्तमंत्री का ज्यादा ध्यान निजी सेक्टर को बढ़ावा देने पर रहेगा।

महंगाई पर नियंत्रण और निवेश पर ध्यान
महंगाई की मार झेल रही आम जनता को राहत मिलने की संभावना कम ही है, लेकिन वित्तमंत्री का इस पर पूरा ध्यान रहेगा कि और महंगाई नहीं बढ़ने पाए। ज्यादा से ज्यादा निवेश लाने पर सरकार का जोर रहेगा। कोरोना की मार झेल रहे पर्यटन, होटल, मनोरंजन उद्योग के लिए सरकार कुछ नई राहत दे सकती है। राज्य का कपड़ा उद्योग लगातार दूसरे राज्यों में पलायन कर रहा है। उसे रोकना वित्तमंत्री के सामने एक चुनौती है।

पड़ोसी राज्यों की तुलना में बिजली और पानी महाराष्ट्र में काफी महंगा है। उद्योग के लिए जमीन आसानी से सरकार मुहैया नहीं करा पा रही है। इस पर भी वित्तमंत्री दादा का ध्यान का रहेगा। होटल, पर्यटन, मनोरंजन, कपड़ा, हीरा उद्योग जैसे कई सारे अन्य सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को इस बजट से बड़ी उम्मीद है। उनकी उम्मीद पर दादा कितने खरे उतरते हैं, यह तो सोमवार की दोपहर दादा का पिटारा खुलने पर ही पता चल जाएगा।

लोग रहें सेहतमंद, इस पर रहेगा ध्यान
देश में कोरोना की सबसे बड़ी मार महाराष्ट्र पर ही पड़ी है। आज भी देश में राज्य पहले नंबर पर है। लोग चुस्त-दुरुस्त और स्वस्थ रहें, इस पर वित्तमंत्री का पूरा ध्यान रहेगा। देखना दिलचस्प होगा कि दादा के बजट पिटारे से स्वास्थ्य के लिए क्या कुछ निकलता है? राज्य में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग में भर्ती जारी है। अन्य विभागों में भर्ती के लिए सरकार क्या घोषणाएं करती है, इस दिशा में सभी की निगाहें लगी रहेंगी।

बढ़ेगा कर्ज और राज्य का घाटा
बजट घाटा बढ़ने की पूरी संभावना है। साथ ही कर्ज में इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2020-21 ने पहले ही बता दिया है कि आय में 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट की संभावना है। इसके चलते ठाकरे सरकार को राज्य का कामकाज चलाने के लिए कर्ज लेना ही पड़ेगा। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, राजकोषीय घाटा 2.1 प्रतिशत रहेगा, जबकि कर्ज कुल जीएसडीपी का 19.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मतलब राज्य पर कर्ज का बोझ पांच लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने की संभावना है।

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