ज्ञान के व्यापार से मानव का कल्याण संभव नहीं— स्वामी रितेश्वर जी महराज

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भास्कर ब्यूरो

लखनऊ। राजधानी के विपुलखंड में आयोजित शिष्य समागम में शुक्रवार को वर्तमान में लागू शिक्षा नीति को लेकर सद्गुरु रितेश्वर महराज ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा सनातन शिक्षा नीति को पूरी तरह ध्वस्त किया गया। कहा कि जिस प्रकार से आदि सनातन से चल रही शिक्षा नीति को विदेशी आक्रांताओं ने ध्वस्त की है,उसी से उत्पन्न हुई समस्या का जीता जागता उदाहरण है जिसमें इस शिक्षा नीति से समाज का विखंडन हुआ और हमारी संस्कृति समाप्त करने में पूरी तरह से सफल रहे।कहा यह हमारी धरती तपोभूमि रही है जिसमें अनेकों पवित्र आत्मा का जन्म होता रहा है । जिसमें विवेकानंद जी जैसे महा ऋषि होने से समस्त मानव जाति का कल्याण किया है।कहा कथा वाचक आचार्यों को यह ध्यान रखना होगा की ज्ञान एक पुत्री के समान है ,इसको बेचने से मानव जाति का कल्याण नही हो सकता ।कहा ज्ञान को धन से जोड़ने के कारण ही लोगों में ज्ञान के अभाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश द्वारा लागू की गई शिक्षा नीति से ही आज समाज में संस्कार विलुप्त होने के कगार पर है इसे बचाने के लिए सभी को सनातन परंपराओं को धारण करना होगा।कहा आधुनिकता के बदलते परिवेश में लोग गौ पालन से दूर होने का प्रमुख कारण है जिस प्रकार से बीमारियों को दूर करने के लिए अस्पताल बनाए जा रहे है ,अस्पताल बनाने से समस्या का समाप्त नहीं होगी इसके लिए सरकार को समस्या के कारण पर कार्य करना होगा।कहा चाहे कितने भी एम्स खोल दिए जाए इसका समाधान नहीं हो सकता जब तक जड़ पर कार्य नही किया जाएगा। सद्गुरु ने कहा कि सनातन शिक्षानीति से समस्त मानव का कल्याण होगा ।उन्होंने कहा की गुरु भी कई तरह के होते है कोई एक गुरु के अनुचित कार्य करने से समस्त गुरुकुल वैसा नही होता।कहा कि जिस प्रकार अस्पताल में कोई एक डॉक्टर किडनी चोर होने से समस्त डॉक्टर किडनी चोर नहीं होते, उसी भांति गुरुकुल है ।कहा जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूर्ति देखी तिन तैसी।।ज्ञान प्राप्त करने के लिए नकारात्मक चादर को उतारने से ही गुरु की पहचान कर सकते है।सद्गुरु रितेश्वर महराज ने यही कहते हुए बताया की सनातन शिक्षा नीति से ही भारत विश्व गुरु बनेगा यह निश्चित है ।कहा वर्तमान में हम कहा जा रहे इसके लिए लोगों को विचार करना होगा।