गोरखपुर में नदियों का रौद्र रूप जारी, 171 गांव बाढ़ से प्रभावित, हजारों लोग बेघर

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गोरखपुर. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों गोरक्षपीठ के शैक्षिक पुनर्जागरण आंदोलन को आज एक नया आयाम मिला. पीठ के अधीन और गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देखरेख में स्थापित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम सोनबरसा को शनिवार को राष्ट्रपति ने समारोहपूर्वक लोक को अर्पित किया. राष्ट्रपति ने कहा कि गोरखपुर सिद्ध योगियों की सर्वोच्च पीठ है. इस धरती में भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी, संतकबीर, बाबा राघवदास, रामप्रसाद बिस्मिल, रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी, विद्यानिवास मिश्र, गीता प्रेस के आदि संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार की खुशबू है.

राष्ट्रपति ने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ जिन्होंने योग को लोक कल्याण का जरिया बनाया, उनकी इस पीठ की इस पूरे क्षेत्र में जंगे आजादी, राजनैतिक व शैक्षिक पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. भारत समेत अन्य कई देशों में नाथ पंथ और योग के विस्तार को देखते हुए आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने शंकराचार्य के साथ गुरु गोरखनाथ को विश्व के सबसे प्रभावशाली लोगों में माना था. स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ज्ञान के साथ विकास, संस्कृति, संस्कार, चरित्र निर्माण, स्वावलंबन, तार्किकता, करुणा और नवाचार का माध्यम होनी चाहिए. समग्रता में ऐसी शिक्षा ही देश व समाज के उत्थान का माध्यम बनती है.

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि गोरखपुर भविष्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश की शिक्षा का हब बनेगा. उन्होंने कहा कि शिक्षा भारतीय परंपरा, संस्कृति, संस्कार के अनुरूप होनी चाहिए.

2020 में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बनी नई शिक्षा नीति का भी यही मकसद है. मेरी पूरी उम्मीद है कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति को आत्मसात करेगा. उन्होंने कहा कि मेरा यहां तीन साल से कम समय मे दो बार आना हुआ. दोनों अवसरों पर में यहां आकर बेहद खुश हुआ. इसके पहले 10 दिसम्बर 2018 को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन में आया था. तब मैंने गोरक्षपीठ से जुड़े एमपी शिक्षा परिषद से यह अपेक्षा की थी कि वह गोरखपुर को सिटी ऑफ नॉलेज बनाए. महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय के रूप में अपने उक्त आह्वान को साकार देखते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है.

ऐसी शिक्षा जिसमें देश प्रेम जगाने का जज्बा और जुनून हो, जो नवाचार और कौशल बढ़ावा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त और समर्थ भारत के सपने को साकार करे. नई शिक्षा नीति का भी यही उद्देश्य है. यकीनन महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय भी इन सपनों को साकार करने में मददगार बनेगा.

राज्यपाल ने कहा कि गोरखपुर महान तपस्वियों की तपस्थली रहा है. इसका स्वतंत्रता आंदोलन और शैक्षिक पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण स्थान रहा है. इस सबमें गोरक्षपीठ की विशेष भूमिका रही है. इसका इतिहास जितना प्रेरक है, उतना ही संपन्न भी. यह धर्म और आध्यत्म का भी केंद्र है. यह खुशी की बात है कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अपनी संस्थाओं के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा देने के साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास पर भी समान रूप से ध्यान देता है.

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपी शिक्षा परिषद) ने पूर्वांचल को केंद्र मानकर जिस शैक्षिक पुनर्जागरण की शुरुआत की थी, वह सिलसिला लगातार जारी है. महायोगी गुरु गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय भी उसी की एक कड़ी है. आज सेवा, शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा के जरिये लोककल्याण के लिए परिषद की चार दर्जन से अधिक संस्थाओं में शिशु से लेकर परास्नातक स्तर हर विधा में शिक्षा दी जाती है.

10 दिसम्बर 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी एमपी शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे. तब उन्होंने गोरखपुर को नॉलेज सिटी बनाने का आह्वान किया था. महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय उनके इस आह्वान के अनुरूप होगा. इसका मुझे पूरा भरोसा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के जरिये देश की शिक्षा व्यवस्था को भारतीयता के पुट में अंतरराष्ट्रीय मानकों के समानांतर बनाया है, एमपी शिक्षा परिषद भी इसमें अपना पूरा योगदान देने को संकल्पित है.

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