ऑक्सीटॉसिन हॉर्मोन का भावनाओं से है संबंध, जानें शरीर में इसका क्‍या है काम

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किसी के साथ प्यार में पड़ने पर, गले लगने पर, रोमांस (Romance) करने पर या अपने साथी के साथ खास पल बिताने पर, आपको एक अजीब सी फीलिंग महसूस होती होगी. आप जानते हैं, ऐसा क्यों होता है? आइए हम बताते हैं. दरअसल ऐसा हमारे शरीर में बनने वाले ऑक्सीटॉसिन हॉर्मोन (Oxytocin Hormone) की वजह से होता है, जो प्यार भरे इन पलों में ज्यादा मात्रा में रिलीज़ होता है. इसी वजह से इस ऑक्सीटॉसिन हॉर्मोन को लव हॉर्मोन (Love Hormone) के नाम से भी जाना जाता है.

ऑक्सीटॉसिन का प्यार से इस तरह से है सम्बन्ध

आप सोच रहे होंगे, कि ऑक्सीटॉसिन नाम के इस हॉर्मोन का प्यार से आखिर क्या लेना देना है? तो यहां हम बता दें, कि हेल्थलाइन डॉट कॉम में प्रकाशित, एक खबर के अनुसार, 2012 में हुई एक रिसर्च के दौरान यह पाया गया कि रोमांस की पहली स्टेज में चल रहे कपल्स में ऑक्सीटॉसिन हॉरमोन बाकी कपल्स की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में बन रहा था. इसके साथ ही रिसर्च में यह भी सामने आया, कि खास तौर से नए प्यार में पड़ने पर और यौन गतिविधियों के दौरान ये शरीर में कई ज्यादा मात्रा में रिलीज़ हुआ. वहीं 2013 में समीक्षा के दौरान ये भी सामने आया, कि किसी पर विश्वास करने, किसी को प्यार से निहारने, किसी से सहानुभूति होने, अच्छे सम्बन्धों को याद करने, किसी से अच्छी बातचीत और बॉन्डिंग जैसी स्थितियों में भी ऑक्सीटॉसिन हार्मोन ज्यादा रिलीज़ होता है.

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 शरीर में ऐसे बनता है ऑक्सीटॉसिन

ऑक्सीटॉसिन एक हैप्पी हॉर्मोन है. इस हॉर्मोन का उत्पादन ब्रेन में मौजूद हाइपोथैलेमस द्वारा होता है और दिमाग का पोस्टीरियर पिट्यूटरी लोब इस हार्मोन को रिलीज़ करता है.ये एक न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में कार्य करता है. महिला और पुरुष दोनों में ही ये हार्मोन बनता है. ये हॉर्मोन प्रजनन में भी खास भूमिका निभाता है. माँ और बच्चे के रिश्ते में ऑक्सीटोसिन के प्रभाव पर मानव और जानवरों पर हुई एक स्टडी में ये पाया गया, कि बच्चे को बार-बार प्यार करने, उसे प्यार से सहलाने, लोरी सुनने और नहलाने-धुलाने के समय भी इस हार्मोन का स्तर बढ़ता है. साथ ही महिलाओं में, बच्चे को अपना दूध पिलाने के दौरान भी ये हार्मोन ज्यादा मात्रा में रिलीज़ होता है. वहीं पुरुषों में ये हॉर्मोन, शुक्राणु को स्थानांतरित करते समय ज्यादा रिलीज़ होता है. वर्ष 2010 में हुई एक स्टडी में ये पाया गया, कि पिता और बच्चे के बीच खास तरह की बातचीत से भी ऑक्सीटॉसिन का स्तर बढ़ता है.

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ये हॉर्मोन्स भी जुड़े हैं ऑक्सीटॉसिन से

ऑक्सीटॉसिन हॉर्मोन के साथ डोपामाइन और सेरोटोनिन हॉर्मोन को भी हैप्पी हार्मोन के रूप में जाना जाता है. जब आप किसी व्यक्ति के प्रति आकर्षण महसूस करते हैं, उस समय आपका दिमाग डोपामाइन हॉर्मोन रिलीज़ करता है. इससे सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है और ऑक्सीटॉसिन बनने लगता है. ये आपके अंदर पॉज़िटिव फीलिंग्स को बढ़ाता है. इसके साथ ही ऑक्सीटॉसिन आपके शरीर को कई भावनात्मक और सामाजिक स्थितियों के अनुकूल बनाने में मदद करता है. वर्ष 2010 में हुई एक रिसर्च के अनुसार इंट्रानैसल ऑक्सीटोसिन ऑटिज्म से पीड़ित लोगों को बेहतर समझने और सामाजिक संकेतों का जवाब देने में मदद कर सकता है.



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